| दिंनाक: 07 Apr 2014 12:18:10 |
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मोबाइल फोन से सोशल मीडिया का प्रयोग करने वाले
यवाट्स-एप का दुनिया में जबरदस्त बोलबाला है। संदेश भेजने
के लिए रोजाना विश्व में 45 करोड़ से ज्यादा लोग इसका इस्तेमाल करते हैं।
यह दुनिया दिनों-दिन आभासी बनती जा रही है। ह्यवर्चुअलह्ण बन रही है, सत्य से परे और जमीनी हकीकत से कहीं दूर। पिछले 6-7 वर्ष में तकनीकी के क्षेत्र में बहुत कुछ बदला है। इंटरनेट की गति दस गुना से भी ज्यादा बढ़ी है। भारत में इंटरनेट का फैलाव पांच गुना से भी ज्यादा हुआ है। स्मार्ट फोन, टेबलेट का उपयोग बढ़ा है और ये सहज-सुलभ हुए हैं। इनके ग्राहकों की संख्या भी बढ़ी है। पहले इंटरनेट के लिए एक स्थान पर बैठना पड़ता था, लेकिन अब तो मोबाइल और टेबलेट द्वारा ही चलते-फिरते हम इंटरनेट का इस्तेमाल करते हैं।
इन सभी का असर इस आभासी दुनिया के बढ़ने में हो रहा है। अनेक नये उद्यमियों को इसमें बहुत बड़ा व्यवसाय दिख रहा है और कइयों को तो सफलता का ह्यशॉर्टकटह्ण भी दिख रहा है। लगभग 10 वर्ष पूर्व इसकी ह्यऑरकुटह्ण के माध्यम से उपस्थिति दिखी थी। सोशल मीडिया की कल्पना ऑरकुट ने ही भारत को दी। लोग ऑरकुट के माध्यम से संवाद करने लगे। ऑरकुट की शुरुआत 22 जनवरी, 2004 को हुई थी, जो कि सोशल मीडिया की पहली सीढ़ी थी। सर्च इंजन ह्यगूगलह्ण ने इसे शुरू किया था। सर्च इंजन की अतिरिक्त गतिविधि के रूप में ऑरकुट नाम के तुर्की के सॉफ्टवेयर इंजीनियर ने इसकी कल्पना की थी। गूगल ने उसी के नाम से इस सोशल साइट को प्रचलित किया। आज आरॅकुट इस आभासी दुनिया में बहुत पीछे छूट गया है। मात्र 3 करोड़ 30 लाख उपभोक्ताओं के साथ ऑरकुट का स्थान नगण्य है। इनमें से 60 फीसदी से ज्यादा उपभोक्ता ब्राजील से हैं तो 20 फीसदी के साथ भारत दूसरे स्थान पर है। मतलब ऑरकुट के 80 फीसदी से भी ज्यादा उपभोक्ता ब्राजील और भारत में बसते हैं। इसीलिए ऑरकुट का मुख्यालय भी गूगल ने ब्राजील में रखा है। ह्यफेसबुकह्ण आज इस आभासी दुनिया का सर्वमान्य चक्रवर्ती सम्राट है, जो कि ऑरकुट के मात्र एक महीने बाद शुरू हुई थी। 134 बिलियन डॉलर की यह कंपनी दुनिया में पांचवें स्थान पर सफलतम कंपनियों में से एक है। आज 123 करोड़ उपभोक्ताओं के साथ फेसबुक को दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा देश कहा जाता है। आबादी के मामले में इसने 121 करोड़ वाले भारत को इस आभासी देश ने पीछे छोड़ दिया है।
26 अक्तूबर, 2003 को हार्वर्ड में पढ़ने वाले मार्क झुकरबर्ग ने एक ह्यफेसमेशह्ण नाम का प्रोग्राम लिखा था, यहीं से फेसबुक का प्रारंभ हुआ। शुरू में फेसबुक की स्पर्धा ह्यमायस्पेसह्ण नामक सोशल साइट से थी, जो कि वर्ष 2005-08 तक दुनिया में सबसे ज्यादा उपयोग में लाई जाने वाली सोशल साइट थी। यह साइट मुख्यत: पॉप संगीत तथा संगीत के अन्य प्रकारों को समर्पित थी। वर्ष 2008 में फेसबुक ने मायस्पेस को ऐसा पीछे छोड़ा की बाद में फिर से पीछे मुड़कर नहीं देखा। कुछ वर्षों तक आयरलैंड के डबलिन में फेसबुक का मुख्यालय रहा जिसे बाद में अमरीका लाया गया। 2007 से 2009 का समय फेसबुक के लिए क्रांतिकारी समय था। इन वर्षों में फेसबुक ने क्रमश: 188 और 177 फीसदी वृद्धि की। भारत में फेसबुक का प्रचलन 2009 से ही बढ़ा था। इस बढ़त को कायम रखने के लिए फेसबुक ने अपने प्रयोग किए। फोटो शेयरिंग, मैसेज, वाइस कॉल, प्रोफाइल, प्राइवेसी, लाइक आदि के फीचर्स फेसबुक की लोकप्रियता की वजह बन गए।
फेसबुक की बिरंगी साइट का मूल रंग नीला है। इसके लिए संस्थापक झुकरबर्ग लिखते हैं कि ह्यनीला रंग सबसे समृद्ध रंग है, कारण यह भी है कि मैं सिर्फ नीला रंग ही देख पाता हूं।ह्ण एलेक्सा के अनुसार फेसबुक दुनिया की दूसरी सबसे ज्यादा उपयोग में लाई जाने वाली साइट है। दुनिया में फेसबुक के 6 करोड़ उपभोक्ताआंे वाला भारत तीसरे पायदान पर है। अमरीका में फेसबुक के 16 करोड़, जबकि ब्राजील में करीब 7 करोड़ उपभोक्ता हैं। मोबाइल के माध्यम से फेसबुक का इस्तेमाल करने वालों की संख्या एन्ड्रायड फोन में 2 करोड़, जबकि आईफोन में डेढ़ करोड़ है।
फेसबुक पर लोग व्यक्तिगत संबंधों और संपर्कों तक ही सीमित नहीं हैं। अनेक व्यावसायिक घराने इसका अपने उद्देश्य के लिए लाभ उठा रहे हैं। संभावित ग्राहकों तक पहंुचने के लिए फेसबुक प्रभावी है। निजी और राष्ट्रीयकृत बैंकों ने भी फेसबुक का काफी व्यावसायिक लाभ उठाया है। अभी कुछ समय पूर्व एक्सिस बैंक ने अपने फेसबुक पेज पर 2 मिलियन लाइक्स मिलने की खुशी में देशभर में समारोह आयोजित किए थे। वहीं 27 लाख लाइक्स के साथ आईसीआईसीआई बैंक का फेसबुक पेज भारतीय बैंकिंग में सबसे आगे है।
राजनेताओं के लिए भी फेसबुक अन्य माध्यमों की तुलना में सस्ता, लेकिन प्रभावशाली है। फेसबुक का उपयोग करने में गुजरात के मुख्यमंत्री और भाजपा की ओर से प्रधानमंत्री पद के प्रत्याशी नरेन्द्र मोदी दूसरे नेताओं से मीलों आगे हैं। मोदी के अनेक फेसबुक पेज हैं और उनके अधिकृत पेज पर 1 करोड़ से भी ज्यादा लाइक्स हैं, जबकि राहुल गांधी के अधिकृत पेज पर मात्र एक लाख 10 हजार ही लाइक्स हैं।
विश्व के राजनीतिक आंदोलनों पर फेसबुक का गहरा प्रभाव है। 2011 में इजिप्ट में हुई क्रांति में फेसबुक ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। भारत में भी अण्णा हजारे के आंदोलन से लेकर निर्भया आंदोलन में फेसबुक की प्रमुख भूमिका रही थी। फेसबुक सामाजिक स्तर पर हमें सभी के साथ जोड़कर रखता है। इस पर मित्रों और रिश्तेदारों की जानकारी सहज रूप से ही मिल जाती है। लेकिन फेसबुक का दूसरा पक्ष भी है कि लोगों को इसकी लत लग चुकी है। व्यावसायिक कारणों से फेसबुक ने भी गेम्स से लेकर विज्ञापनों तक फेसबुक का ऐसा इस्तेमाल किया, जो कि स्वस्थ समाज के लिए घातक है, ऐसा समाज शास्त्रियों का मानना है।
फेसबुक जैसी सबसे ताकतवर सोशल साइट अनेक देशों में नाकामयाब है। चीन, दक्षिण कोरिया, रूस, पूर्व यूरोप के सभी देश, जापान और ईरान आदि देशों में फेसबुक का स्थान नगण्य है। चीन में फेसबुक की प्रतिस्पर्धी सोशल साइट ह्यटेंसेंट क्यू क्यूह्ण या ह्यक्यू जोनह्णका ही बोलबाला है। एलेक्सा रैंकिंग में यह 7वें पायदान पर है। इसके 80 करोड़ से ज्यादा उपभोक्ता हैं, जो मुख्यत: चीनी हैं। इसी तरह जापान में 2 करोड़ उपभोक्ताओं के साथ ह्यमिक्सीह्ण नामक सोशल साइट का बोलबाला है। इसे देखते हुए फे सबुक ने अपने उपभोक्ताओं को बांधे रखने के लिए स्थानिक भाषा में विविध प्रयोग किए। आज फेसबुक अनेक भारतीय भाषाओं में उपलब्ध है।
फेसबुक की इस सफलता को देखकर अनेक सोशल साइट्स पिछले कुछ वर्षों में शुरू हुईं, लेकिन उनमें से अधिकांश व्यवसाय विशेष, रुचि विशेष या भाषा विशेष को लेकर ही थी। ट्विटर जैसे सभी के लिए या सामान्य श्रेणी के लिए बनी साइट्स कम ही हैं। गूगल ने भी ह्यगूगल प्लसह्ण बनाकर इस आभासी दुनिया में ऑरकुट की असफलता के बाद पुन: उतरने की कोशिश की है। आज दुनिया में ट्विटर का बोलबाला है। मात्र 140 अक्षरों में संदेश सीमित करने वाली यह ह्यमाइक्रोब्लोगिंग साइटह्ण आजकल देश और राजनीति की दिशा तय करती है। 2006 में शुरू हुई इस सोशल साइट के लगभग 25 करोड़ उपभोक्ता हैं। इसी तरह मोबाइल फोन से सोशल मीडिया का प्रयोग करने वाले ह्यवाट्स-एपह्ण का दुनिया में जबरदस्त बोलबाला है। संदेश भेजने के लिए रोजाना विश्व में 45 करोड़ से ज्यादा लोग इसका इस्तेमाल करते हैं। इसी कारण से फेसबुक ने इसे खरीदने में अपनी रुचि दिखाई। मजे की बात तो यह है कि वाट्स-एप बनाने वाले जनकुम को फेसबुक और ट्विटर ने नौकरी पर रखने से मना कर दिया था। संक्षेप में इंटरनेट का उपयोग करने वाला लगभग हर व्यक्ति आज किसी न किसी सोशल साइट से जुड़ा है। कल शायद फेसबुक भी पीछे छुट जाएगा और कोई दूसरी सोशल साइट सामने आएगी, लेकिन इस आभासी दुनिया में रंग भरने की प्रक्रिया निरंतर चलती रहेगी। प्रशांत पोल