गत दिनों नई दिल्ली में भारतीय किसान संघ ने अखिल भारतीय महिला किसान कार्यकर्ता सम्मेलन का आयोजन किया। इसमें देशभर के विभिन्न प्रांतों और गांवों से हजारों महिला किसानों ने भाग लिया। कार्यक्रम का शुभारंभ गो-पूजन, भगवान बलराम पूजन और ध्वजारोहण के बाद ‘हम भारत की नारियां वैभव लाएंगी’ के उद्घोष के साथ हुआ।
उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि एवं कोटा कृषि विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. विमला डूंकवाल ने कहा कि भारतीय नारी सृजन और संवर्धन दोनों कार्य करने में सक्षम है। नारी अन्नपूर्णा और दुर्गा का स्वरूप है, जो अधिकारों से पहले अपने कर्तव्यों को प्राथमिकता देती है।
अखिल भारतीय महिला संयोजिका मंजू दीक्षित ने कहा कि भारत में महिला किसानों की पारंपरिक तस्वीर को बदलने की आवश्यकता है। महिलाएं नई तकनीक और ऊर्जा के साथ परिवार और देश के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं।
सत्र को अखिल भारतीय अध्यक्ष के. साईं रेड्डी, उपाध्यक्ष सुशीला विश्नोई और मंत्री वीना सतीश ने भी संबोधित किया। समापन सत्र में अखिल भारतीय महामंत्री मोहिनी मोहन मिश्र ने कहा कि 2047 के विकसित और स्वस्थ भारत का संकल्प ‘गो-कृषि-वाणिज्यम्’ तथा जैविक खेती के बिना संभव नहीं है। उन्होंने सरकार से जहरमुक्त खेती, रोगमुक्त समाज और अमृत आहारयुक्त नीति बनाने का आह्वान किया।
संगठन मंत्री दिनेश कुलकर्णी ने कहा कि स्वावलंबी महिला किसान को प्रतिष्ठा मिलने से गांव, समाज और परिवार का गौरव बढ़ेगा। सम्मेलन में उत्कृष्ट कार्य के लिए महिला किसानों को सम्मानित किया गया। इनमें गो-कृषि-वाणिज्यम् के लिए सुनंदा सायसिंग, जैविक कृषि के लिए दीपाली ओरांव, बीज संरक्षण के लिए कमला बेन, पशुपालन के लिए अंबा कालिंधी और पंपा गराई, रोजगार सृजन के लिए पुष्पा सिंह तथा खाद्य प्रसंस्करण के लिए माया सिन्हा महापात्रा, सुलता चटर्जी और शुक्ला बैरागी शामिल रहीं। सम्मेलन में विभिन्न राज्यों की पारंपरिक वेशभूषा, लोकगीत और सांस्कृतिक नृत्यों ने ‘विविधता में एकता’ का संदेश दिया।

















