भारत में नदियों का पानी समुद्र में बहकर बेकार चला जाता है। गुजरात सरकार इसे रोकने के लिए कल्पसर परियोजना पर काम कर रही है। यह खंभात की खाड़ी में बनने वाला दुनिया का सबसे बड़ा तटीय मीठे पानी का जलाशय होगा।
क्या है यह परियोजना
कल्पसर परियोजना के तहत खंभात की खाड़ी में करीब 60 से 64 किलोमीटर लंबा बांध या डाइक बनाया जाएगा। इससे समुद्र के एक हिस्से को बंद करके मीठा पानी इकट्ठा किया जाएगा। इसमें साबरमती, माही, धाधर और नर्मदा जैसी नदियों का पानी रोका जाएगा, जो अभी समुद्र में बह जाता है। कुल लगभग 7800 मिलियन क्यूबिक मीटर (MCM) मीठा पानी जमा होगा। इससे 1600 से 2000 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैली एक बड़ी कृत्रिम झील बन जाएगी।
कौन बना रहा है
यह परियोजना गुजरात सरकार चला रही है। इसमें केंद्र सरकार का सहयोग भी है। तकनीकी मदद के लिए नीदरलैंड की कंपनी NEDECO से सलाह ली जा रही है। परियोजना के मौजूदा सचिव के.बी. राबड़िया हैं।
इसे भी पढ़ें: मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ED ने TMC राज्यसभा सांसद नदीमुल हक से जुड़े 8 ठिकानों पर छापा मारा
लागत कितनी होगी
इसकी अनुमानित लागत लगभग 1.25 लाख करोड़ रुपये से 1.33 लाख करोड़ रुपये के बीच बताई जा रही है। इससे सौराष्ट्र के 9 जिलों के 42 तालुकों में करीब 10 लाख हेक्टेयर खेती की जमीन को सिंचाई का पानी मिलेगा। इससे पानी की कमी से होने वाले फसल नुकसान कम होंगे और पैदावार बढ़ेगी।
बांध के ऊपर सड़क और रेल कॉरिडोर भी बनेगा। इससे भावनगर और सूरत के बीच की दूरी काफी कम हो जाएगी। यात्रा आसान होने से परिवहन और ईंधन की लागत घटेगी, जिससे व्यापार और उद्योग को फायदा होगा। परियोजना से लगभग 2470 मेगावाट सौर और पवन ऊर्जा का उत्पादन भी प्रस्तावित है। इसके अलावा पेयजल और उद्योगों के लिए भी पानी की सप्लाई बेहतर होगी।











