आम आदमी पार्टी की शैल कंपनी कॉक्रोच जनता पार्टी ने भाजपा शासित राज्यों में स्कूलों की अव्यवस्था को लेकर अभियान चलाया हुआ है परंतु उसके मातृ संगठन ‘आप’ द्वारा शासित पंजाब में सरकारी स्कूल भारी अव्यस्थाओं से अटे पड़े हैं। पंजाब सरकार की शिक्षा क्रान्ति केवल भ्रान्ति साबित हो रही है। यहां तक कि खुद मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के गृह जिले का सरकारी स्कूल भारी अव्यवस्थाओं का शिकार है।
सीएम भगवंत मान के गृह जिले संगरूर का स्कूल इस समय सोशल मीडिया और समाचारों में काफी चर्चा का केंद्र बना हुआ है। हाल ही में विपक्षी नेताओं स्वाति मालीवाल और अमित मालवीय और कई मीडिया ग्राउंड रिपोर्ट्स के जरिए मुख्यमंत्री भगवंत मान के गृह जिले संगरूर के सरकारी स्कूलों की स्थिति को लेकर तीखे सवाल उठाए गए हैं। इंडिया टुडे की एक हालिया ग्राउंड रिपोर्ट के मुताबिक, संगरूर के सुनाम और अन्य इलाकों के कुछ प्राइमरी स्कूलों में भारी भीड़ है। कमरों की कमी के कारण प्री-नर्सरी से लेकर पांचवीं कक्षा तक के बच्चों को एक ही बरामदे या जगह पर साथ बिठाकर पढ़ाने की नौबत देखी गई है।
जर्जर ईमारतें
कुछ गांवों में पुरानी या क्षतिग्रस्त हो चुकी स्कूल इमारतों को गिराए जाने के बाद, बच्चे अस्थायी रूप से गांवों की धर्मशालाओं में पढऩे को मजबूर हैं, जहां बिजली-पानी और पर्याप्त जगह जैसी बुनियादी सुविधाएं पूरी नहीं हैं। विपक्ष द्वारा सोशल मीडिया पर यह दावा भी साझा किया जा रहा है कि संगरूर सहित पंजाब के कई सीनियर सेकेंडरी स्कूलों में प्रिंसिपलों के पद लंबे समय से खाली पड़े हैं, जिससे प्रशासनिक कामकाज प्रभावित हो रहा है।
फाजिल्का में बिना छत का स्कूल
देश के सीमांत जिले फाजिल्का के बस्ती हजूर सिंह गांव का सरकारी प्राथमिक विद्यालय काफी चर्चा में है। मीडिया रिपोट्र्स के मुताबिक 120 बच्चों की संख्या वाले स्कूल में अध्यापक, गैर-अध्यापन स्टाफ, मिड डे मील स्टाफ तो है परंतु कमरे बिना छत के हैं। पांच कमरों में चार कमरों का जमीन का लेबल नीचा है, बरसात के दिनों में यहां पानी भर जाता है। जिला शिक्षा अधिकारी ने मीडिया से बातचीत के दौरान हास्यास्पद बात कही कि मामला उनके नोटिस में नहीं आया है, वे जल्द इसका पता लगाएंगे।
पिछले चार सालों में घटे विद्यार्थी
एक रिपोर्ट के अनुसार, साल 2022 से लेकर 2026 तक सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या में गिरावट आई है। स्कूलों को सुचारू तरीके से चलाने के लिए कम से कम 20 हजार और अध्यापकों की आवश्यकता है।

















