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-बलवीर सिंह “करुण”शब्दों का पावन गुलदस्ताबोलो किसकी ओर बढ़ाऊंश्रद्धा के सुमनों की मालासे मैं किसका कंठ सजाऊंकदम-कदम पर चोर लुटेरेकैसे उनकी महिमा गाऊंकभी-कभी मेरा मन कहतासौ दो सौ के शीश उड़ाऊंऐसा भी कर सकूं नहीं तोअपना गला काट मर जाऊं।मैं तुम सबसे पूछ रहा हू











