लखनऊ, 12 अक्टूबर। भारतीय जनता पार्टी पिछड़ा वर्ग मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद अमर पाल मौर्य ने सोमवार को भाजपा के राज्य मुख्यालय पर पत्रकार वार्ता में समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री अखिलेश यादव पर परिवारवाद को लेकर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी सामाजिक न्याय और भागीदारी की राजनीति का दावा करती है, लेकिन समाजवादी पार्टी में राजनीतिक अवसरों और सत्ता का लाभ बार-बार एक ही परिवार तक सीमित रह जाता है।
भारतीय जनता पार्टी पिछड़ा वर्ग मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद अमर पाल मौर्य ने कहा कि उत्तर प्रदेश में वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर पिछड़ा वर्ग मोर्चा की भूमिका, संगठन की रणनीति और केंद्र एवं प्रदेश सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने के विषय पर बैठक में मंथन किया गया है। पिछड़ा वर्ग मोर्चा प्रदेश में संगठन को मजबूत करने और सरकार की योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने के लिए काम करेगा।
उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश की जनता समाजवादी पार्टी को पहले ही जवाब दे चुकी है और जनता ने कई राजनीतिक मिथकों को तोड़ा है। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले वर्षों में सपा की राजनीति में सामाजिक भागीदारी की बात तो की गई, लेकिन राजनीतिक अवसरों के वितरण में परिवार को प्राथमिकता दी गई।
श्री अखिलेश यादव को लिखा खुला पत्र
अमर पाल मौर्य ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान श्री अखिलेश यादव के नाम लिखे खुले पत्र को पढ़कर सुनाया। उन्होंने कहा कि वह यह पत्र अखिलेश यादव को ई-मेल के माध्यम से भेजेंगे और सोशल मीडिया पर भी साझा करेंगे। उन्होंने अखिलेश यादव से पत्र में उठाए गए सवालों का सार्वजनिक रूप से जवाब देने की मांग की।
अमर पाल मौर्य ने अखिलेश यादव के परिवार के विभिन्न सदस्यों का उल्लेख करते हुए कहा कि सपा प्रमुख अखिलेश यादव के पिता स्व. मुलायम सिंह यादव मुख्यमंत्री बने, श्री अखिलेश यादव जी सांसद और बाद में वे मुख्यमंत्री बने। श्रीमती डिंपल यादव सांसद बनीं, भाई शिवपाल सिंह यादव विधायक और मंत्री बनें, चचेरे भाई रामगोपाल यादव राज्यसभा सांसद बने, भतीजे धर्मेन्द्र यादव सांसद बने, भतीजे रणवीर सिंह यादव के बेटे तेज प्रताप यादव सांसद बने, भाई शिव पाल सिंह यादव के बेटे आदित्य यादव सांसद बने, चचेरे भाई राम गोपाल यादव के बेटे अक्षय यादव सांसद बने, भाई राजपाल यादव की पत्नी प्रेमलता यादव जिला पंचायत अध्यक्ष बनी, भाई राजपाल यादव के बेटे अभिषेक यादव (अंशुल यादव) जिला पंचायत अध्यक्ष बने, भतीेजे रणवीर सिंह यादव ब्लॉक प्रमुख बने, भतीजे धर्मेन्द्र यादव ब्लॉक प्रमुख बनें, भतीजे रणवीर सिंह यादव की पत्नी मृदृला यादव ब्लॉक प्रमुख बनी, बहन गीता देवी के बेटे अरविन्द यादव ब्लॉक प्रमुख बने, राजनीतिक गुरू नत्थू सिंह के भतीजे अरविन्द यादव ब्लॉक प्रमुख बने और बाद में एमएलसी बने, भाई शिवपाल सिंह यादव के बेटे आदित्य यादव सहकारी संस्स्थाओं में शीर्ष पदों तक पहुंचे, भाई शिवपाल सिंह यादव की पत्नी सरला यादव जिला सहकारी बैंक की राज्य प्रतिनिधि बनीं, भाई अभय राम सिंह यादव की बेटी शीला यादव कई बार जिला पंचायत सदस्य रही, बहन कमल देवी यादव के पति अंजत सिंह यादव बसरेहर के ब्लॉक प्रमुख बने, सहित कई अन्य को महत्वपूर्ण राजनीतिक जिम्मेदारियां मिलीं। इसी प्रकार परिवार के अन्य सदस्यों को भी सांसद, विधायक, जिला पंचायत अध्यक्ष, ब्लॉक प्रमुख और सहकारी संस्थाओं में महत्वपूर्ण पदों पर अवसर मिले।
समाजवादी पार्टी के राजनीतिक अवसरों के वितरण परिवार केंद्रित
उन्होंने सवाल किया कि जब समाजवादी पार्टी के पास राजनीतिक अवसरों के वितरण का समय आता है, तो सपा प्रमुख की प्राथमिकता समाज के व्यापक प्रतिनिधित्व की बजाय परिवार के सदस्यों पर क्यों केंद्रित दिखाई देती है? उन्होंने आरोप लगाया कि स्थानीय यादव नेतृत्व को आगे बढ़ाने के बजाय परिवार के सदस्यों को प्राथमिकता देने का सिलसिला पार्टी की राजनीति में नजर आता है। पिछड़ा वर्ग मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमर पाल मौर्य ने कहा, “अखिलेश जी, सत्ता आपके परिवार को और संघर्ष कार्यकर्ता का आखिर यह व्यवस्था कब तक चलेगी? सामाजिक न्याय के नाम पर परिवारवाद नहीं चल सकता। सपा के कार्यकर्ता और पूरा प्रदेश इन सवालों का जवाब चाहता है।”
उन्होंने कहा कि यह किसी एक घटना का विषय नहीं, बल्कि समाजवादी पार्टी की राजनीतिक कार्यशैली से जुड़ा सवाल है। विरासत के आधार पर सत्ता हासिल करना और संगठन के कार्यकर्ताओं को अपेक्षित अवसर नहीं देना, सामाजिक न्याय की अवधारणा के अनुरूप नहीं है। उन्होंने अखिलेश यादव से अपनी पार्टी का इतिहास देखने और इन सवालों का जवाब देने की अपील की।

















