धर्म-संस्कृति

22 अक्टूबर पंचांग: किस समय कौन-सा लगेगा लग्न? जानें ग्रहों की स्थिति और दिशाशूल

ज्योतिष शास्त्र में ग्रहों की स्थिति और लग्न के समय को दैनिक कार्यों, धार्मिक अनुष्ठानों तथा शुभ कार्यों के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।

Published by
Mahak Singh

गुरुवार, 22 अक्टूबर 2026 का दिन धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से महत्वपूर्ण है। वर्ष 2026 का यह 295वां दिन होगा। इस समय शरद ऋतु चल रही है। पंचांग के अनुसार, दिन की शुरुआत सूर्योदय के समय ग्रहों की विशेष स्थिति के साथ होगी। ज्योतिष शास्त्र में ग्रहों की स्थिति और लग्न के समय को दैनिक कार्यों, धार्मिक अनुष्ठानों तथा शुभ कार्यों के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।

सूर्योदय के समय ग्रहों की स्थिति

22 अक्टूबर 2026 को सूर्योदय के समय सूर्य तुला राशि में स्थित रहेंगे। चंद्रमा कुंभ राशि में रहेंगे। मंगल कर्क राशि में और बुध तुला राशि में होंगे। देवगुरु बृहस्पति कर्क राशि में विराजमान रहेंगे, जबकि शुक्र तुला राशि में स्थित होंगे। शनि मीन राशि में रहेंगे। इसके अलावा राहु कुंभ राशि और केतु सिंह राशि में स्थित होंगे। इस प्रकार, इस दिन सूर्य, बुध और शुक्र तुला राशि में, जबकि चंद्रमा और राहु कुंभ राशि में रहेंगे। मंगल और गुरु दोनों कर्क राशि में स्थित होंगे। ज्योतिषीय दृष्टिकोण से इन ग्रहों की स्थिति का विशेष महत्व माना जाता है।

22 अक्टूबर 2026 को लग्नारंभ का समय

इस दिन विभिन्न लग्नों का आरंभ निम्न समय पर होगा।

  • तुला लग्न: सुबह 5:40 बजे से
  • वृश्चिक लग्न: सुबह 7:59 बजे से
  • धनु लग्न: सुबह 10:15 बजे से
  • मकर लग्न: दोपहर 12:20 बजे से
  • कुंभ लग्न: दोपहर 2:06 बजे से
  • मीन लग्न: दोपहर 3:39 बजे से
  • मेष लग्न: शाम 5:10 बजे से
  • वृषभ लग्न: शाम 6:50 बजे से
  • मिथुन लग्न: रात 8:48 बजे से
  • कर्क लग्न: रात 11:02 बजे से
  • सिंह लग्न: रात 1:18 बजे से
  • कन्या लग्न: रात 3:30 बजे से

दिन का विशेष विवरण

22 अक्टूबर 2026 को गुरुवार रहेगा। इस दिन का दिशाशूल दक्षिण दिशा में माना गया है। ऋतु शरद होगी। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, किसी यात्रा या शुभ कार्य की योजना बनाते समय पंचांग के साथ तिथि, नक्षत्र, योग और करण की जानकारी भी देखनी चाहिए।

नोट: यहां दिए गए ग्रहों और लग्नों के समय के अनुसार पंचांग संबंधी जानकारी प्रस्तुत की गई है। शुभ मुहूर्त निर्धारित करने के लिए स्थानीय सूर्योदय और स्थान के अनुसार पंचांग का मिलान करना उचित रहेगा।

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