धर्म-संस्कृति

आज का श्लोक : मनुष्य में प्रगति की राह में सबसे बड़ी बाधा ‘आलस्य’ है

सुभाषितम् में पढ़ें आज का श्लोक

Published by
Panchjanya

आज का प्रेरणादायक श्लोक परिश्रम के महत्व को बताता है। इसे एक महान सुभाषित के रूप में भी जाना जाता है।

श्लोक:

आलस्यं हि मनुष्याणां शरीरस्थो महान् रिपुः।
नास्त्युद्यम-समो बन्धुः कृत्वा यं नावसीदति॥

भावार्थ :

‘आलस्य’ मनुष्य शरीर में स्थित सबसे बड़ा शत्रु है तथा परिश्रम के जैसा कोई मित्र नहीं है, जिसके करने से कोई दुःखी नहीं रहता।

प्रासंगिकता :

आलस्य का त्याग: यह श्लोक हमें सिखाता है कि हमारा सबसे बड़ा दुश्मन बाहर नहीं, बल्कि हमारे अपने शरीर के भीतर ‘आलस्य’ के रूप में बैठा है। प्रगति की राह में सबसे बड़ी बाधा सुस्ती है।

परिश्रम का महत्व: यह जीवन में पुरुषार्थ और कर्मठता की अनिवार्यता को रेखांकित करता है। जो व्यक्ति मेहनत को अपना मित्र बना लेता है, उसे जीवन में कभी असफलता और निराशा का सामना नहीं करना पड़ता।

विद्यार्थी जीवन के लिए प्रेरणा: छात्रों और युवाओं के लिए यह एक मार्गदर्शक श्लोक है, जो उन्हें समय के सदुपयोग और लगातार प्रयास करने की सीख देता है।

 

Share