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देशभर में आतंक का पर्याय बने आतंकी संगठन इंडियन मुजाहिदीन (आईएम)को ध्वस्त करने का पूरा श्रेय दिल्ली पुलिस के स्पेशल सेल को जाता है। यासीन भटकल को गिरफ्तार करने के बाद मार्च, 2014 में स्पेशल सेल की सूचना के आधार पर ही राजस्थान में गुप-चुप तरीके से उभर रहे 'मॉड्यूल' को ध्वस्त कर कई आतंकवादियों को गिरफ्तार किया गया था। साथ ही भारी मात्रा में विस्फोटक सामग्री भी बरामद की गई। राजस्थान समेत देश के विभिन्न हिस्सों में आतंकवादी बड़ी वारदात को अंजाम देना चाहते थे।
स्पेशल सेल का आईएम को ध्वस्त करने का सफर बटला हाउस मुठभेड़ से शुरू हुआ था। दिल्ली में सिलसिलेवार बम विस्फोट करने वाले मॉड्यूल का पर्दाफाश सितम्बर, 2008 में हुआ था। इस सिलसिले में उ. प्र. के आजमगढ़ से लेकर पुणे तक में छापेमारी की गई थी। दिल्ली में पांच स्थानों पर विस्फोट कर आतंकियों ने 26 लोगों की जान ली थी और 133 लोग घायल हुए थे। इस पूरे मॉड्यूल का खुलासा करने में स्पेशल सेल ने करीब 40 आतंकियों और उनके सहयोगियों को गिरफ्तार किया था। वर्ष 2011 में स्पेशल सेल ने 13 फरवरी, 2010 को पुणे में जर्मन बेकरी पर हुए बम धमाके, 17 अप्रैल, 2010 को बेंगलुरू के चिन्ना स्वामी स्टेडियम में हुए धमाके, 19 सितम्बर, 2011 में जामा मस्जिद में विदेशी पर्यटकों की बस पर किए गए हमले का पर्दाफाश किया। इसके बाद ही सेल यासीन भटकल और उसके सदस्यों के बारे में पुख्ता जानकारियां हासिल की थीं। 21 नवम्बर, 2011 में ही स्पेशल सेल ने कतील सिद्दिकी को गिरफ्तार किया था। इस दौरान दिल्ली पुलिस ने आईएम से जुड़े 14 आतंकवादियों को गिरफ्तार कर बिहार मॉड्यूल का पर्दाफाश किया। ये सभी बिहार, उत्तर प्रदेश, दिल्ली और महाराष्ट्र से जुड़े हुए थे। भारी मात्रा में इनके पास से विस्फोट सामग्री और अवैध हथियार बरामद किए गए थे। इसके बाद 27 सितम्बर, 2012 को दिल्ली के दक्षिण पूर्वी जिले से आतंकी असद खान और इमरान खान को गिरफ्तार किया गया था। इनसे भी भारी मात्रा में विस्फोटक सामग्री बरामद की गई थी। इसके बाद फिरोज, इरफान और मकबूल को गिरफ्तार किया गया था। अगस्त, 2012 में स्पेशल सेल ने पुणे के सिलसिलेवार बम धमाकों को भी सुलझाने का दावा किया।
दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल ने अपनी सूचना राजस्थान पुलिस से साझा कर 23 मार्च, 2014 को राजस्थान से आईएम के चार आतंकियों को गिरफ्तार किया। रहमान उर्फ वकास को 23 मार्च को अजमेर रेलवे स्टेशन पर पकड़ा गया। वह मुंबई से वहां पहुंचा था। उससे पूछताछ के आधार पर पुलिस ने उसके तीन अन्य सहयोगियों मो. महरूफ, मो. वकार अजहर उर्फ हनीफ और साकिब अंसारी उर्फ खालिद को गिरफ्तार किया था। इनसे भारी मात्रा में विस्फोटक सामग्री और डायरी बरामद हुई थी जिसमें विस्फोट बनाने की विधि लिखी हुई थी। उससे मात्र 20 मिनट में ही करीब 10 से 15 बम आसानी से बनाए जा सकते थे। जांच में इस बात का भी खुलासा हुआ था कि आतंकी वकास, मसूद अजहर के भड़कीले भाषण सुनकर ही आतंकी बना था। वकास 50 बडे़ आतंकियों की सूची में शामिल था और जामा मस्जिद में विदेशी पर्यटकों पर हुए हमले के बाद से उसकी सरगर्मी से तलाश थी। वह पाकिस्तान में बताए गए रियाज भटकल के सीधे संपर्क में था। जामा मस्जिद हमले के बाद वह वाराणसी, मुंबई, पुणे और हैदराबाद धमाकों में भी लिप्त रहा था। इस दौरान पुलिस ने 25 मार्च को नेपाल के पास से भारत में आईएम के प्रमुख तहसीन अख्तर उर्फ मोनू और राजस्थान से तीन अन्य आतंकियों को भी गिरफ्तार किया था। ये सभी आतंकी लोकसभा चुनाव से पूर्व दिल्ली, मुंबई, जयपुर, जोधपुर, लखनऊ, पटना, पुणे, हैदराबाद, बेंगलुरू , भुवनेश्वर, पुरी और रांची मंे विस्फोट कर दहशत मचाना चाहते थे। तहसीन की हैदराबाद, बोधगया और पटना की भाजपा रैली में धमाके के मामले में भी तलाश थी। वह आईएम के अलावा सिमी कार्यकर्ताआंे के बीच सक्रिय था। वह कई नामों से भारत में रह रहा था और भटकल बंधुओं का भी करीबी था। इसके बाद आतंकी बरकत, मो. इकबाल और मो. जावेद को गिरफ्तार कर लिया गया था।
वीडियो दिखाकर किया जाता है 'ब्रेनवाश'
इसकी जांच से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि जिहाद के नाम पर भारत में दहशत मचाने वाले आतंकवादी और उनके आका युवाओं को आतंकवादी बनाने के लिए उन्हें बार-बार बाबरी, गोधरा और मुजफ्फरनगर दंगों की तस्वीरें दिखाते हैं। खास बात यह है कि ये वास्तविक नहीं होती हैं और इन्हें 'यू ट्यूब' या अन्य साइट्स से डाउनलोड किया जाता है और फिर मुसलमान युवाओं को जिहाद के नाम पर तैयार किया जाता है। उन्हें ऐसा अहसास कराया जाता है कि वे और उनका इस्लाम खतरे में है।
यह बात उन सभी के दिमाग में घर कर चुकी होती है, जिसके बाद वे आसानी से किसी भी आतंकी घटना को अंजाम देने से नहीं चूकते, मार्च माह में पकड़े गए आतंकी वकास ने पुलिस के सामने खुलासा किया था कि वह आतंकी मसूद अजहर के भड़कीले भाषण सुनकर ही आतंकी बना था और उसके ऑडियो टेप सुनाकर ही दूसरे युवाओं को तैयार करता था।
“आईएम पर कार्रवाई करने में काफी सफलता मिली है, लेकिन यह पूरी तरह से खत्म नहीं हुआ है। इतना जरूर है कि कुछ समय के लिए यह आतंकी संगठन मजबूत चोट किए जाने के बाद से निष्क्रिय जरूर हो गया है, लेकिन भविष्य में वे लोग कब, क्या करेंगे? यह कहना संभव नहीं होगा। आईएम और सिमी के लोग अभी भूमिगत होकर कम उम्र के नौजवानों का इस्लाम के नाम पर 'माइंडवाश' कर रहे हैं और उन्हें भड़कीले और गलत वीडियो दिखाकर आतंकवादी गतिविधियों में शामिल करते हैं”।
—एस.—एन. श्रीवास्तव, विशेष आयुक्त दिल्ली पुलिस , स्पेशल सेल











