बिहार

​पूर्णिया में राष्ट्रभक्ति और अनुशासन का महासंगम: विजयादशमी पर निकला भव्य पथ संचलन

अनुशासित कदमों की ताल, घोष दल (बैंड) की राष्ट्रभक्ति से ओत-प्रोत धुनों और नगरवासियों द्वारा जगह-जगह की गई पुष्प वर्षा ने पूरे पूर्णिया शहर को राष्ट्रभक्ति और सांस्कृतिक चेतना के रंग में सराबोर कर दिया

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Panchjanya

​पूर्णिया। श्री विजयादशमी (दशहरा) के पावन अवसर पर एवं राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में पूर्णिया जिला मुख्यालय में एक भव्य, अनुशासित और आकर्षक पथ संचलन का आयोजन किया गया। सीमांचल के प्रमुख केंद्र पूर्णिया में आयोजित इस विशाल संचलन में जिले भर से आए सैकड़ों की संख्या में स्वयंसेवकों ने पूर्ण गणवेश धारण कर अपनी भागीदारी निभाई। अनुशासित कदमों की ताल, घोष दल (बैंड) की राष्ट्रभक्ति से ओत-प्रोत धुनों और नगरवासियों द्वारा जगह-जगह की गई पुष्प वर्षा ने पूरे पूर्णिया शहर को राष्ट्रभक्ति और सांस्कृतिक चेतना के रंग में सराबोर कर दिया।

​वैदिक मंत्रोच्चार एवं बौद्धिक सत्र

पूर्णिया शहर स्थित कला भवन में प्रातः 8 बजे कार्यक्रम का शुभारंभ वैदिक मंत्रोच्चार के साथ हुआ। मंचासीन सह सरकार्यवाह डॉ. कृष्ण गोपाल जी, विभाग संघचालक ठाकुर रामनारायण सिंह जी एवं जिला संघचालक डॉ एच एन राय जी ने भारत माता के चित्र, आद्य सरसंघचालक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार जी एवं श्री गुरुजी के चित्रों पर माल्यार्पण किया। सैकड़ों स्वयंसेवकों को संबोधित करते हुए . कृष्ण गोपाल जी ने आध्यात्मिक, ऐतिहासिक और सामाजिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह पर्व केवल रावण पर श्रीराम की विजय का प्रतीक नहीं है, बल्कि यह असत्य पर सत्य, अधर्म पर धर्म और आसुरी शक्तियों पर दैवीय शक्तियों की विजय का शाश्वत संदेश देता है।

​1925 में विजयादशमी के ही दिन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना हुई थी। संघ का मुख्य उद्देश्य भारत माता को परम वैभव पर ले जाना। श्री कृष्ण गोपाल जी ने प्रमुख विषयों पर ध्यान केंद्रित करने का संकल्प दिलाया। ​

सामाजिक समरसता: समाज में जाति-पाति, ऊंच-नीच के भेदभाव को पूरी तरह समाप्त कर एक सशक्त और एकजुट समाज का निर्माण करना।

​पर्यावरण संरक्षण: प्रत्येक नागरिक को अपने जीवन में कम से कम एक पौधा लगाने और जल संरक्षण के प्रति जागरूक रहने की आवश्यकता है।

​कुटुंब प्रबोधन: पारिवारिक मूल्यों को सहेजना, नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति व नैतिक मूल्यों से जोड़ना।

स्वदेशी अपनाना: स्थानीय उद्योगों और कारीगरों को बढ़ावा देने के लिए स्वदेशी वस्तुओं का उपयोग बढ़ाना और प्रत्येक नागरिक के मन में राष्ट्र प्रथम की भावना जगाना।

​अनुशासित कदमों से गूंजे पूर्णिया के मुख्य मार्ग​

बौद्धिक कार्यक्रम एवं प्रार्थना के उपरांत विशाल पथ संचलन निकाला गया। संचलन में सबसे आगे संघ का ‘ध्वज वाहक’ दल चल रहा था, जिसके पीछे घोष दल (बैंड) के स्वयंसेवक अपनी पारंपरिक धुनों के साथ आगे बढ़ रहे थे। घोष दल की ‘कदम-कदम बढ़ाए जा’ और विविध राष्ट्रभक्ति धुनों ने पूरे वातावरण को ऊर्जावान बना दिया।

​पथ संचलन शहर के प्रमुख मार्ग आर एन साव चौक, भट्ठा बाजार से होकर टैक्सी स्टैंड। संचलन कला भवन मैदान से निकलकर भट्ठा बाजार, आर.एन. शाह चौक, खीरू चौक,टैक्सी स्टैंड होते हुए पुन: अपने समापन स्थल कला भवन पहुंचा!

​कतारबद्ध होकर एक ही गति और एक ही लय में कदम से कदम मिलाकर चलते स्वयंसेवकों का अनुशासन देखने योग्य था। बच्चे, युवा और बुजुर्ग-हर आयु वर्ग के स्वयंसेवक हाथ में दंड (लाठी) लिए पूर्ण निष्ठा और उत्साह के साथ संचलन में शामिल थे।

​नगरवासियों ने किया भव्य स्वागत, सड़कों पर बिछ गए फूल

​पथ संचलन का स्वागत करने के लिए पूर्णिया शहर के नागरिकों में अभूतपूर्व उत्साह देखा गया। संचलन के निर्धारित मार्ग पर सुबह से ही लोग अपने-अपने घरों की छतों, बालकनी और सड़कों के किनारे एकत्र होने लगे थे। ​जैसे ही पथ संचलन भट्ठा बाजार जैसे प्रमुख व्यापारिक क्षेत्रों से गुजरा, विभिन्न सामाजिक, धार्मिक, सांस्कृतिक और व्यापारिक एवं प्रतिनिधियों तथा स्थानीय निवासियों ने स्वयंसेवकों पर जमकर पुष्प वर्षा की।

​इस कार्यक्रम में कार्यक्रम में मुख्य रूप से क्षेत्र शारीरिक शिक्षण प्रमुख मनोज जी, प्रान्त प्रचारक रविशंकर जी, सह प्रांत प्रचारक प्रवीर जी, प्रांत बौद्धिक प्रमुख संताोष जी, विभाग प्रचारक रौशन जी उपस्थित थे।

कार्यक्रम को संचालन में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पूर्णियां के जिला कार्यवाह दीपक कमार,नगर संघचालक प्रमोद पाण्डेय, मुख्य शिक्षक, राहुल राजदेव, सह विभाग कार्यवाह बिरेंद्र मेहता, अमित शर्मा, सतिश मांडीवाल, अनोज कुमार, भानू् कुशवाहा, शशिशेखर कुमार, निखिल राजा, शिवशंकर दूबे, रमेश कुमार, नित्यम सनातनी सहित सैकडों स्वयसेवक उपस्थित रहे।

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