जाटों को खुश करने पर फंसी केन्द्र सरकार
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.लोकसभा चुनाव के ऐन मौके पर वोटों की खातिर जाटों को आरक्षण देकर केन्द्र की संप्रग सरकार ने मुसीबत मोल ले ली है। जाटों को आरक्षण दिए जाने के खिलाफ ओबीसी आरक्षण समिति ने सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दाखिल की है। याचिका के संबंध में न्यायालय ने केन्द्र सरकार से 9 अप्रैल तक जवाब मांगा है।
पिछले दिनों संप्रग सरकार ने राजनीति करते हुए केन्द्रीय नौकरियों में जाटों को आरक्षण देने की घोषणा आनन-फानन में कर डाली, लेकिन याचिका दायर किए जाने से सरकार के लिए न्यायालय में उसे सही ठहराना आसान नहीं होगा। दरअसल पिछड़ेपन के आंकड़े जुटाए बिना आरक्षण देने की मनाही की गई थी, लेकिन वोट बटोरने में जुटी सरकार ने न्यायालय के पहले के फैसलों को देखना भी उचित नहीं समझा। आरक्षण देने से पहले सरकार को पहले से न्यायालय द्वारा तय मानकों को पूरा करना चाहिए था। इसके लिए आवश्यक है कि आरक्षण का लाभ पाने वाला समुदाय सामाजिक व आर्थिक रूप से पिछड़ा होना चाहिए। माना जा रहा है कि यह मामला भी लटक सकता है, जैसे कि सर्वोच्च न्यायालय की संविधानपीठ के समक्ष अल्पसंख्यक आरक्षण का मुद्दा अभी भी विचाराधीन है। कानून के जानकारों का कहना है कि आरक्षण देने से पहले सरकार को सर्वेक्षण कराना चाहिए था जिससे यह स्पष्ट किया जा सकता कि क्या जाटों की स्थिति आरक्षण दिए जाने के मानकों पर खरी उतरती है कि नहीं ।
ये हैं आरक्षण के मानक
1़ संबंधित समुदाय या वर्ग को आरक्षण देने से पूर्व सर्वेक्षण कराना कि वास्तव में आरक्षण पाने वाला समुदाय सामाजिक, आर्थिक व शैक्षणिक रूप से पिछड़ा हुआ है।
2़ सरकारी नौकरियांे में उनका प्रतिनिधित्व पर्याप्त न हो।
3़ आरक्षण 50 फीसदी से अधिक न हो।
4. केवल जाति और पंथ के आधार पर आरक्षण नहीं दिया जाए।
चुनाव की घड़ी निकट आने के साथ-साथ कांग्रेस संगठन में तेजी से संेध लग रही है। ताजा मामला 2 अप्रैल को उत्तर प्रदेश के गौतमबुद्धनगर का है। यहां से कांग्रेस प्रत्याशी रमेश चन्द्र तोमर ने कांग्रेस को तगड़ा झटका देते हुए भाजपा में शामिल होने की घोषणा कर डाली। राजनीतिक गलियारों में इस घटना से कांग्रेसी धराशायी हो गए हैं।
वहीं आआपा को तलाशने पर भी प्रत्याशी नहीं मिल रहे हैं और उनके लोग चुनाव लड़ने से पीछे हट रहे हैं। ऐसे में नरेन्द्र मोदी और भाजपा को नंबर एक प्रतिद्वंद्वी मानने वाले ये दोनों ही दल खुद भाजपा की बढ़ती लोकप्रियता से असुरक्षित महसूस कर रहे हैं।
गौतमबुद्धनगर सीट पर पहले चरण में 10 अप्रैल को मतदान होना है। ऐसे में कांग्रेसी प्रत्याशी का भाजपा में शामिल होना
भाजपा के लिए काफी सकारात्मक माना जा रहा है। तोमर ने कांग्रेस छोड़ने पर कहा है कि देश को मोदी की जरूरत है। तोमर पहले गाजियाबाद लोकसभा सीट से तीन बार भाजपा सांसद रह चुके हैं। पिछले लोकसभा चुनाव में जब इस सीट से भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने चुनाव लड़ा था तो उससे नाराज होकर तोमर ने पार्टी छोड़ दी थी।
गौरतलब है कि इससे पूर्व कांग्रेसी नेता जगदम्बिका पाल, सतपाल महाराज, कर्नल सोनाराम, राव इन्द्रजीत सिंह आदि नेता कांग्रेस का दामन छोड़कर भाजपा में शामिल हो चुके हैं। वहीं आआपा की स्थिति भी बदतर होती जा रही है। हालत यह है कि पार्टी टिकट देने के लिए कार्यकर्ताओं को मना रही है पर वे चुनाव लड़ने को तैयार नहीं हो रहे हैं। कौशांबी से डा़ शीतला प्रसाद भारतीय, जालंधर से उम्मीदवार राजेश पदम, फर्रुखाबाद से पत्रकार मुकुल त्रिपाठी और चंडीगढ़ से सविता भट्टी ने भी चुनाव लड़ने से इनकार कर दिया था। प्रतिनिधि











