|
दो सांप आपस में बातें कर रहे थे। एक बोला, 'दोस्त, कल टी.वी. में मैंने एक अजीब बात देखी।'
'क्या भाई?' दूसरे सांप ने पूछा।
'एक आदमी ने अपने दो साल के बेटे का कत्ल कर दिया।'
'क्यों, क्या खाने के लिए?' दूसरे सांप ने पूछा।
'नहीं, धन-दौलत पाकर अमीर होने के लिए। ऐसा उसको किसी तांत्रिक ने बताया था।'
'अपने बच्चे मारकर आदमी अमीर कैसे होता है। हम तो अपने अण्डे या बच्चों को भूख मिटाने के लिए खाते हैं। यह हमारी प्रवृत्ति है। इससे हम अमीर तो नहीं होते।'
'सच कहते हो। इससे हम अमीर तो नहीं होते।'
'सच कहते हो। हम अपनी प्रवृत्ति के अनुसार दूसरे सांपों को खाते हैं। कुछ जानवर अपनी ही जाति के जानवरों को खाकर अपनी भूख मिटाते हैं, जैसे सांप और मछली। कई बड़े जानवर अपने से छोटे जानवरों को मारकर खाते हैं। प्रकृति के नियमानुसार हम जानवर ऐसा करते हैं, परन्तु आदमी अपनी प्रवृत्ति और प्रकृति के विपरीत कई कार्य करता है।'
'जैसे…' दूसरे सांप ने जिज्ञासा प्रकट की।
'देखो, सभी जीवों की सहज प्रवृत्ति होती है भूख। इसके लिए हम स्वाभाविक रूप से जो करते हैं, वह प्राकृतिक होता है, परन्तु मनुष्य के अन्दर भूख के अलावा लालच भी होता है। उनकी हत्या वह गड़े हुए धन को पाने या दूसरों का धन हड़पने के लिए करता है। इससे भी उसे संतुष्टि नहीं मिलती है, तो वह और ज्यादा हत्याएं करता है। जीवन भर वह पाप करता रहता है, फिर भी उसका लालच कभी खत्म नहीं होता।'
'तो क्या लालच भूख से ज्यादा खतरनाक प्रवृत्ति होती है?'
'हां,' पहले वाले सांप ने विश्वास भरे स्वर में कहा।
'तब तो इन मनुष्यों से अधिक अच्छे हम सांप हैं, जो केवल पेट भरने के लिए ही अपने बच्चों का भक्षण करते हैं। एक बार पेट भरने के बाद जब तक दुबारा भूख नहीं लगती, तब तक हम किसी दूसरे सांप को नहीं मारते।'
'हां, परन्तु मनुष्य तो बिना भूख के दूसरों का ही नहीं अपनों का ही खून करता रहता है। टीवी समाचार देखकर मुझे तो लगता है, जहां केवल भूख है, वहां संघर्ष है। जहां भूख के साथ लालच है, वहां अनाचार, अत्याचार और शोषण है। अच्छा हुआ, हम सांप की योनि में पैदा हुए हैं। एक बार पेट भरने के बाद हम आराम की नींद तो लेते हैं। आदमी लालच के चक्कर में कभी सुख की नींद नहीं ले पाता और जीवन भर हजार तरह की बीमारियों से ग्रस्त रहता है।' पहले सांप ने संतुष्टि के भाव से कहा। 'छोड़ो, यार इन पापी मनुष्यों की बातें। अब टी.वी. बन्द करो और आराम की नींद सो जाओ। कल भोजन के लिए जल्दी निकलना है।' दूसरे सांप ने तिरस्कृत भाव से कहा और करवट बदल कर लेट गया। इसके बाद दोनों सांप गहरी नींद में सो गए। राकेश भ्रमर











