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'संगठित शक्ति के माध्यम से ही राक्षसी प्रवृत्ति का विध्वंस करना संभव हो सकेगा। दुर्गा माता संगठित शक्ति का प्रतीक हैं इसलिए आज महिलाओं को दुर्गा रूप धारण कर समाज में व्याप्त सभी प्रकार की राक्षसी प्रवृत्तियों को नष्ट करने हेतु आगे आना होगा'। उक्त विचार राष्ट्र सेविका समिति की प्रमुख संचालिका सुश्री शान्ता अक्का ने व्यक्त किए। वे गत 22 अक्तूबर को नागपुर में आयोजित राष्ट्र सेविका समिति के विजयादशमी उत्सव में सेविकाओं को संबोधित कर रही थीं।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में पंजाबराव देशमुख कृषि विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति डा. शरद निम्बालकर उपस्थित थे। मंच पर राष्ट्र सेविका समिति की विदर्भ प्रान्त कार्यवाहिका सुश्री सुलभा गौड़ एवं नागपुर विभाग कार्यवाहिका सुश्री करुना साथै भी विराजमान थीं।
सुश्री अक्का ने कहा कि आज हिन्दू संस्कृति पर अनेक प्रकार के आक्रमण हो रहे हैं, उनके प्रतिकार के लिए शक्ति चाहिए। मां दुर्गा शक्ति का प्रतीक हैं। हर स्त्री शक्तिरूपिणी है, यह समिति की मान्यता है। इसी आधार पर समिति के माध्यम से उस शक्ति को जगाने का प्रयास अनवरत चल रहा है। भारतीय संस्कृति में व्यक्ति के दुर्गुणों के नाश के लिए अनेक सुन्दर उपाय बताये गए हैं, विजयादशमी का संदेश भी यही है।
सुश्री अक्का ने कहा कि मां सरस्वती, मां लक्ष्मी और मां दुर्गा ये ज्ञान, संपत्ति और शक्ति की प्रतीक हैं। एक व्यक्ति के जीवन से लेकर विश्व को सुव्यवस्थित रूप से चलने के लिए ज्ञान, संपत्ति एवं शक्ति की महती आवश्यकता है। महिलाओं की क्षमता का परिचय भी इसी से होता है क्योंकि संपूर्ण विकसित तथा सुसंस्कृत व्यक्तित्व का निर्माण एक मां के द्वारा ही संभव हो सकता है और वह करती भी है।
स्वामी विवेकानंद तथा अन्य लोगों के कथनों को उद्धृत करते हुए सुश्री अक्का ने कहा कि हिन्दू ही संपूर्ण विश्व में समरसता निर्माण कर सकता है क्योंकि उनके रक्त में ही दूसरों के हित का विचार समाहित है। इसलिए इस पवित्र विचार के साथ प्रत्येक हिन्दू को अपनी तेजस्विता बढ़ाकर धर्म, संस्कृति और परंपरा में विश्वास रखकर स्वाभिमान के साथ जीना सीखना चाहिए।
सुश्री अक्का ने कहा कि आत्मविश्वास से ओतप्रोत तेजस्वी हिन्दू ही धर्माधिष्ठित समाज निर्माण कर सकता है। सच्चरित्र, समृद्धि, सात्विक शक्तियुक्त और सुव्यवस्थित समाज ही धर्माधिष्ठित समाज है। उन्होंने कहा कि महालक्ष्मी सच्चरित्र और समृद्धि की प्रतीक हैं। इनफोसिस की प्रमुख सुधा मूर्ती का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि ऐसा निश्चय करने वाली माताओं के कारण ही भ्रष्टाचार पर रोक लग सकती है।
घोटालों पर बोलते हुए सुश्री अक्का ने कहा कि घोटालों की बाढ़ को रोकने का सामर्थ्य संगठित शक्ति में है। आज भारतीय समाज अपने मूल चिंतन से हटकर अपने जीवन में धन कमाने को ही महत्व दे रहा है इसके कारण उसका नैतिक पतन होता दिखाई देता है।
महिलाओं पर होने वाले अत्याचारों का उल्लेख करते हुए सुश्री अक्का ने कहा की महिलाओं के विरुद्ध दिन- प्रतिदिन बढ़ते हुए अत्याचार का कारण महिलाओं की ओर देखने की समाज की दृष्टि में परिवर्तन आना है। महिला को एक उपभोग की वस्तु माना जा रहा है। यह दृष्टि बदलने की आवश्यकता है।
पड़ोसी देशों के साथ मैत्रीपूर्ण संबंधांे पर जोर देते हुए सुश्री अक्का ने कहा की विभिन्न देशों के साथ हमारे जो सम्बन्ध हैं उसके प्रति हमें सचेत रहना होगा। चीन की विस्तारवादी नीति का उल्लेख करते हुए उन्होंने देश के नेताओं को चीन से सावधान रहने की चेतावनी दी।
डा. शरद निम्बालकर ने कहा कि स्त्री को उसके स्वत्व की पहचान करा देना आज की महती आवश्यकता है। महिलाओं का बाजार के रूप में अवमूल्यन होने से समाज में एक नया धोखा निर्माण हुआ है। कन्या भ्रूणहत्या निंदनीय तथा लज्जास्पद है। इसको रोकने के लिए कानून है पर उस पर अमल नहीं होता। अत: केवल कानून बनाने से काम नहीं चलेगा। स्त्री को शिक्षित करना अब बहुत जरूरी हो गया है।
कार्यक्रम के प्रारंभ में अतिथियों का परिचय सुश्री स्मिता पत्तरकिने ने कराया। कार्यक्रम का संचालन सुश्री मेधा नांदेड़कर ने किया और सुश्री मयूरी वलदे ने व्यक्तिगत गीत का गायन किया। कार्यक्रम में सेविकाओं ने योगासन तथा घोष का सुंदर प्रदर्शन किया। सुषमा पाचपोर
राजस्थान वनवासी कल्याण परिषद् की प्रान्तीय कार्यकर्ता बैठक सम्पन्न
आगामी वर्ष की योजना पर चर्चा
राजस्थान वनवासी कल्याण परिषद् की दो दिवसीय प्रान्तीय कार्यकर्ता बैठक गत दिनों पिण्डवाड़ा जिला सिरोही में सम्पन्न हुई। बैठक में प्रान्त के सभी 15 जनजाति जिलों से 209 एवं नगर से 19 सहित कुल 228 कार्यकर्ताओं ने भाग लिया। बैठक में अ.भा. वनवासी कल्याण आश्रम के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री जगदेवराम उरांव पूरे समय उपस्थित रहे एवं कार्यकर्ताओं का उत्साहवर्धन किया।
बैठक के उद्घाटन समारोह की अध्यक्षता सेवानिवृत्त जिला शिक्षा अधिकारी श्री सुन्दरलाल परमार ने की। विशिष्ट अतिथि के रूप में सेवानिवृत्त श्रम आयुक्त श्री रूपलाल डामोर, सेवानिवृत्त भारतीय प्रशासनिक अधिकारी श्री हरिकृष्ण डामोर एवं बिनानी सीमेंट के ठेकेदार श्री एन.के.शर्मा उपस्थित थे। इस अवसर पर मंच पर कल्याण आश्रम के प्रान्तीय अध्यक्ष श्री रामसिंह गरासिया एवं क्षेत्रीय संगठन मंत्री श्री सुरेशराव कुलकर्णी भी उपस्थित थे।
बैठक में प्रदेश संगठन मंत्री श्री भगवान सहाय ने कल्याण आश्रम के षष्ठीपूर्ति वर्ष 2012-13 एवं बालासाहब देशपाण्डे जन्मशताब्दी वर्ष 2013-14 में सम्पन्न किये जाने वाले कार्यक्रमों के साथ ही वर्तमान में 1145 स्थानों पर 1338 प्रकल्प संचालित किये जाने की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि इन दो वर्षों में प्रमुख रूप से चार प्रकार के कार्यक्रम सम्पन्न किये जाने वाले हैं जिनमें वृक्षारोपण, चिकित्सा शिविर, प्रखण्ड सम्मेलन एवं सम्पर्क अभियान होंगे।
बैठक में सभी जिला संगठन मंत्रियों ने आगामी वर्ष की कार्य-योजना के लक्ष्यों को सबके सम्मुख प्रस्तुत किया। प्रतिनिधि











