पाकिस्तान में अल्पसंख्यक महिलाओं और बेटियों पर हिंसा के मामले आए दिन आते हैं। कभी उनका अपहरण कर दुष्कर्म और फिर निकाह तो कभी गोली मारकर हत्या। लेकिन, अब यह कुत्सित सोच पूरे महिला समाज पर हावी होती दिख रही है। इसके विरोध में महिलाओं ने आवाज भी मुखर की है।
31 अगस्त को इस्लामाबाद प्रेस क्लब के बाहर एक कैंडल मार्च निकाला गया। कैंडल मार्च वुमन डेमोक्रेटिक फ्रन्ट ने निकाला था। यह इसलिए निकाला गया था क्योंकि उन्होंने पाकिस्तान में महिलाओं के लिए कत्लेआम की स्थिति अर्थात फेमिसाइड घोषित कर दिया है।
गुस्सा क्यों फूटा?
यह गुस्सा दरअसल 20 अगस्त की रात को एक मीडियाकर्मी हिना जावेद की हत्या के बाद फूटा है। 45 वर्षीय हिना रावलपिंडी में अपने घर पर मृत मिली थीं। उनके हत्यारों ने उनके हाथ और पैर बांध दिए थे और गला दबा दिया था। इसे आत्महत्या दिखाने का प्रयास किया गया था, लेकिन ऐसा हो नहीं सका था। हिना के शौहर और उनके घर काम करने वाले एक नौकर को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। ससुर अभी फरार है। मामला अदालत में जाएगा तो यह कहना मुश्किल है कि हिना को न्याय मिलेगा क्योंकि वहां घर की इज्जत का हवाला दिया जाएगा। जैसा कि पाकिस्तान के नाटकों में दिखता है।
पाकिस्तानी ड्रामा की बात करें
पाकिस्तानी ड्रामा में आम घरेलू समस्याओं से लेकर अन्य विषयों पर बात रखी जाती है। एक आधारभूत लाइन सभी में होती है और वह है “लड़की की इज्जत”, “घर की इज्जत!”। इज्जत का क्या होगा? तलाक दे दिया तो इज्जत का क्या होगा! गरीब से लेकर अमीर परिवार तक “लड़की और खानदान की इज्जत” ही सबमें मूल है।
एक ड्रामा इन दिनों आ रहा है, “आप की इज्जत”! इसमें घर की इज्जत माने बीवी अपने शौहर की दूसरी शादी की बात समझ में आते ही और यह जानकर कि वह अब उससे प्रेम नहीं करता, दूसरे आदमी के साथ चली जाती है। अब पुलिस वाले और उसके शौहर को नेता बनाने वाले लोग उससे कहते हैं कि ऐसी बीवी को रखकर क्या होगा? इज्जत तो गई।
उसे नेता बनाने वाला आदमी कह रहा है कि अगर वह अपनी बीवी को मरवा देता है, तो वह आसानी से चुनाव जीत जाएगा क्योंकि अवाम की सहानुभूति उसके साथ हो जाएगी!
जरा कल्पना करें कि यह कोई नहीं कह रहा है कि चौदह साल की शादी और बीवी के होते हुए दूसरी शादी करने से इज्जत जाएगी। मगर जो बीवी गई है और जिसने तलाक मांगा था, उसे मारने की बात की जा रही है।
यह ड्रामा कहीं न कहीं उस असलियत को बताता है जो पाकिस्तानी लोगों के दिमाग में है। यह महिलाओं के साथ होने वाली हिंसा को ही नहीं दिखाता, बल्कि पुलिस और प्रशासन द्वारा उसे जायज ठहराने की खतरनाक प्रवृत्ति को भी दिखाता है।
ऐसे में प्रश्न उठता है कि क्या वास्तव में पाकिस्तान में महिलाओं की स्थिति ऐसी है कि उन पर ऐसे ड्रामा बन रहे हैं? हिना की हत्या के बाद इस्लामाबाद में उठे विरोध के स्वर बहुत कुछ साफ करते हैं।
महिलाओं पर होने वाले अपराधों के आंकड़े डराने वाले हैं
पाकिस्तान के एक गैर सरकारी संगठन साहिल ने मीडिया रिपोर्ट्स के आधार पर महिलाओं के साथ होने वाले अपराधों की एक सूची बनाई है। इसके अनुसार इस साल के पहले छह महीने में 3172 मामले सामने आए हैं। इनमें 644 कत्ल शामिल हैं और 132 मामले इज्जत के नाम पर की गई हत्याओं के हैं। इनमें से आधे से भी ज्यादा मामले ऐसे थे, जो पीड़ितों के अपने घर के भीतर हुए थे।
इज्जत के नाम पर हत्याएं
- 14 अगस्त 2026 को टैक्सिला अर्थात तक्षशिला में 28 साल की शमसू बीवी की हत्या कर दी गई क्योंकि वह सोशल मीडिया पर सक्रिय थी और कंटेन्ट बनाती थी। उसके आर्थिक रूप से स्वतंत्र होने को उसके परिजनों ने मामला बना लिया था।
- अप्रैल 2026 में सिंध में एक युवा मां की हत्या कर दी गई थी। उसे डर था कि उसका शौहर उसे मार डालेगा और अपने अब्बा के भरोसे पर शेल्टर होम से घर लौटी थी।
- एक और महिला हिना जरीफ़ की हत्या केवल इसलिए कर दी गई क्योंकि उसने अपने शौहर से खुला मांग लिया था। उसके शौहर और उसके अब्बा ने ही उसका खून कर दिया था।
- जन्नत खातून नामक महिला ने अपने जेठ और देवरों को पैसे देने से मना कर दिया था, तो उसे जिंदा जला दिया गया था। हालांकि वह किसी तरह से बच गई।
महिलाओं की सुनवाई नहीं
ऐसी एक नहीं कई घटनाएं हैं और महिलाओं की सुनवाई नहीं है। इज्जत के नाम पर मार डालना बहुत सहज है, जैसा कि पाकिस्तानी ड्रामा भी दिखाते हैं। पाकिस्तान में लड़कियों की इन्हीं स्थिति को लेकर वुमन डेमोक्रेटिक फ्रंट ने एक कैन्डल मार्च निकालकर महिलाओं की इन हत्याओं पर कड़े कदम उठाने की मांग की।

















