दिल्ली पुलिस जंतर मंतर के पास कांग्रेस के प्रदर्शन के दौरान पुलिस कर्मियों पर हमला और रास्ता रोकने के आरोप में शामिल लोगों की पहचान के लिए मोबाइल फोन के कई वीडियो देख रही है। पुलिस सूत्रों ने गुरुवार को यह बात कही।सूत्रों के मुताबिक इनमें वे वीडियो भी शामिल हैं जिनमें महिला पुलिस अधिकारियों और कांस्टेबल्स पर हमला होने का आरोप है। पुलिस इन वीडियो से घटना का क्रम समझ रही है और शामिल लोगों की पहचान कर रही है। साथ ही दूसरे स्रोतों से मिले फुटेज भी जांचे जा रहे हैं, जिसमें पुलिस कर्मियों के साथ धक्का-मुक्की या उन्हें रोकने के आरोप हैं।
FIR दर्ज होने की संभावना
दिल्ली पुलिस भारतीय न्याय संहिता (BNS) के उन प्रावधानों के तहत FIR दर्ज कर सकती है जो सरकारी कर्मचारियों पर हमला, उनके काम में बाधा डालने और संबंधित अन्य धाराओं से जुड़े हैं। यह जांच कांग्रेस नेताओं राहुल गांधी और प्रियंका गांधी तथा उनके समर्थकों द्वारा मंगलवार और बुधवार को चुनावी सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के खिलाफ किए गए प्रदर्शन के बाद हो रही है।
बुधवार को करीब 90 लोगों को, जिनमें राहुल और प्रियंका गांधी भी शामिल थे, दिल्ली पुलिस ने हिरासत में लिया। उन्हें जंतर मंतर की तरफ जाने से रोका गया था। दोनों नेताओं को रात करीब 8 बजे के बाद रिहा कर दिया गया। राहुल गांधी को बाराखंबा पुलिस स्टेशन और प्रियंका गांधी को छत्रसाल स्टेडियम ले जाया गया था।
सोशल मीडिया वीडियो भी जांच के दायरे में
पुलिस सोशल मीडिया पर प्रदर्शन से जुड़े पोस्ट और वीडियो को लेकर भी कार्रवाई कर रही है। दिल्ली पुलिस ने एक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से 11 पोस्ट और वीडियो हटाने या पहुंच सीमित करने को कहा था। पुलिस के मुताबिक इनमें पुलिस की कार्रवाई को गलत तरीके से दिखाया गया था।
नोटिस में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 के तहत लगाए गए प्रतिबंधों का जिक्र था। पुलिस का कहना है कि कुछ प्रदर्शनकारियों ने कर्मियों को धक्का दिया, बैरिकेड हटाए या उन पर कूदकर आगे बढ़ने की कोशिश की। इसके बाद पुलिस ने कुछ लोगों को रोका या हिरासत में लिया। पुलिस के अनुसार कुछ वीडियो में सिर्फ पुलिस की कार्रवाई को गलत बताया गया है, जबकि पहले हुई बाधा और विरोध की बात नहीं दिखाई गई। पुलिस ने इसे अधूरी और भ्रामक तस्वीर बताया है।
चुनावी सूची संशोधन के खिलाफ प्रदर्शन
बुधवार को राहुल और प्रियंका गांधी समेत विपक्षी नेता और कांग्रेस कार्यकर्ता जंतर मंतर की तरफ बढ़े थे, लेकिन पुलिस ने आगे नहीं जाने दिया। इसके बाद उन्होंने शंगरी-ला होटल के पास चौराहे पर धरना दिया। प्रियंका गांधी और कई महिला नेताओं ने संविधान की प्रति लेकर सड़क पर लेट गईं। सुरक्षा बल ने प्रदर्शनकारियों को वहां से हटाया। प्रियंका गांधी ने कहा था कि संसद सदस्यों के साथ इस तरह का व्यवहार हो रहा है जो सिर्फ चुनाव आयुक्तों से मिलना चाहते थे।
ये हिरासत एक दिन बाद हुई, जब दिल्ली पुलिस ने 6 अक्टूबर के प्रदर्शन में आकाशवाणी भवन में जबरन घुसने के आरोप में राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और उनके समर्थकों के खिलाफ FIR दर्ज की थी। शिकायत में कहा गया था कि नेता और सांसद बिना अनुमति अंदर घुसे। दो सुरक्षा गार्ड्स की मेडिको-लीगल जांच भी हुई, जिन्हें चोट लगने का दावा किया गया।
मंगलवार को राहुल और प्रियंका गांधी समेत करीब 260 लोगों को आकाशवाणी भवन में आठ घंटे से ज्यादा धरने के बाद हिरासत में लिया गया था। पुलिस ने कहा था कि इस मार्च के लिए कोई अनुमति नहीं मांगी गई थी और न ही दी गई थी।

















