| दिंनाक: 04 Jan 2007 00:00:00 |
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यदि सद्गुण क्षय का कारण बने, तो उसको त्याग दो-स्वामी सत्यमित्रानन्द गिरि जीसंस्थापक, भारत माता मंदिर, हरिद्वारपुस्तक परिचय160 पृष्ठों की यह पुस्तक “हिन्दूज अंडर सीज” का हिन्दी अनुवाद है। इसका प्रकाशन डायमंड पाकेट बुक्स (एक्स-30, ओखला इंडस्ट्रियल एरिया, फेज-।।, नई दिल्ली-20) ने किया है। पेपर बैक संस्करण का मूल्य 95 रु. है।गत 21 मार्च को नई दिल्ली में जनता पार्टी के अध्यक्ष डा. सुब्रामणियम स्वामी की सद्य:प्रकाशित पुस्तक “हिन्दू निशाने पर” का लोकार्पण निवर्तमान शंकराचार्य एवं भारत माता मन्दिर, हरिद्वार के संस्थापक स्वामी सत्यमित्रानन्द गिरि जी ने किया। इस अवसर पर स्वामी जी ने हिन्दुओं से आह्वान किया कि वे कुछ दिनों के लिए वैष्णव देवी, अमरनाथ आदि तीर्थस्थलों की यात्रा न करके वनवासी क्षेत्रों की यात्रा करें। यदि ऐसा हुआ तो निश्चित रूप से उन क्षेत्रों में वेटिकन की नहीं वाराणसी की बात सुनी जाएगी।स्वामी जी ने जातिवाद को समाप्त करने पर जोर देते हुए कहा कि हमारे पूर्वजों ने वर्णाश्रम की जो व्याख्या की है उसकी आलोचना करना तो उनका अधिकार नहीं है, किन्तु देश और काल के अनुसार उसमें बदलाव करना भी शास्त्र-सम्मत ही होता है। जो शास्त्र अपने समाज को बचा न सके वह केवल संग्रहालय की शोभा बन जाता है। उन्होंने भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने पर बल दिया और कहा कि भ्रष्टाचारी कितना ही बड़ा क्यों न हो उसका अपमान करना चाहिए और सदाचारी का सम्मान।स्वामी जी ने कहा कि अहिंसा की रक्षा करने के लिए हिंसा की जाए तो वह पाप नहीं होता। आतंकवादी अफजल के लिए उन्होंने कहा कि उसने भारत की सर्वोच्च संस्था (संसद) को नष्ट करने का प्रयास किया था इसलिए उसे सार्वजनिक रूप से फांसी दे देनी चाहिए। यदि उसको फांसी पर चढ़ाने के लिए सरकार को जल्लाद नहीं मिल रहा है तो महामण्डलेश्वर का पद छोड़कर मैं जल्लाद बन सकता हूं।उन्होंने कहा कि देश में यह सब इसलिए हो रहा है क्योंकि हिन्दू समाज सहिष्णु है। यदि हमारा कोई सद्गुण हमारे जीवन का ऐसा पाप बन जाए जिससे हमारा ही क्षय होने लगे तो उस सद्गुण का परित्याग करना ही श्रेयस्कर है। कुछ काल के लिए शौर्य सम्पन्न भारत, शौर्य सम्पन्न हिन्दू यह बात हम सबके बीच जगनी चाहिए। अगर हमारे बीच कोई जयचंद है तो उसका और हिन्दू की बात करके भी हिन्दू की रक्षा न करने वालों का सामाजिक बहिष्कार होना चाहिए।स्वामी सत्यमित्रानन्द जी ने कहा कि डा. स्वामी ने अपने व्याख्यान में कहा है कि कुछ हिन्दू भी ऐसे हैं जो हिन्दू विरोधी काम करते हैं जिन्हें सबक सिखाने की जरूरत है। मैं तो इतना ही कहूंगा कि ऐसे हिन्दू “कुछ” नहीं बल्कि “बहुत सारे” हैं जिन्हें सबक सिखाने की जरूरत है।उन्होंने कहा कि हम समय-समय घरवापसी का कार्यक्रम आयोजित करके बिछुड़े हुए अपने बांधवों को पुन: वापस लाते हैं। कुछ वर्ष पहले राजस्थान के ब्यावर में भी एक ऐसा ही कार्यक्रम हुआ था,जिसमें 1500 मुस्लिमों को वापस हिन्दू धर्म में लाया गया था। केवल घरवापसी कराने से ही काम नहीं चलेगा, बल्कि उनके साथ शाश्वत सम्बंध बनाना होगा, उन्हें ह्मदय से स्वीकारना होगा, नहीं तो दिक्कत पैदा होगी। उन्होंने कहा कि अभी “हिन्दू निशाने पर” किताब छपी है पर हम लोग आपस में ऐसा सम्बंध और व्यवहार रखें कि कभी “हिन्दुओं के निशाने पर” किताब छपे।समारोह में डा. सुब्रामणियम स्वामी ने पुस्तक की पृष्ठभूमि बताते हुए कहा कि कांची के शंकराचार्य स्वामी जयेन्द्र सरस्वती जी को जब झूठे आरोप पर गिरफ्तार किया गया था तभी उन्हें लगा कि हिन्दुओं को चारों तरफ से निशाने पर रखने का षडंत्र चल रहा है। यह षडंत्र किस तरह रचा जा रहा है, यह जानकारी हर हिन्दू को होनी चाहिए इसलिए यह पुस्तक लिखी गई। उन्होंने कहा कि आज हिन्दुस्थान में 85 प्रतिशत हिन्दू हैं, फिर भी वे निशाने पर हैं। उन्होंने हिन्दू समाज को “सर्कस” के उस शेर के समान बताया जिसे चाबुक का भय दिखाकर नाचने के लिए विवश किया जाता है। ऐसा क्यों हो रहा है, यह जानना होगा, विश्लेषण करना होगा और सचेत होना होगा। कश्मीर घाटी से हिन्दुओं को पलायन के लिए विवश किया गया, हिन्दुओं का मतान्तरण किया जा रहा है, पाठ पुस्तकों द्वारा हिन्दू मान-बिन्दुओं और महापुरुषों के बारे में भ्रामक प्रचार किया जा रहा है। यह सब इसलिए हो रहा है कि हिन्दुओं में जवाब देने की प्रवृत्ति खत्म हो रही है। हिन्दू बहुत जल्दी अपने घावों को भूल जाता है, भावुक हो जाता है। यह सब त्यागना होगा और हमलावर आततायी से प्रतिशोध लेना सीखना होगा। पाकिस्तान स्थित आतंकवादी शिविरों को ध्वस्त करने की हिम्मत हमें रखनी होगी। डा. स्वामी ने कहा कि कश्मीर से आतंकवाद को खत्म करने के लिए वहां भूतपूर्व सैनिकों को बसाया जाना चाहिए। उन्होंने हिन्दू वोट बनाने की वकालत करते हुए कहा कि यदि केवल 35 प्रतिशत हिन्दुओं का वोट बैंक बन जाएगा तो देश में एक हिन्दू सरकार का गठन हो सकता है। डा. सुब्रामणियम ने कहा कि एक हिन्दू मोर्चा बने, जिसमें उन लोगों को भी शामिल किया जा सकता है, जो यह मानते हैं कि उनके पूर्वज भारतीय थे। उन्होंने सन्त-महात्माओं की आचार्य सभा बनाने की बात भी कही जो लोकसभा एवं राज्यसभा को ठीक रखे। उन्होंने यह भी कहा कि देश में कुछ ऐसे हिन्दू हैं, जिन्हें सबक सिखाने की जरूरत है। डा. सुब्रामणियम ने कहा कि हिन्दुओं की भावनाओं को ठेस पहुंचाने के लिए राम सेतु को तोड़कर “सेतु समुद्रम् नहर परियोजना” को क्रियान्वित करने का प्रयास हो रहा है, वहीं दूसरी ओर दिल्ली में कुतुब मीनार को बचाने के लिए मेट्रो रेल का मार्ग बदल दिया गया।उन्होंने कहा कि हिन्दुस्थान हिन्दुओं का और उन लोगों का है जो गर्व से स्वीकारते हैं कि उनके पूर्वज हिन्दू थे। जो यह सोचते हैं कि उनके पूर्वज गोरी या गजनी थे तो उन्हें यहां रहने का कोई अधिकार नहीं है। डा. स्वामी ने संस्कृतनिष्ठ हिन्दी के प्रचलन पर जोर देते हुए कहा कि यह हिन्दी तमिल भाषी भी अच्छी तरह समझ लेते हैं, क्योंकि तमिल भाषा में 40 प्रतिशत शब्द संस्कृत के हैं।समारोह को सम्बोधित करते हुए पाञ्चजन्य के सम्पादक श्री तरुण विजय ने कहा कि राजनीति के नौसिखुआ कहते हैं कि अगर गांधी खानदान की सरकार होती तो राम मन्दिर बनने नहीं दिया जाता और बाबरी ढांचा बनाए रखा जाता। उनको इस बात का शोक नहीं कि गांधी नेहरू परिवार की सरकार के होते हुए देश की 1 लाख 25 हजार वर्ग कि.मी. भूमि दुश्मनों के कब्जे में है। ये उसे वापस लेने की बात नहीं करते।उन्होंने कहा कि जिस देश में हिन्दुओं के वोट से चुनी हुई सरकार के राज में, हिन्दुओं के अधिकांश पैसे से चलने वाली सेना, पुलिस और अद्र्धसैनिक बलों के होते हुए 5 लाख हिन्दू अपने घरों से बेघर होने के लिए मजबूर कर दिए जाएं, जिस देश में हिन्दुओं का मतान्तरण करना सेकुलरवाद की पहली निशानी मानी जाती हो, जिस देश में हिन्दुत्व की बात करना एक अपराध माना जाए और फिर भी उस देश में विद्रोह न हो तो उस देश को भगत सिंह की शहादत मनाने का कोई अधिकार नहीं है। नवरात्रों पर दुर्गा की पूजा करने वाला हिन्दू आततायी महिषासुरों के अंत की प्रेरणा और शक्ति का वर मांगे न कि अपने निजी स्वार्थों के लिए पूजा, व्रत रखे। समारोह में वरिष्ठ साहित्यकार श्री नरेन्द्र कुमार एवं डायमंड पाकेट बुक्स के महानिदेशक श्री नरेन्द्र कुमार वर्मा ने भी अपने विचार रखे। धन्यवाद ज्ञापन में अ.भा. साहित्य परिषद्, दिल्ली प्रदेश के अध्यक्ष श्री देवेन्द्र आर्य ने कहा कि अब ऐसी स्थिति आनी चाहिए जिसमें “हिन्दुओं के निशाने पर” पुस्तक भी छपे।इस अवसर पर विश्व हिन्दू परिषद् के वरिष्ठ नेता आचार्य गिरिराज किशोर, रा.स्व.संघ, दिल्ली प्रान्त के संघचालक श्री रमेश प्रकाश, वरिष्ठ प्रचारक श्री सूर्यकृष्ण, अन्तरराष्ट्रीय सहयोग परिषद् के महामंत्री श्री बालेश्वर अग्रवाल, हिन्दी अकादमी, दिल्ली के पूर्व सचिव डा. रामशरण गौड़ सहित अनेक गण्यमान्यजन उपस्थित थे। कार्यक्रम का आयोजन अ.भा. साहित्य परिषद्, दिल्ली प्रदेश एवं डायमंड पाकेट बुक्स ने संयुक्त रूप से किया था। प्रतिनिधि20