उत्तराखंड

अंकिता भंडारी केस में फिर गरमाई सियासत, BJP ने कांग्रेस पर लगाया भावनाओं से खेलने का आरोप

बीजेपी प्रवक्ता सुरेश तिवारी ने राहुल गांधी और कांग्रेस नेताओं पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि विपक्ष ने अंकिता के माता-पिता की भावनाओं को राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल करने की कोशिश की।

Published by
उत्तराखंड ब्यूरो

उत्तराखंड के बहुचर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। बीजेपी प्रवक्ता सुरेश तिवारी ने राहुल गांधी और कांग्रेस नेताओं पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि विपक्ष ने अंकिता के माता-पिता की भावनाओं को राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल करने की कोशिश की। तिवारी ने धामी सरकार की कार्रवाई का ब्योरा रखते हुए दावा किया कि त्वरित गिरफ्तारी से लेकर SIT जांच, दोषियों को उम्रकैद की सजा और पीड़ित परिवार को आर्थिक सहायता व रोजगार देने तक सरकार ने कई कदम उठाए। साथ ही उन्होंने तथाकथित VIP के मुद्दे पर कांग्रेस से ठोस सबूत सामने रखने की मांग की। बीजेपी के इन आरोपों के बाद अंकिता मामले में सियासत एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गई है।

  1. हर बार जमानत याचिका खारिज – सरकार की मजबूत पैरवी के कारण अंकिता भंडारी हत्याकांड के सभी दोषियों की जमानत याचिका न्यायालय ने हर बार खारिज की।
  2. 24 घंटे के भीतर कार्रवाई – घटना सामने आने के बाद मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपियों को 24 घंटे के भीतर जेल भेजा गया।
  3. SIT का गठन – मामले की निष्पक्ष और गहन जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) गठित किया गया।
  4. 500 पन्नों की चार्जशीट – जांच के दौरान करीब 500 पन्नों की विस्तृत चार्जशीट तैयार की गई, जिसमें लगभग 100 गवाहों के बयान और महत्वपूर्ण साक्ष्य शामिल किए गए।
  5. मजबूत कानूनी पैरवी – सरकार की ओर से प्रभावी अभियोजन के चलते आरोपियों को मुकदमे के दौरान जमानत नहीं मिल सकी।
  6. तीनों दोषियों को उम्रकैद – मजबूत जांच और प्रभावी पैरवी के परिणामस्वरूप अंकिता हत्याकांड के तीनों दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई।
  7. गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई – आरोपियों के विरुद्ध गैंगस्टर अधिनियम के अंतर्गत भी कार्रवाई की गई।
  8. परिवार की मांग पर तीन बार सरकारी वकील बदले – अंकिता के परिजनों की भावनाओं और मांगों का सम्मान करते हुए तीन बार सरकारी अधिवक्ता बदले गए।
  9. CBI जांच के आदेश – अंकिता के माता-पिता की मांग पर मुख्यमंत्री धामी ने प्रकरण की सीबीआई जांच के आदेश दिए।
  10. ₹25 लाख की आर्थिक सहायता – पीड़ित परिवार को प्रदेश सरकार की ओर से ₹25 लाख की आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई गई, मुख्यमंत्री ने स्वयं उनके गांव जाके cheque सौंपा।
  11. पिता और भाई को रोजगार – दिवंगत अंकिता के पिता और भाई को नौकरी प्रदान कर परिवार को संबल दिया गया।
  12. जांच पर न्यायिक संतुष्टि – जांच प्रक्रिया को लेकर उठे सवालों के बीच न्यायिक स्तर पर भी जांच को संतोषजनक माना गया।
  13. VIP के नाम पर राजनीति का आरोप – कांग्रेस और अन्य संगठनों द्वारा तथाकथित VIP के नाम पर लगाए गए आरोपों को सरकार ने राजनीतिक भ्रम फैलाने का प्रयास बताया। ठोस साक्ष्य जांच एजेंसियों के समक्ष प्रस्तुत करने की बात कही गई।
  14. पहले दिन से स्पष्ट रुख – मुख्यमंत्री धामी ने स्पष्ट किया कि अपराधी कितना भी प्रभावशाली क्यों न हो, उसे कानून के तहत कठोरतम सजा दिलाने के लिए सरकार प्रतिबद्ध है।
  15. न्याय के लिए निरंतर प्रतिबद्धता – त्वरित गिरफ्तारी, SIT जांच, मजबूत चार्जशीट, प्रभावी पैरवी, आर्थिक सहायता, रोजगार और CBI जांच के आदेश तक सरकार ने हर स्तर पर कार्रवाई की।

बेटी अंकिता को न्याय दिलाने के लिए धामी सरकार ने केवल आश्वासन नहीं दिए, बल्कि त्वरित कार्रवाई, मजबूत जांच और प्रभावी पैरवी के माध्यम से दोषियों को उम्रकैद की सजा तक पहुंचाया।

Share