| दिंनाक: 09 Apr 2005 00:00:00 |
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स्टीफन की भाषा42 वें संविधान संशोधन पर संसद में बहस चल रही थी। श्रीमती इंदिरा गांधी की सरकार थी। राज्यसभा में कांग्रेसी सांसद सी.एम.स्टीफन ने कहा- “अब जबकि 42वें संशोधन के जरिए संसद की संविधान संशोधन की शक्ति अदालत के अधिकार क्षेत्र से बाहर हो चुकी है, यह अदालत के ऊपर निर्भर करता है कि वह इसको मानेगी या इसका उल्लंघन करेगी। लेकिन क्या ऐसा करने की उसमें ताकत है भी? अगर उन्होंने ऐसा (उल्लंघन) किया तो वह न्यायपालिका के लिए बहुत बुरा दिन होगा। न्यायाधीशों के व्यवहार आदि की जांच के लिए निर्धारित संसदीय समिति के पास इसको देखने के अपने तरीके और व्यवस्था हैं।” स्टीफन के ये शब्द सर्वोच्च न्यायालय को सीधी धमकी ही थे। उन्होंने वक्तव्य में चुन-चुनकर अदालत को अपमानित करने वाले हल्के शब्दों का प्रयोग किया था।आपातकाल में न्यायालय पर लगामतत्कालीन प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी ने आपातकाल के दौरान कांग्रेस की एक स्वर्ण सिंह कमेटी बनाई थी। कमेटी ने अपनी 10 दिन की बैठक के बाद लम्बी चौड़ी रपट में कहा- “जब हम संविधान में संशोधन करें तो अदालत उसमें दखल न दे।”NEWS