| दिंनाक: 12 Jun 2009 00:00:00 |
|
रकबा घटा – वर्ष 2007-08 में गन्ने का रकबा करीब 25 लाख हेक्टेयर था। वर्ष 2008-09 में यह घटकर 21 लाख 40 हजार हेक्टेयर हो गया। इस साल वह और घटा। अब यह 20 लाख हेक्टेयर हो गया है।सबसे कम दाम उ.प्र. में- महाराष्ट्र में किसानों को 230 रुपए प्रति कुंतल मूल्य दिया जाता है। पंजाब में प्रति कुंतल 210-215 रुपए तय किये गये हैं। हरियाणा ने भी किसानों को 210 रुपए दिया जाना तय किया है। उ.प्र. में 180-185 रुपए तय किये गये हैं।शांति वार्ता को भंग करने की कोशिशकमजोर होते उल्फा की छटपटाहटगुवाहाटी/ विवेक सांगानेरियाउल्फा ने असम के नलबाड़ी जिले में दो धमाके कर आठ लोगों को मौत के घाट उतार दिया। दस मिनट के अंतराल पर हुए इन बम धमाकों के पीछे पुलिस अधिकारी दलील दे रहे हैं कि कमजोर उल्फा अब अपनी बची-खुची ताकत लगाकर शांति वार्ता की कोशिश विफल करना चाह रहा है। उल्लेखनीय है कि हाल ही में उल्फा के विदेश सचिव शशिधर चौधुरी और प्रभारी महासचिव चित्रवन हजारिका की बंगलादेश सीमा पर गिरफ्तारी हुई थी और इस समय ये दोनों असम पुलिस की गिरफ्त में हैं। वहीं उल्फा के सबसे ताकतवर गुट के तमाम शीर्ष नेता संघर्ष विराम के तहत शिविरों में रहकर शांति वार्ता की कोशिशों में जुटे हैं। इसी कारण एक बड़े अंतराल के बाद उल्फा के एक धड़े ने असम में सुनियोजित बम धमाकों को अंजाम दिया है।उल्लेखनीय है कि बंगलादेश में उल्फा के स्वंभू कमांडर परेश बरूआ और अध्यक्ष अरविन्द राजखोवा ही वे शीर्ष नेता हैं जो शांति वार्ता का न केवल विरोध कर रहे हैं बल्कि उसमें अड़चनें भी पैदा कर रहे हैं। हाल ही में हुए बम विस्फोट का समय इसलिए भी महत्वपूर्ण हो जाता है कि बंगलादेश सीमा से गिरफ्तार दो वरिष्ठ नेताओं के बाद अब बंगलादेश में बैठे उल्फा के नेताओं को लगने लगा है कि कहीं वे भी शांति वार्ता का समर्थन न करने लगें।स्मरण रहे कि इस वक्त उल्फा के इन दोनों शीर्ष नेताओं बरूआ और राजखोवा को छोड़कर अधिकांश या तो जेलों में बंद हैं या शांतिवार्ता की पहल के तहत शिविरों में है। पिछले एक वर्ष में असम में बड़ी संख्या में उनके सदस्य पुलिस के हाथों मारे जा चुके हैं। नई भर्ती न होने के कारण भी अब उल्फा अन्य राज्यों में सक्रिय एनडीएफबी, एनएससीएन सरीखे विद्रोही संगठनों से किराए के सदस्य लेकर धमाके कराने पर मजबूर हो रहा है। शीर्ष नेताओं की ढलती उम्र और बंगलादेश सरकार द्वारा भी उनके खिलाफ अभियान से उल्फा अब तक की सबसे कमजोर स्थिति में भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराने की कोशिश कर रहा है। देखना है कि असम की जेलों में बंद और युद्धविराम शिविरों में रह रहे उल्फा के शीर्ष नेताओं के साथ शांतिवार्ता करने से असम में शांति लौटती है या उल्फा फिर से अपने को मजबूत कर बम धमाकों से सरकार और जनता को परेशान करने के पुराने खेल में सफल रहता है?नलबाड़ी में हुए बम विस्फोट पर जिले के पुलिस अधीक्षक जीतमल ने पाञ्चजन्य को बताया कि धमाके में उल्फा की संलिप्तता के प्रमाण मिले हैं। विस्फोट के लिए एक साइकिल का इस्तेमाल किया गया था। इसी मामले में मोहन राजवंशी, इंद्रजीत मेधी और वी दत्ता की तलाश जारी है। इन्हीं तीनों ने धमाके की साजिश रची थी। इसी मुद्दे पर राज्य के पुलिस महानिदेशक शंकर बरूआ ने बताया है कि धमाकों की कड़ियां मिल चुकी हैं। बंगलादेश में मौजूद उल्फा आकाओं के इशारे पर ही धमाके हुए हैं। इस मामले के गुनाहगार जल्दी ही सलाखों के पीछे होंगे। दयदि भारत को विनाश से विकास की ओर और पतन से उत्थान की ओर ले जाना है तो तीन मंत्रों- “चलें गांव की ओर, चलें गाय की ओर और चलें प्रकृति की ओर” को ध्यान में रखना होगा। यह उद्गार रा.स्व.संघ के अखिल भारतीय सेवा प्रमुख श्री सीताराम केदिलाय ने गत 17 नवम्बर को विश्व मंगल गो-ग्राम यात्रा के लिए करनूल (आंध्र प्रदेश) के नगर-निगम मैदान में आयोजित जनसभा को संबोधित करते हुए व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि आज इस बात की आवश्यकता है कि प्रत्येक व्यक्ति गोमाता के प्रति दिल में प्रेम का भाव रखे। गोवंश की उपेक्षा हमारी सबसे बड़ी कमजोरी बनती जा रही है। यदि देश में गोवंश इसी तरह कटता रहा, तो एक दिन भारत भी अन्य कमजोर देशों की पंक्ति में खड़ा होगा। श्री केदिलाय ने कहा कि वर्तमान में भारत की शिक्षा नीति, आर्थिक नीति, कृषि नीति और जीवनशैली सब विदेशी हो चुकी हैं। यह बहुत दुखद है कि आज का समाज अपनी पुरातन संस्कृति को भूलता जा रहा है।जनसभा में उपस्थित विश्व हिन्दू परिषद् के केन्द्रीय मंत्री श्री वाई. राघवलू ने कहा कि जो कार्य भगवान की प्रदक्षिणा करने से पूरे होते हैं, वह सभी कार्य गोमाता की प्रदक्षिणा करने से भी पूरे होते हैं। गाय के महत्व पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि हमारे स्वास्थ्य का रक्षण अगर कोई कर सकता है, तो वह गोमाता है। गाय से मिलने वाले गोबर, गोमूत्र, दूध, दही, और घी का उपयोग करके हम अपना जीवन निरोगी और सुखद बना सकते हैं। जनसभा में स्वामी सत्यस्वरूपानंद गिरि, श्री ज्ञानेश्वर गिरि, श्री अविशानंद भारती, श्री वी. वैंकटरमन आदि प्रतिष्ठित महानुभाव भी उपस्थित थे।गो-ग्राम यात्रा हैदराबाद से निकलकर शादनगर, पालामूर, कोत्तोकाटा होते हुए शाम के समय जब करनूल पहुंची तो स्थानीय नागरिकों द्वारा इसका भव्य स्वागत किया गया। युवाओं में भी यात्रा को लेकर बहुत उत्साह दिखाई दिया।विश्व मंगल गो-ग्राम यात्रा जहां भी पहुंच रही है, वहां इसका ऐसा ही स्वागत किया जा रहा है। गत 20 नवम्बर को यात्रा जब चेन्नई पहुंची तो स्थानीय नागरिक रास्ते में ही इसके स्वागत के लिए खड़े थे। जगह-जगह लोग यात्रा के साथ आए संत-महात्माओं पर पुष्पवर्षा कर रहे थे। यहां आयोजित एक जनसभा को संबोधित करते हुए रा.स्व.संघ के निर्वतमान सरसंघचालक श्री कुप्.सी. सुदर्शन ने कहा कि गाय मरी तो बचता कौन और गाय बची तो मरता कौन? उन्होंने कहा कि मुगलों के शासनकाल में गोहत्या नहीं होती थी। बाबर ने अपने पुत्र हुमायूं को कहा था कि गाय हिन्दू की आस्था का केन्द्र है, इसलिए तुम अपने राज्य में गोहत्या मत होने देना। श्री सुदर्शन ने कहा कि गाय का मतलब भारतीय गाय से है, जरसी से नहीं है। जरसी तो इंग्लैंड की भैंस है। भारतीय गाय के कूबड़ में सूर्यकेतु नाड़ी होती है, जिससे गाय सूर्य से प्राप्त होने वाली ऊर्जा का अवशोषण कर दूध के साथ हमें प्रदान करती है। यही कारण है कि गाय का दूध पीलापन (स्वर्णतत्व) लिए हुए होता है।इसी जनसभा को संबोधित करते हुए जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री सुब्रामण्यम् स्वामी ने कहा कि गोहत्या बंदी कानून बहादुरशाह जफर के समय में भी लागू हुआ था। इलाहबाद मुस्लिम सोसायटी की याचिका पर फैसला देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने गोहत्या बंदी को जारी रखा। उन्होंने कहा कि हम गाय को माता मानते हैं, परन्तु उसकी उपेक्षा भी करते हैं। अमरीका गाय के महत्व को समझकर गोमूत्र का पेटेंट करवा रहा है। गोहत्या बंदी के लिए हिंदू समाज का जागृत होना बहुत जरूरी है। सभा में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय सम्पर्क प्रमुख श्री हस्तीमल , अखिल भारतीय सेवा प्रमुख श्री सीताराम केदिलाय, अखिल भारतीय गोसेवा प्रमुख श्री शंकरलाल, हिंदू मुन्नानी संस्था के संस्थापक श्री रामगोपालन, श्री राजगोपालन और भारतीय किसान संघ के पूर्व अध्यक्ष श्री कुवंर भाई जाधव सहित अनेक प्रतिष्ठित लोग उपस्थित थे।द प्रतिनिधि26