भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने कहा है कि विधानसभा चुनाव से पहले सपा में ऐसा भूचाल आया है कि ‘सत्ता वापसी’ के ढोल पीटने वाले अब ‘जिताऊ चेहरे’ के मोहताज हो गए हैं। जिन सीटों पर सपा तुष्टीकरण, जातीय समीकरण और जोड़-तोड़ के भरोसे जीत का सपना देख रही थी, वहां जनता के बीच पकड़ रखने वाले मजबूत चेहरे तलाशना मुश्किल हो रहा है। सत्ता में वापसी का दावा करने वाली पार्टी की हालत यह है कि सीटें बहुत हैं, लेकिन लड़ने वाले चेहरे कम पड़ रहे हैं।
गुप्त सर्वे रिपोर्ट ने सपा कुनबे की नींद उड़ा दी : पंकज चौधरी
उन्होंने कहा कि सपा के नए-नए चाणक्य बने प्रदेश में बड़े पद पर रहे पूर्व प्रशासनिक अफसर की गुप्त सर्वे रिपोर्ट ने पूरे कुनबे की नींद उड़ा दी है। तुष्टीकरण, जातीय कार्ड और जोड़-तोड़ का खोखला ताना-बाना ज़मीन पर बिखर चुका है। दावे 400 सीटों के, लेकिन ‘साइकिल’ पर बैठाने लायक प्रत्याशी जीरो।
सपा के सामने बचे सिर्फ 2 विकल्प, बोले पंकज चौधरी
प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि लाचारी में अब सपा मुखिया के सामने सिर्फ 2 ही विकल्प बचे हैं: आम कार्यकर्ताओं को दरकिनार कर ‘पारिवारिक साम्राज्य’ के नए चिरागों को मैदान में झोंका जाए या फिर गठबंधन की मजबूरी बताकर कांग्रेस की 200 सीटों वाली ज़िद के आगे घुटने टेक दिए जाएं। सत्ता का सपना देखने वाली पार्टी आज जनता के मुद्दों पर नहीं, बल्कि प्रत्याशियों के अकाल और कुनबा सेट करने के संकट से जूझ रही है। देखना दिलचस्प होगा सपा मुखिया अपनी सियासी ज़मीन बचाते हैं, गठबंधन का वजूद बचाते हैं या फिर हमेशा की तरह सिर्फ़ ‘परिवारवाद’ को आगे बढ़ाते हैं।












