अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने केरलम के कोच्चि स्थित त्रिपुनीथुरा गवर्नमेंट संस्कृत कॉलेज के छात्रसंघ चुनाव में सभी 12 सीटों पर जीत हासिल करके अपनी मजबूत होती जनाधार को नई पहचान दी है। इस जीत के साथ ही इस कैंपस में वामपंथी छात्र संगठन स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई) के चार दशकों से अधिक समय के प्रभाव को समाप्त कर दिया है। इस जीत में स्निग्धा एम. हरि चेयरपर्सन और आदित्य टी.ए. वाइस-चेयरपर्सन के पद पर निर्वाचित हुए हैं। केरलम की यह जीत हाल ही में दिल्ली यूनिवर्सिटी स्टूडेंट्स यूनियन (डूसू) और चंडीगढ़ के पंजाब यूनिवर्सिटी छात्र संघ चुनाव में एबीवीपी के शानदार प्रदर्शन के बाद आई है।
दिसंबर 2025 में हुए स्थानीय निकाय चुनावों में भाजपा ने तिरुवनंतपुरम नगर निगम के चुनावों में 50 सीटों पर जीत हासिल की और पहली बार निगम में अपनी सरकार बनाई थी। इस जीत के साथ ही राजधानी तिरुवनंतपुरम के स्थानीय निकाय पर पिछले साढ़े चार दशकों से चले आ रहे वाम लोकतांत्रिक मोर्चा के एकाधिकार का भाजपा ने अंत कर दिया था। यह काम कांग्रेस इतने लम्बे समय काल में भी नहीं कर सकी थी। भाजपा नेता वी.वी. राजेश तिरुवनंतपुरम के नए महापौर चुने गए जो केरल के इतिहास में किसी भी निगम में भाजपा के पहले मेयर हैं। इस चुनाव में एलडीएफ को 29 और कांग्रेस नीत यूडीएफ को 19 सीटों पर संतोष करना पड़ा था। यह चुनाव केरल की राजनीति में इसे एक बड़ा और अहम मोड़ था।
भाजपा ने उसके बाद केरल विधानसभा चुनाव में शानदार प्रदर्शन करते हुए तीन सीटों पर जीत दर्ज की। इसके साथ ही छह सीटों पर दूसरे पायदान पर रहकर राज्य में अपनी मजबूती से सबको चकित कर दिया था। भाजपा ने 2024 के लोकसभा के चुनाव में त्रिशूर लोकसभा सीट जीतने के साथ ही तिरुवनंतपुरम लोकसभा सीट पर लगातार तीन बार से दूसरे पायदान पर रही है। इसके पूर्व 2016 में भाजपा ने नेमोम सीट जीतकर राज्य में पहली बार खाता खोला था। केरल में माकपा नीत लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट और कांग्रेस नीत यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट के बीच भाजपा के मतदाता आखिरी समय में अपने दूसरे विकल्प के आधार पर मुख्यतः एलडीएफ की ओर झुक जाते थे।
आखिरी सांसे गिन रहा वामपंथ
2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा 11 विधानसभा सीटों पर प्रथम पायदान पर और 9 सीटों पर दूसरे पायदान पर रहकर कुल 20 सीटों पर सीधे मुकाबले में रही थी। केरल की जनता एलडीएफ को उसके दस वर्षों के कुशासन के कारण पूर्णतः नकारते हुए भाजपा की ओर रुख कर रही है। वाम दलों के समर्थक भी अब अपने गठबंधन के लिए मतदान करने के लिए अधिक दिलचस्पी नहीं दिखा रहे हैं क्योंकि मुख्यमंत्री रहे पी विजयन ने अपने दामाद मोहम्मद रियास को ही पूरे कार्यकाल में आगे बढाने और अपना उत्तराधिकारी बनाने में लगे थे। पी विजयन ने दामाद मोहम्मद रियास को महत्वपूर्ण मंत्रालयों की जिम्मेदारी दी और अपने पार्टी के पुराने नेताओं को नज़रअंदाज किया था। इस कारण अब वाम दलों से जनता किनारा कर रही है। एबीवीपी की जीत से यह साफ संकेत है कि केरलम में वामपंथ अब आखिरी सांसे गिन रहा है।

















