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– आनंद शंकर पंडा
केन्द्रीय उपाध्यक्ष, विश्व हिन्दू परिषद
खुशबू नामक दक्षिण की एक अभिनेत्री ने सस्ती प्रसिद्धि प्राप्त करने के लिए बयान दिया कि विवाह के पहले यौनाचार में कोई हर्ज नही है, यदि एड्स की बीमारी से बचने का उपाय कर लिया जाय। इसमें शक नहीं है कि उनके बयान से युवक-युवतियों में विवाह के पहले यौनाचार की लालसा अवश्य बढ़ेगी तथा विवाह के बाद पति-पत्नी के बीच सच्ची श्रद्धा और प्रेम नहीं रहेगा। खुशबू को चाहिए था कि युवकों को एड्स से बचने के उपाय बतातीं और शादी के पहले यौनाचार के दुराचार से दूर रहने को कहतीं, तब उनकी बातों से “खुशबू” आती “बदबू” नहीं।
मेरी पौत्री जिसकी उम्र 22 वर्ष है, अमरीका में 3 साल पढ़कर अभी वापस लौटी है। खुशबू के बयान पर उसने कहा, “इससे भारत के युवक-युवतियों में दुराचार, बलात्कार और एड्स बढ़ने की अधिक संभावना है और लोग युवतियों को देवी, बहन और बेटी मानने के बजाय सिर्फ एक यौनाचार की वस्तु मानने लगेंगे, इससे औरतों की प्रतिष्ठा कम होगी”। खुशबू का बयान पवित्र भारतीय नारी का अपमान है तथा सभी मत-पंथों, कानून व नैतिकता के विरुद्ध है क्योंकि यह मानव समाज के पतन का मार्ग है। दुर्भाग्य से इस अपवित्र कार्य को सेकुलर नेता, फिल्म अभिनेता व तथाकथित बुद्धिजीवी बढ़ाना दे रहे हैं।
यूरोप, अमरीका में यौनाचार संबंधी स्वतंत्रता है। इस कारण 13 साल की लड़की को भी उसके माता-पिता द्वारा एड्स व गर्भवती होने से बचने के उपाय बताने पड़ते हैं। किसी दावत में युवक-युवती केवल उस रात के लिए अपना साथी खोजते रहते हैं। पति-पत्नी तक की अदला-बदली होती है। इंग्लैण्ड के एक समाचार पत्र के अनुसार वहां की युवतियां विवाह के बाद भी बड़े होटलों में जाकर उन्मुक्त यौनाचार के जरिए धन कमाना अनैतिक नहीं मानतीं। यह चलन भारत में भी शुरू हो गया है। 9 दिसम्बर, 2005 के बॉम्बे टाइम्स की एक रपट के अनुसार दिल्ली, मुम्बई जैसे बड़े शहरों में 80 प्रतिशत युवक-युवतियां विवाह पूर्व यौन संबंधों को अनैतिक नहीं मानते। शायद कुछ समय बाद वे वेश्यावृत्ति को भी बुरा नहीं मानेंगे।
खुशबू को यह भी विचार करना चाहिए कि ऐसी स्वतंत्रता से युवक-युवतियों का ध्यान पढ़ाई-लिखाई से हटकर यौनाचार की ओर अधिक लगेगा और उनका शारीरिक, मानसिक व बौद्धिक पतन भी होगा। प्रश्न यह भी है कि क्या वेश्यावृत्ति तथा अपराध करने की स्वतंत्रता दी जा सकती है?
स्वामी विवेकानंद तथा गांधी जी के अनुसार “भारत देश हजारों वर्ष से संयम का देश रहा है। यह अन्य देशों की तरह भोगवादी नहीं है। यह राम और युधिष्ठिर का देश है। यहां विवाह एक अत्यंत पवित्र बंधन है।”
प्राचीन ऋषियों ने भारत में आत्मसंयम और इन्द्रीय निग्रह पर आधारित एक अति उच्च सभ्यता का प्रसार किया था, जिसके कारण ही भारत 4 हजार वर्ष तक दर्शन, विज्ञान, गणित, कला, साहित्य, व्यापार, युद्ध इत्यादि क्षेत्रों में विश्वगुरु बना रहा। और हजार वर्ष की गुलामी में भी यहां अद्भुत महापुरुषों ने जन्म लिया।
अत: आज अपने आत्मसंयम के संस्कारों के कारण ही भारतीय सारे विश्व में यश और धन कमाकर भारत का नाम ऊंचा कर रहे हैं।
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