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युद्ध का नया तरीका या तकनीक का दुरुपयोग: फ्रांस में हैकर्स ने हैक किया सुपरमार्केट्स फ्रिज: बर्बाद हुआ खाने का सामान

11-12 अक्टूबर की रात फ्रांस के सैकड़ों सुपरमार्केट के रेफ्रीजरेशन सिस्टम पर साइबर हमला। हैकर्स ने डेनफॉस सॉफ्टवेयर हैक कर फ्रिज-फ्रीजर को फोर्स्ड डिफ्रॉस्ट मोड पर डाल दिया। तापमान 50°C तक पहुंचा, टन भर मांस, आइसक्रीम और फ्रोजन फूड बर्बाद। जानें पूरी घटना, नुकसान और खाद्य सुरक्षा के खतरे।

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सोनाली मिश्रा

हर युग के युद्ध के तरीके अलग होते हैं, भिन्न होते हैं। इस काल के युद्धों में जनता के बीच सरकार को लेकर असंतोष उत्पन्न करना ही सबसे बड़ा तरीका है। यह कुछ भी हो सकता है। कथित शिक्षा, कथित भ्रष्टाचार या फिर और कोई भी मामला? मगर क्या असंतोष बढ़ाने के लिए खाद्यान्नों की कमी भी पैदा की जा सकती है? खाने पीने के सामानों को भी बर्बाद किया जा सकता है?

तो उत्तर हाँ में आएगा और यह फ्रांस में चल रहे कथित छात्र आंदोलन में दिख सकता है। फ्रांस मे जो हुआ है, उसने एक बार फिर से तकनीकी के दुरुपयोग पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है। और यह भी स्पष्ट बताया है कि यदि तकनीक गलत हाथों में पड़ जाए तो क्या हो सकता है।

क्या हुआ फ्रांस में?

11-12 अक्टूबर की रात को फ्रांस में एक अजीब हमला हुआ। यह हमला सड़कों पर नहीं हुआ था, और न ही पैसों पर हुआ, यह हुआ सुपरमार्केट्स के रेफ्रीजरेशन मैनेजमेंट सिस्टम पर! अर्थात जो वहाँ पर केंद्रीयकृत कूलिङ्ग सॉफ्टवेयर था, जिसके साथ कई सुपरमार्केट के फ्रिज जुड़े हुए थे, उनके तापमान को अचानक से बढ़ा दिया गया। हैकर्स ने सिस्टम को हैक करके फ्रिज और फ्रीजर को फोर्स्ड डिफ्रॉस्ट मोड पर डाल दिया। और इसके चलते अचानक से ही फ्रीजर्स का तापमान बढ़कर 50 डिग्री सेल्सियर्स तक पहुँच गया। और ऐसा देश की लगभग 500 दुकानों और सुपरमार्केट्स के साथ हुआ।

अब जरा कल्पना करें कि जो लोग खाने पीने का सामान फ़्रिजों में रखकर यह सोचकर गए होंगे कि कल सामान बिक जाएगा, वह जब वापस आए तो उन्हें स्टोर में जो दृश्य देखने को मिला, उसकी तो उन्होनें कल्पना भी नहीं की होगी! यह तकनीक की विफलता है, जिसने हैकर्स को यह सुविधा दे दी कि उस समय जब दुकानें बंद हैं, उस समय फ्रीजर्स और फ़्रिजों का तापमान इतना बढ़ा दिया जाए कि उसमें रखा हुआ सब कुछ बर्बाद हो जाए।

इससे प्रभावित होने वाले सुपरमार्केट समूह थे ईलेकलर्स, इन्टरमार्श, मोनोप्रिक्स और कोआपरैटिव यू।

इंटरमार्श के 300 स्टोर्स और उसका नेटो ब्रांड सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं, तो वहीं कोआपरैटिव यू के 100 से ज्यादा सुपरमार्केट्स प्रभावित हुए हैं। मोनोप्रिक्स के 490 में से लगभग 5% सुपरमार्केट प्रभावित हुए हैं।

करोड़ों यूरो का नुकसान

इस हमले के चलते करोड़ों यूरो का नुकसान हुआ है। टनों माँस, फ्रोज़न फूड और आइसक्रीम जैसे खाद्य पदार्थ खराब हो गए और जिन्हें कचड़े में फेंकना पड़ा। कई स्थानों पर तापमान इस सीमा तक अधिक हो गया कि आग ही लग गई। इस दृश्य की भी कल्पना नहीं की जा सकती कि पेरिस के बीचों बीच स्थित स्टोर्स में आइसक्रीम सड़कों पर बह रही हो? सड़कों पर टनों भोजन फैल गया हो।

इतना ही नहीं जो समुद्री भोजन या डेयरी उत्पाद होते हैं, यदि वे इतने उच्च तापमान पर चले जाते हैं तो उनमें बैक्टीरिया भी पैदा हो जाते हैं। और यह शहर में महामारी भी फैला सकते हैं। इस कारण प्रभावित स्टोर्स के सभी फ्रेश और फ्रोज़न उत्पादों को तुरंत ही कचड़े में फेंकना पड़ा। और सुपरमार्केट्स के व्यावसायिक फ्रीजर और रेफ्रीजरेटर बहुत ही अधिक क्षमता वाले कंप्रेसर और उपकरणों का प्रयोग करते हैं। और जब हैकर्स ने कंटिन्यूअस डिफ्रॉस्ट मोड को सक्रिय कर दिया, तो वह मशीनें जो कुछ ही समय तक डिफ्रॉस्ट मोड में काम कर सकती थीं, तो उन पर दबाव बढ़ा।

कंप्रेसर बहुत ज्यादा गर्म हो गए और मशीनों के भेटर लगे बिजली के उपकरण पिघलने लगे। जिसके चलते बहुत से स्टोर्स ऐसे थे, जिनमें आग लग गई और देखते ही देखते हर जगह से फायर अलार्म बजने लगे और फायर ब्रिगेड की गाड़ियां सड़कों पर दौड़ने लगीं। इस दृश्य की कल्पना ही दुरूह है कि किसी भी देश में अचानक से हर तरफ आग लगने के कारण फायर ब्रिगेड दौड़ें।

मगर इससे एक और संकट उत्पन्न हुआ और वह था बीमे का संकट! अरबों यूरो का जो नुकसान हुआ है, उसकी भरपाई भी संभव सहज नहीं लगती है क्योंकि ऐसा भी मीडिया में आया कि रिटेलर्स के कानूनी सलाहकारों के अनुसार साइबर हमले के कारण हुए भौतिक खाद्य संकट की भरपाई के लिए बीमा का क्लेम पास कराना सरल नहीं होगा।

डेनमार्क की कंपनी डेनफॉस का सुरक्षा सिस्टम था

जिस सॉफ्टवेयर के माध्यम से फ्रांस की खाद्य व्यवस्था पर हमला हुआ, वह सॉफ्टवेयर  डेनमार्क (Denmark) की मशहूर इंजीनियरिंग और टेक्नोलॉजी कंपनी डैनफॉस (Danfoss) का था। मीडिया की जानकारी के अनुसार यह कंपनी लगभग पूरे विश्व में सुपरमार्केट्स और कोल्ड स्टोरेज के लिए रेफ्रिजरेशन कंट्रोलर सिस्टम (जैसे AK-SM और AK-SC सीरीज) और सॉफ्टवेयर की आपूर्ति करती है।

हालांकि इस अभूतपूर्व और हैरान करने वाले हमले के बाद कंपनी ने पल्ला झाड लिया है। एएफपी को दिए गए उसके आधिकारिक बयान के अनुसार चूंकि प्रभावित हुए अधिकांश रेफ्रीजरेशन पुराने थे और उनका जीवन चक्र पूरा हो चुका था और साथ ही उनका सॉफ्टवेयर अपडेट नहीं हो सकता है, क्योंकि कंपनी ऐसे सॉफ्टवेयर को अपडेट नहीं करती है, इसलिए उनका कोई दोष नहीं है।

कंपनी का कहना है कि एक तो पुराने मॉडल अपडेट नहीं हो सकते थे और कुछ नए मॉडल इसलिए चपेट में आए क्योंकि उन्हें कंपनी द्वारा जारी किए गए नवीनतम अपडेट के माध्यम से अपडेट नहीं किया गया था। इसके साथ ही कंपनी का यह भी कहना था कि इन रेफ्रीजरेशन कंट्रोल पैनल के इंटरफ़ेस को इंटरनेट पर खुला छोड़ दिया गया था, और हैकर्स के लिए फिर इन्हें हैक करना आसान रहा।

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क्या खाद्य सुरक्षा को हथियार बनाया जा रहा?

यह प्रश्न इसलिए उठता है क्योंकि लोग इस विषय में बात कर रहे हैं। इस घटना को खाद्य पदार्थों को हथियार बनाने जैसी घटना कहा जा रहा है। यूरोपीयन फूड कमिश्नर क्रिस्टोफे हैन्सन ने इस घटना की निंदा करते हुए एक्स पर पोस्ट लिखा कि “हर स्तर पर खाद्य सुरक्षा आवश्यक है, क्योंकि खाद्य पदार्थों को हथियार बनाना अब वास्तविकता बन गया है।“

फ्रांस में हुआ यह साइबर हमला बहुत ही खतरनाक है और यह बताता है कि तकनीक का दुरुपयोग अंतत: क्या कर सकता है? सोशल मीडिया पर इसे युद्ध का नया रूप बताया जा रहा है तो वहीं कुछ लोग यह कह रहे हैं कि यह निष्कर्ष अभी जल्दबाजी होगी कि यह हमला दरअसल युद्ध का ही नया रूप है।

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