दिंनाक: 02 Jun 2012 15:26:11 साहित्यिकी पक्कीसड़कसे कच्चेरास्तेतक रामनारायणमीणा 'हलधर' जेठकीभरीदुपहरीमें नंगेपांव गांवकीलड़कियां बकरियांचराकरलौटतेहुए, कंडेबीनलाईहैं। बूढ़ेबैलोंकीरासथामे नन्हें 'हलधर' घरलौटरहेहैं! तुम्हारेहाथकाअखबार जोमिलजाएउन्हें रंगीनफोटोकाटकर चिपकादेंगे अपनीगारेकीभीतपर सड़कपरकिलोमीटरके पत्थरमेंखुदेकालेअक्षर! सबसेमोटीभैंस सेभीबड़े-बड़े। अक्सरवे कच्चेरास्तेकीधूलमें उकेरतेहैंकुछशब्दसा! आसमानमेंचमकता गोल-मटोलचांद कितनास्वादिष्ट नएगेहूंकी फूलीहुईरोटीजैसा! यहींकहीं भोले-भालेटापरों घनेजंगलों औरनिश्छलझरनोंको बांटेजारहेहैंकुछपर्चे यासुनहरेख्वाब, लोगपढ़नेकेबाद जिन्हें फाड़करफेंकतेनहीं जेबमेंरखलेतेहैं! चाहोतोरोकसकतेहो उसओरजानेसे उन्हें साहसकरो पक्कीसड़कसे नीचेउतरनेका!!