|
संगठन, साहित्य एवं समाज पर विमर्श
प्रतिनिधि
अखिल भारतीय साहित्य परिषद की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की दो दिवसीय बैठक गत 10-11 सितम्बर को लखनऊ में सम्पन्न हुई। इसमें परिषद की साहित्यिक त्रैमासिक पत्रिका के व्गुजराती साहित्य विशेषांकव् का लोकार्पण, वरिष्ठ साहित्यकारों का सम्मान तथा व्साहित्यकार का सामाजिक दायित्वव् विषय पर संगोष्ठी भी हुई।
बैठक में 13 राज्यों से आए कुल 29 प्रतिनिधियों ने दो दिन तक साहित्य और संगठन से संबंधित विषयों पर गहन मन्त्रणा की तथा कई प्रस्ताव भी पारित किये। 10 सितम्बर की प्रात: सरस्वती वन्दना से प्रारम्भ बैठक में देशभर से आए प्रदेश प्रमुखों ने अपने-अपने प्रदेश की कार्यस्थिति की जानकारी दी। भोपाल में सम्पन्न हुए महिला साहित्यकार सम्मेलन की विषद चर्चा जहां श्री विनय राजाराम ने की, वहीं ग्वालियर में आयोजित बाल साहित्यकार सम्मेलन की उपलब्धियों से श्री जगदीश गुप्त ने अवगत कराया। राष्ट्रीय अध्यक्ष डा. बलवन्त जानी ने गत जनवरी मास में भुज में सम्पन्न हुए राष्ट्रीय अधिवेशन की सार्थकता एवं उससे देशभर की इकाइयों को प्राप्त प्रेरणा से अवगत कराया। इनके अतिरिक्त सर्वश्री जयसिंह आर्य (दिल्ली), जगदीश गुप्त (म.प्र.), रवीन्द्र शाहाबादी (बिहार), ऋषि कुमार मिश्र (महाराष्ट्र), प्रभाकर कर्पे (विदर्भ), डा. मथुरेश नन्दन कुलश्रेष्ठ (राजस्थान), डा. रीता सिंह (हिमाचल प्रदेश), डा. नारायण नायक (उड़ीसा), डा. विजय गोपाल (आन्ध्र प्रदेश), विनय दीक्षित (उत्तर प्रदेश), डा. रमेश चन्द्र शर्मा (हरियाणा), अश्विनी गुप्ता (पंजाब) ने भी अपने-अपने प्रदेश की गतिविधियों की विस्तार से चर्चा की।
प्रदेश प्रमुखों द्वारा कार्य की जानकारी दिए जाने के पश्चात् परिषद के संगठन मन्त्री श्री श्रीधर पराड़कर ने सम्बोधित करते हुए कहा कि साम्यवाद धीरे-धीरे समाप्त हो रहा है। हमें इसके खण्डन-मण्डन के चक्कर में न पड़कर रचनात्मक सोच के साथ साहित्य सृजन और संगठन को दृढ़तर बनाना होगा। साथ ही निर्धारित कार्यक्रमों को इकाई स्तर तक आयोजित करने की योजना करनी होगी, तभी सही अर्थों में परिषद के कार्य को विस्तार मिल सकेगा।
बैठक में वरिष्ठ साहित्यकार श्री विनोद चन्द्र पाण्डेय व्विनोदव्, प्रख्यात साहित्यकार डा. सूर्य प्रसाद दीक्षित, लोक साहित्य सर्जक डा. विद्या बिन्दु सिंह, वरिष्ठ रचनाकार श्री विष्णु गुप्त व्विजिगीषुव्, राष्ट्रधर्म के सम्पादक श्री आनन्द मिश्र व्अभयव् तथा स्तम्भ लेखक श्री ह्मदयनारायण दीक्षित को परिषद द्वारा अंगवस्त्र, सम्मान पत्र व स्मृति चिह्न प्रदान कर सम्मानित किया गया।
व्साहित्यकार का सामाजिक दायित्वव् विषय पर हुई परिचर्चा में बोलते हुए परिषद के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष डा. यतीन्द्र तिवारी ने कहा कि साहित्यकार को अपनी रचना में समाज के उत्थान को स्थान देना चाहिए। राष्ट्रीय अध्यक्ष डा. बलवन्त जानी ने भारत की सनातन परम्परा और पाश्चात्य दर्शन का तुलनात्मक विवेचन प्रस्तुत करते हुए साहित्यकारों के सामाजिक दायित्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि कोई भी रचनाकार अपने समाज की स्थिति परिस्थिति की उपेक्षा नहीं कर सकता, क्योंकि उसे वहीं से प्राणवायु प्राप्त होती है। परिचर्चा में श्री रवीन्द्र शुक्ल, डा. रामस्वरूप खरे, श्रीमती मृदुला सिन्हा, डा. मोपिदेवि विजय गोपाल, डा. अशोक कुमार, श्री रमेश चन्द्र शर्मा, डा. कृष्ण चन्द्र गोस्वामी, श्री रवीन्द्र जुगरान, श्री प्रवीण आर्य, डा. विनय राजाराम एवं डा. नागपाल नाविक विशेष रूप से उपस्थित रहे।
बैठक में कुछ महत्वपूर्ण निर्णय भी लिए गए। इनमें प्रमुख हैं- राष्ट्रीय स्तर के भाषाई साहित्यकारों का सम्मान, भारतीय भाषाओं में राम के स्वरूप पर राष्ट्रीय संगोष्ठी, कार्यकर्ताओं को शिक्षित प्रशिक्षित करने के लिए कार्यकर्ता अभ्यास वर्ग तथा राष्ट्रीय एवं प्रान्तीय स्तर पर लेखक सम्मेलन। साथ ही भ्रष्टाचार के विरुद्ध एक प्रस्ताव भी पारित किया गया। इसके अलावा गत वर्ष दिवंगत हुए साहित्यकारों को श्रद्धाजलि भी दी गई। बैठक का संचालन परिषद के महामन्त्री श्री रामनारायण त्रिपाठी ने किया।











