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सरसंघचालक श्री मोहनराव भागवत ने किया पाञ्चजन्य और
सरसंघचालक श्री मोहनराव भागवत ने किया पाञ्चजन्य और
ऑर्गनाइजर का पत्रिका स्वरूप में लोकार्पण तेवर नहीं बदलेगा
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक श्री मोहनराव भागवत ने 24 मार्च को नई दिल्ली के सिविक सेंटर स्थित श्री केदारनाथ साहनी सभागार में राजधानी के विशिष्टजन के समक्ष इंडियन एक्सप्रेस समूह के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक श्री विवेक गोयनका के साथ संयुक्त रूप से पाञ्चजन्य एवं ऑर्गनाइजर के पत्रिका के रूप में प्रकाशित प्रथम अंकों का लोकार्पण किया। 66 वर्ष से टेब्लॉयड आकार में प्रकाशित हो रहे ये दोनों साप्ताहिक अब पत्रिका आकार में प्रकाशित किए जाएंगे।
श्री मोहनराव भागवत नेपाञ्चजन्य और ऑर्गनाइजर को स्पष्ट दिशा एवं वैचारिक ध्येयवादिता से पूर्ण पत्रकारिता का प्रमाण बताते हुए कहा कि परिवर्तन अपरिवर्तनीय नियम है। समय के अनुसार यात्रा चलती रहनी चाहिए, ये पत्र यदि पहले पत्रिका रूप में आ जाते तो बेहतर होता। देशकाल और परिस्थिति के अनुसार दृष्टि स्थापित होनी चाहिए। परिवर्तनशील दुनिया का सत्य शाश्वत है, वह हितकारी होगा, इसका भान रखना चाहिए। बड़े लक्ष्य और ध्येय के लिए यदि कुछ छोड़ना पड़े तो सहज भाव से तैयार रहना चाहिए। साधकों ने अपने श्रम से बड़े-बड़े पहाड़ों और चट्टानों को काटकर सहज-सरल बना दिया, ध्येयवादी व्यक्ति को कोई डिगा नहीं सकता। ज्यादा सावधानी की आवश्यकता अनुकूलता में ही पड़ती है क्योंकि कठिनाइयों में तो व्यक्ति वैसे भी पर्याप्त सावधानी के साथ चलता है। पाञ्चजन्य और ऑर्गनाइजर के संदर्भ में भी यही बात आती है कि कागज बदले, रंग बदले, लेकिन जो चीज सदा बनी रही यानी अपरिवर्तनशील है, यानी विचार, वह बना रहे।
सरसंघचालक ने आगे कहा कि आज संवाद माध्यमों का उत्तरोत्तर विस्तार हो रहा है। समाचार चैनलों और इंटरनेट के साथ सोशल मीडिया व्यापक पहंुच बना रहा है, जबकि पहले भी लोग गांव-गांव जाते थे, प्रवचन करते थे, इतिहास बताते थे और इस प्रकार समाज और देश के ज्वलन्त विषयों पर चर्चा करते थे। इसलिए संप्रेषण का जो प्रभावी माध्यम जब प्रासंगिक हो उसका सही उपयोग करना ही बुद्धिमानी है। विचारों की स्पष्टता और संवाद की निरंतरता संप्रेषण का लक्ष्य होना चाहिए। हालांकि आजकल के संवाद माध्यम तो विसंवाद ज्यादा बढ़ा रहे हैं। प्रत्येक व्यक्ति, संगठन अथवा समाज में गंतव्य की स्पष्टता होनी चाहिए ,मैं कौन हूं और मुझे कहां जाना है, इस विषय की समुचित परिस्थितियों के विचार का विवेक और स्पष्टता होनी चाहिए, तभी सार्थक संवाद स्थापित हो सकेगा।
श्री भागवत ने स्वयंसेवकों द्वारा देशहितार्थ किए जा रहे कायोंर् का उल्लेख करते हुए कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यकर्ताओं द्वारा जो प्रकल्प और सेवा कार्य खड़े किए गए हैं, वे सभी संपूर्ण समाज को एक विशिष्ट दिशा की ओर ले जाने वाले हैं। समाज के सभी क्रियाकलापों में समय और परिस्थितिजन्य परिवर्तन होने के कारण इसका अनुकरण स्वाभाविक है। यह हम सभी देख रहे हैं, लेकिन इस परिवर्तन में हमें अपरिवर्तनीय चीज नहीं भूलनी चाहिए। राष्ट्रवाद में वाद-विवाद होना ही नहीं चाहिए, राष्ट्रीयता सीधा शब्द है। इसी प्रकार अंग्रेजी में ह्यहिन्दूज्मह्ण की जगह ह्यहिन्दूनेस्सह्ण का प्रचलन ज्यादा प्रभावी रहेगा। विचारधाराएं अलग-अलग हैं और उन्होंने अपने हिसाब से शब्दों और विषयों को भ्रामक बना दिया है।
सरसंघचालक ने विचार और दृष्टि को शाश्वत, व्यापक और प्रासंगिक बताते हुए कहा कि पतंग को यदि किसी ने नीचे डोर से नहीं थामा हो तो वह स्वच्छंद उड़ती जाएगी। समाज के लोगों में भी यह विवेक होना चाहिए। व्यक्ति होने के नाते सभी के छोटे-छोटे निहित स्वार्थ हो सकते हैं, लेकिन देश के विषय में आबाल वृद्ध सभी को सत्य के आलोक में एक होना चाहिए। राष्ट्र और इससे भी आगे सृष्टि के सभी कार्यकर्ताओं के हित के विषय में हमारी एक सोच होनी चाहिए। हमें आत्मकेंद्रित और स्वार्थी न होकर सभी के कल्याण का संकल्प लेना चाहिए। अपने देश मंे व्याप्त भाषा, जाति अथवा सम्प्रदाय की विविधताओं को बचाते हुए एक रसायन बनाकर राष्ट्रीयता के आधार पर सभी को एक विचार बनाना चाहिए और आपस में समय-समय पर संवाद स्थापित करना चाहिए।
यह कार्य स्वतंत्रता के शीघ्र बाद होना चाहिए था, लेकिन नहीं हो पाया। भावात्मक एकता का नारा उछलता रहा, चर्चाएं होती रहीं किन्तु ठोस परिणाम नहीं दिखा। लेकिन इस महत्वपूर्ण कार्य को निरंतर हमारे ये दो साप्ताहिक कर रहे हैं और इन्हें यह आगे भी करना है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संस्कार और प्रेरणा निरंतर संबल प्रदान करेंगे। परस्पर भी समाज में मत अलग-अलग हो सकते हैं, किन्तु मन भिन्न नहीं होना चाहिए। ह्यवादे-वादे जायते तत्वबोध:ह्ण हमारी शास्त्रार्थ वाली समृद्ध परम्परा है। प्रजातांत्रिक तंत्र में सभी को यह अधिकार है कि मैं तुम्हारी बात को नहीं मानता, लेकिन तुम अपनी बात रखो।
उन्होंने आगे कहा, जन प्रबोधन सभी का धर्म है और परम कर्तव्य है। ह्यसत्यं ब्रूयात् प्रियं बू्रयात् मा ब्रूयात् सत्यं अप्रियमह्ण – व्यक्ति को जोड़ने के लिए असत्य मत बोलो। आज कुशलतापूर्वक कार्य करने की आवश्यकता है। समाज के प्रबोधन का कर्तव्य संचार माध्यमों का भी है। आज आवश्यकता ऐसे समाहार की है, जिस प्रकार नमक के घोल को नमक के स्फटिक से बनाया जाता है और घोल बनाते समय यह भी ध्यान रखा जाता है कि बिना घुले ही स्फटिक और अधिक नमक एकत्रित करे। इस स्फटिक पर घोल जमा होकर और बड़ा आकार लेता है-पाञ्चजन्य और ऑर्गनाइजर ने इतने वर्षों तक नमक के स्फटिक की इस परम्परा को अखंड और अक्षुण्ण रूप में आगे बढ़ाया है। समय के अनुसार रूप बदलना पड़ता है किन्तु जो व्यक्ति स्वयं नहीं बदलता वही मुत्युञ्जय या कालजयी बनता है। राम जन्मभूमि आंदोलन के समय लोग वहां के प्रामाणिक समाचारों के लिए पाञ्चजन्य पर ही विश्वास करते थे।
श्री भागवत ने कहा, विचारधारा अलग-अलग हैं, लेकिन सत्य एक ही है और इसी के अनुसार जो लोग चलेंगे वे धैर्यशाली हैं। ह्यधृति उत्साह समन्वित:ह्ण अर्थात धैर्य और साहस दोनों को यदि आधार मिलेगा और विचारों की भूमि में जिनके पैर पक्के और गढ़े हुए होंगे वो स्वयं की चिन्ता नहीं करेंगे, बल्कि संकल्प की पूर्ति में सहायक बनेंगे। बचपन में भटकने की इच्छा नहीं होती और बुढ़ापे में शक्ति नहीं होती। पाञ्चजन्य और ऑर्गनाइजर अभी तारुण्य की अवस्था में हैं। कहां जाना है और हम क्या हैं, इस परिस्थिति का विचार करते हुए जो तपस्वी परम्परा इन्हें विरासत में प्राप्त हुई है- उन उदाहरणों और आदर्शों को लेकर आगे बढ़ना होगा। विपत्तियों से न डरते हुए उद्यम, साहस और धैर्य के साथ मार्ग को कठिन न मानते हुए सफल होना है। यही सुफल और शुभकामना मैं इनके लोकार्पण के अवसर पर हृदय से प्रदान करता हूं।
पाञ्चजन्य और ऑर्गनाइजर को वैचारिक और साहसिक पत्रकारिता का ज्वलंत उदाहरण बताते हुए इंडियन एक्सप्रेस समूह के चेयरमैन व प्रबंध निदेशक श्री विवेक गोयनका ने कहा कि लोकतंत्र में जन सरोकारों पर राय और संवाद के सबसे प्रभावी माध्यम समाचार पत्र-पत्रिका ही होते हैं। यह मेरे लिए व्यक्तिगत रूप से परम सौभाग्य और गौरव का विषय है कि आज से 40 वर्ष पूर्व जब में कॉलेज का छात्र था, तब मैंने ऑर्गनाइजर की आजीवन सदस्यता ली थी। पिछले 28 वर्षों से इंडियन एक्सप्रेस के प्रकाशक के रूप में मेरी पहली चिंता प्रसार या प्रबंधन की नहीं, बल्कि पत्र में निहित सामग्री की ही होती है। दैनिक समाचार पत्र से ज्यादा सामग्री और संवाद की संभावना साप्ताहिक पत्र-पत्रिकाओं में होती है और अब अपने नये तेवर और कलेवर में पूरी ताकत के साथ ये और भी अधिक लोकप्रिय होंगे ऐसा मेरा विश्वास है। हाल ही में आए सर्वेक्षणों से भी यह प्रमाणित हुआ है कि देश में 66 प्रतिशत से भी अधिक लोग पत्रिकाओं को पढ़ने में ज्यादा रुचि लेते हैं। भारत में लोकतंत्र यौवन पर है और अपनी वैचारिक प्रतिबद्धता को कायम रखते हुए पत्र-पत्रिकाएं गांव-गांव, घर, शहर तक पहंुचकर अपने ध्येय को पूर्ण करती हुई अपना प्रसार बढ़ा सकती हैं। तरुण भारत जैसे पत्र हमारे सामने प्रभावी उदाहरण प्रस्तुत करते हैं। देश, समाज तथा भौगोलिक सीमाओं के परे मीडिया को विश्व पटल पर अपनी उपस्थिति दिखानी होगी। सोशल मीडिया और डिजिटल मीडिया का भरपूर इस्तेमाल करने की आवश्यकता है। हमारे युवा पत्रकारों में जुझारूपन और साहस के साथ समकालीन मुद्दों पर बेबाक राय रखने का प्रखर भाव मौजूद होना चाहिए। जनता तक पहंुच बनाने के लिए अपनी चिर-परिचित शैली को कायम रखते हुए समय के साथ-साथ संसाधनों को दुरुस्त करते हुए संपादकीय विभाग में युवा शक्ति का समाहार करते हुए प्रसार के लिए भी यदि व्यापक मार्केटिंग टीम स्थापित हो जाए तो ऐसे वैचारिक पत्र-पत्रिकाएं और अधिक उपयोगी व लोकप्रिय हो सकेंगे। पाञ्चजन्य और ऑर्गनाइजर को इस नये स्वरूप के साथ पाठकों के सम्मुख उपस्थित होने पर मैं अपनी शुभकामनाएं देता हूं।
पाञ्चजन्य के संपादक श्री हितेश शंकर ने राष्ट्रवादी पत्रकारिता की अनवरत यात्रा का चित्रण करते हुए कहा कि पत्रकारिता की इस विकास यात्रा में हम विचार, तथ्य, सत्य और आग्रह का पाथेय लेकर चले थे। आज राज्य की चिन्ता नीति से बड़ी हो गई है। पं. दीनदयाल उपाध्याय ने राष्ट्र के लिए समर्पित जिन मूल्यों की रक्षा के लिए ये बीज बोये और अटल बिहारी वाजपेयी ने जिसको अपनी प्रतिभा से सींचा उस भावधारा को नई परिस्थितियों के अनुरूप दोनों ही पत्रिकाओं को सामान्य मीडिया से अलग वैचारिक समृद्धि को संरक्षित करते हुए आगे बढ़ाना है। महात्मा गांधी की हत्या से लेकर आपातकाल और अन्य प्रासंगिक घटनाआंे पर पाञ्चजन्य और ऑर्गनाइजर ने जिस तरह वैचारिक सामग्री को सहेजने का कार्य किया, वह आज के मीडिया कर्मियों के लिए संदर्भ सामग्री के रूप में अत्यंत उपयोगी सिद्ध हो सकती है।
ऑर्गनाइजर के संपादक श्री प्रफुल्ल केतकर ने अतिथियों एवं उपस्थित आगंतुकों का धन्यवाद ज्ञापन करते हुए कहा कि पत्रिका के रूप में भी हमारे विचार और दृष्टि को पहले की तरह देशव्यापी समर्थन एवं सहयोग प्राप्त होगा, ऐसा हमारा विश्वास है। मंच संचालन भारत प्रकाशन (दिल्ली) के महाप्रबंधक श्री जितेंद्र मेहता और अतिथियों का स्वागत निदेशक श्री आलोक कुमार और विकास महाजन ने किया। भारत प्रकाशन (दिल्ली) के प्रबंध निदेशक श्री विजय कुमार ने अतिथियों को स्मृति चिन्ह प्रदान किये। इस अवसर पर पाञ्चजन्य और ऑर्गनाइजर की विकास यात्रा पर केन्द्रित एक लघु वृत्तचित्र का भी प्रदर्शन किया गया, जिसकी सभी ने मुक्तकंठ से प्रशंसा की। ल्ल पाञ्चजन्य ब्यूरो
पाञ्चजन्य और ऑर्गनाइजर अभी तारुण्य की अवस्था में हैं। कहां जाना है और हम क्या हैं, इस परिस्थिति का विचार करते हुए, विपत्तियों से न डरते हुए उद्यम, साहस और धैर्य के साथ मार्ग क ो कठिन न मानते हुए सफल होना है। परिवर्तन अपरिर्वतनीय नियम है। समय के अनुसार यात्रा चलती रहनी चाहिए, ये पत्र यदि पहले पत्रिका रूप में आ जाते तो बेहतर होता। देशकाल और परिस्थिति के अनुसार दृष्टि स्थापित होनी चाहिए। परिवर्तनशील दुनिया का सत्य शाश्वत है, वह हितकारी होगा, इसका भान रखना चाहिए। – मोहनराव भागवत, सरसंघचालक, रा.स्व.संघ
दैनिक समाचार पत्र से ज्यादा सामग्री और संवाद की संभावना साप्ताहिक पत्र-पत्रिकाओं में होती है और अब अपने नये तेवर और कलेवर में पूरी ताकत के साथ ये और भी अधिक लोकप्रिय होंगे ऐसा मेरा विश्वास है। देश में 66 प्रतिशत से भी अधिक लोग पत्रिकाओं को पढ़ने में ज्यादा रुचि लेते हैं। भारत में लोकतंत्र यौवन पर है और अपनी वैचारिक प्रतिबद्धता को कायम रखते हुए पत्र-पत्रिकाएं गांव-गांव, घर, शहर तक पहंुचकर अपने ध्येय को पूर्ण करती हुई अपना प्रसार बढ़ा सकती हैं। -विवेक गोयनका, चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक, इंडियन एक्सप्रेस समूह
गणमान्यजन की
गरिमामय उपस्थिति
लोकार्पण समारोह में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह सरकार्यवाह श्री सुरेश सोनी, डॉ. कृष्ण गोपाल, अ.भा. प्रचार प्रमुख श्री मनमोहन वैद्य, उत्तर क्षेत्र के क्षेत्र प्रचारक श्री रामेश्वर, पूर्व उप प्रधानमंत्री श्री लालकृष्ण आडवाणी, भाजपा नेता सर्वश्री सुब्रह्मण्यम स्वामी, बलबीर पुंज, विजय गोयल, तरुण विजय, नेशनल दुनिया अखबार के चेयरमैन श्री शैलेन्द्र भदौरिया, सुदर्शन टी.वी. के चेयरमैन श्री सुरेश चव्हान, सूर्या रोशनी लिमिटेड के चेयरमैन श्री जयप्रकाश, वरिष्ठ पत्रकार श्री वेदप्रताप वैदिक, श्री प्रभु चावला, पूर्व राजदूत सर्वश्री ओ.पी. गुप्ता, विद्या सागर वर्मा, कैलाश अग्रवाल, वित्त मंत्रालय के पूर्व सलाहकार श्री एम.एल. मेहता और योजना आयोग के पूर्व संयुक्त सलाहकार श्री वी.के.मेहता सहित अनेक गणमान्यजन उपस्थित थे।











