विविध
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– सुशील मोदी, उप मुख्यमंत्री, बिहार
दिल्ली में
'जन आंदोलनों का महत्व' विषयक संगोष्ठी
दिल्ली स्थित दीनदयाल शोध संस्थान में गत 25 जून को देश पर लगे आपातकाल की स्मृति में विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। 'जन आंदोलनों का महत्व' विषय पर आयोजित गोष्ठी के मुख्य अतिथि बिहार के उप मुख्यमंत्री श्री सुशील मोदी थे, जबकि अध्यक्षता अभाविप के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री राजकुमार भाटिया ने की। वक्ता के रूप में वरिष्ठ पत्रकार श्री राम बहादुर राय उपस्थित थे।
श्री सुशील मोदी ने अपने उद्बोधन में कहा कि कि 12 जून 1975 को इलाहाबाद उच्च न्यायालय में भ्रष्टाचार के आरोपों में इंदिरा गांधी को दोषी पाया गया। नियम के अनुसार उन्हें अपना पद छोड़ देना चाहिए था, किन्तु उन्होंने पहले आपातकाल लागू कर दिया बाद में मंत्रिमंडल और राष्ट्रपति को सूचित किया। उन्होंने कहा कि उस समय देश में बड़ी भयावह स्थिति थी। सेंसरशिप लागू कर दी गई, मीडिया को प्रतिबंधित कर दिया गया और लोगों के सारे मौलिक अधिकार समाप्त कर दिए गए। बहुत से बुद्धिजीवी और उद्योगपति इंदिरा गांधी के हाथों बिक गए। ऐसे कठिन दौर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्वयंसेवकों ने भूमिगत होकर जनजागरण का अभियान चलाया। देश में चुनाव हुए और जनता ने इंदिरा गांधी और संजय गांधी को हराकर स्पष्ट संदेश दिया कि यह देश तानाशाही व्यवस्था को स्वीकार नहीं करेगा।
श्री मोदी ने कहा कि किसी आंदोलन का परिणाम भले ही न निकले, लेकिन हर आंदोलन बदलाव की प्रक्रिया पर एक हथौड़ा मार कर चला जाता है। जब तक इस देश में आंदोलन होते रहेंगे, यह देश कभी नेतृत्वविहीन नहीं होगा। श्री मोदी ने अण्णा हजारे और बाबा रामदेव के आंदोलनों की भी सराहना की।
कार्यक्रम के वक्ता श्री राम बहादुर राय ने कहा कि जब समाज में उलझनें पैदा होती हैं और नेतृत्व निरंकुश होता है, तब आंदोलन का जन्म होता है। आज लोगों में यह भ्रम पैदा हो गया है कि आंदोलन ही मंजिल है। वास्तव में आंदोलन मंजिल नहीं पड़ाव है। दुनिया में जब बड़े आंदोलनों की चर्चा होती है तो भारत के दो आंदोलनों को याद किया जाता है। पहला 1942 का, 'करो या मरो आंदोलन' और दूसरा 'सम्पूर्ण क्रान्ति आन्दोलन'। उन्होंने कहा कि आजादी से पहले लाल-बाल-पाल, गोखले और महात्मा गांधी जैसे व्यक्तियों ने अपने आंदोलनों द्वारा राष्ट्रीयता की जो नई परिभाषा गढ़ी, दुर्भाग्य से वह आज के दौर में बदल गई है। उन्होंने कहा कि आज पूरी दुनिया में डॉलर नीचे जा रहा है, किन्तु हिन्दुस्थान में ऊपर आ रहा है, ऐसा क्यों? और इस पर शोध होना चाहिए कि हिन्दुस्थान में डॉलर की मदद कौन और क्यों कर रहा है। कार्यक्रम के अध्यक्ष श्री राजकुमार भाटिया ने अपने उद्बोदन में कहा कि आपातकाल में लोगों पर बहुत अत्याचार किए गए। ऐसी-ऐसी यातनाएं दी गईं जिन्हें कहा भी नहीं जा सकता। उन्होंने कहा कि आंदोलनों के माध्यम से समाज जागरूक होता है। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में दिल्ली के प्रबुद्ध लोगों ने भाग लिया। प्रतिनिधि
भारत संस्कृत परिषद का अ.भा. संस्कृत प्रशिक्षण शिविर सम्पन्न
राष्ट्र की एकता एवं अखण्डता की रक्षा संस्कृत भाषा से संभव
–अशोक सिंहल, संरक्षक, विहिप
'जाति, प्रान्त, भाषा तथा दलगत राजनीति से ग्रस्त राष्ट्र को केवल संस्कृत भाषा के माध्यम से बचाया जा सकता है। राष्ट्र की एकता एवं अखंडता की रक्षा केवल संस्कृत भाषा से ही संभव है'। उक्त विचार विश्व हिन्दू परिषद के संरक्षक श्री अशोक सिंहल ने अखिल भारतीय संस्कृत प्रशिक्षण शिविर को सम्बोधित करते हुए व्यक्त किए। 09-21 जून तक चले शिविर का आयोजन भारत संस्कृत परिषद द्वारा दिल्ली के पश्चिम विहार स्थित चम्पादेवी सरस्वती विद्या मंदिर में किया गया।
श्री सिंहल ने कहा कि संस्कृत को आधुनिक भाषा के रूप में स्वीकार करना चाहिए। विश्व भारत को संस्कृत के माध्यम से ही जानता है। विश्व हिन्दू परिषद संस्कृत को राष्ट्रभाषा बनाने के लिए शीघ्र ही आन्दोलन करेगी। विहिप का प्रयास है कि संस्कृतसेवी तथा संस्कृतप्रेमी संगठित होकर आन्दोलन करें। भारत संस्कृत परिषद के महामंत्री आचार्य राधाकृष्ण मनोड़ी ने कहा कि संस्कृत विधाओं का व्यापक क्षेत्र है। यदि संस्कृत विधाओं को रोजगारपरक बनाने के लिए सही दिशा में प्रयास किया जाता तो निश्चित ही आज विश्व पटल पर भारत का सर्वोच्च स्थान होता।
शिविर में आचार्य कमलाकान्त (कोलकाता), आचार्य चण्डीचरण मिश्र (कोलकाता), श्री रासबिहारी मिश्र (जयपुर), श्री वासुदेव चमोली (ऋषिकेश), श्री अंजनी मिश्र (लखनऊ) ने प्रशिक्षण दिया। प्रतिनिधि
बाल संस्कार केन्द्र संचालिका प्रशिक्षण शिविर सम्पन्न

बालकों को संस्कारित करने का प्रशिक्षण लिया
गत दिनों उदयपुर में राजस्थान वनवासी कल्याण परिषद् द्वारा संचालित बाल संस्कार केन्द्रों की संचालिकाओं का 5 दिवसीय प्रशिक्षण शिविर सम्पन्न हो गया। शिविर में कुल 289 संचालिकाओं ने भाग लिया।
शिविर के उद्घाटन कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में गुजरात की प्रदेश महिला समन्वय प्रमुख श्रीमती शैलजा अंधारे ने व्यक्तित्व की पंचकोषीय संरचना की चर्चा करते हुए प्रभावशाली व्यक्तित्व निर्माण के लिए किए जाने वाले प्रयत्नों का अनेक दृष्टांतों के माध्यम से उल्लेख किया। कार्यक्रम की मुख्य अतिथि श्रीमती सुनंदा आचार्य थीं।
पांच दिवसीय प्रशिक्षण वर्ग प्रात: योग-प्राणायाम से प्रारंभ होकर सायं आरती एवं कहानी सत्र के साथ सम्पन्न होता था। शिविर में गणित, हिन्दी, चित्रकला, मंत्र, प्रार्थना, गीत, सामान्यज्ञान आदि का अभ्यास हुआ। अखिल भारतीय वनवासी कल्याण आश्रम के उद्देश्य, हमारा व्यक्तित्व, धर्म-रक्षा में महिलाओं का योगदान, ग्राम समिति एवं श्रद्धा जागरण समिति का संचालन तथा स्वयं सहायता समूह हमारी आत्मनिर्भरता का साधन आदि विषयों पर व्याख्यान एवं चर्चाएं हुईं। शिविर के समापन कार्यक्रम के मुख्य वक्ता वनवासी कल्याण आश्रम के क्षेत्रीय संगठन मंत्री श्री सुरेशराव कुलकर्णी ने भारतीय इतिहास में वनवासी महिलाओं की प्रभावशाली भूमिका पर प्रकाश डाला। प्रतिनिधि
शिक्षकों ने सीखीं शिक्षण की नवीन विधियां
गत 25 जून को श्री यशवंत सिंह घुरैया स्मृति शिक्षा समिति, ग्वालियर (म.प्र.) के अन्तर्गत आने वाले विद्यालयों के शिक्षकों का पांच दिवसीय अभ्यास वर्ग सम्पन्न हुआ। शिविर में शिक्षकों ने शिक्षण की नई-नई विधियां सीखीं।
शिविर के समापन समारोह के मुख्य अतिथि संस्कार भारती के राष्ट्रीय महामंत्री श्री कामतानाथ ने कहा कि आचार्य वह है जिसके व्यवहार में आचार्यत्व हो। एक श्रेष्ठ आचार्य को चाहिए कि वह अपने व्यवहार में परोपकार, दया, कर्मशीलता का भाव लेकर कार्य करे तभी वह अपने छात्रों को संस्कारित करने में पूरी तरह सक्षम हो पाएगा। विशिष्ट अतिथि डा. सी.पी. गुप्ता ने कहा कि हमें छात्रों को नई शिक्षण विधियों के द्वारा शिक्षा देनी चाहिए। कार्यक्रम की अध्यक्षता श्री धीरेन्द्र सिंह भदौरिया ने की। इस अवसर पर शिविर में प्राप्त अनुभवों को बताते हुए श्रीमती सीमा तोमर एवं रेनू उप्रेती ने कहा कि हमने शिक्षण की छोटी-छोटी बारीकियां सीखीं तथा शिक्षण की नवीन तकनीकी प्राप्त की। शिविर में कुछ शिक्षकों को सम्मानित भी किया गया। प्रतिनिधि













