प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी के पति और व्यवसायी रॉबर्ट वाड्रा के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। ईडी का आरोप है कि वाड्रा ने गुरुग्राम में रिश्वत के तौर पर 3.5 एकड़ जमीन हासिल की। उन्होंने कहा कि इसके लिए उन्होंने 7.5 करोड़ रुपए दिए थे, लेकिन जांच में ये रकम संदिग्ध पाई गई। बाद में उस जमीन को 58 करोड़ रुपए में डीएलएफ कंपनी को बेच दिया गया। ईडी ने इस पूरे मामले को बेनामी और संदिग्ध बताया है।
ईडी की चार्जशीट के मुख्य बिंदु- 16 जुलाई 2025 को ईडी ने इस मामले में ₹37 करोड़ से अधिक की संपत्तियां अटैच कर दीं और 17 जुलाई को विशेष पीएमएलए अदालत में चार्जशीट दाखिल की। चार्जशीट के अनुसार, ओंकारेश्वर प्रॉपर्टीज प्राइवेट लिमिटेड ने यह जमीन स्काईलाइट हॉस्पिटैलिटी प्राइवेट लिमिटेड को दी थी, जो रॉबर्ट वाड्रा से जुड़ी हुई कंपनी है। ईडी का आरोप है कि जमीन का वास्तविक भुगतान कभी नहीं हुआ। आरोप है कि वाड्रा ने यह सौदा इसलिए किया ताकि वे तत्कालीन हरियाणा के मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा से OPPL को हाउसिंग प्रोजेक्ट का लाइसेंस दिलवा सकें। ईडी के मुताबिक, वाड्रा ने अपनी राजनीतिक पहचान और प्रभाव का दुरुपयोग किया, क्योंकि वे उस समय कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के दामाद थे। यह जमीन की रजिस्ट्री 12 फरवरी 2008 को हुई। यह दस्तावेज़ बताते हैं कि ₹7.5 करोड़ का भुगतान चेक नंबर 607251 से किया जाना था, लेकिन वह चेक बैंक में क्लियर नहीं हुआ। लगभग छह महीने बाद, भुगतान एक दूसरे चेक से हुआ, जो स्काईलाइट रियल्टी प्राइवेट लिमिटेड (SLRPL) नाम की कंपनी का था। यह कंपनी भी वाड्रा से जुड़ी हुई है, जबकि रजिस्ट्री में खरीदार SLHPL दिखाया गया था। इसके अलावा, ₹45 लाख की स्टांप ड्यूटी, जो खरीदार को देनी चाहिए थी, वह भी SLHPL ने नहीं दी, बल्कि जमीन बेचने वाली कंपनी OPPL ने दी। ईडी के अनुसार, SLHPL की पूंजी केवल ₹1 लाख थी और SLRPL के खाते में भी ₹7.5 करोड़ की रकम नहीं थी। इन तथ्यों के आधार पर ईडी ने इसे फर्जी और बेनामी सौदा बताया, जिसमें भुगतान सिर्फ कागजों पर दर्शाया गया था।
प्रियंका गांधी पर भी सवाल- ईडी की जांच में यह भी सामने आया है कि रॉबर्ट वाड्रा से जुड़ी कम से कम तीन महंगी संपत्तियां ऐसी हैं, जिनका उल्लेख प्रियंका गांधी ने अपने चुनावी शपथपत्र में नहीं किया। नवंबर 2024 में, जब प्रियंका गांधी ने केरल की वायनाड लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा, तब उन्होंने अपने पति की संपत्तियों की पूरी जानकारी नहीं दी। जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 के तहत, यदि कोई उम्मीदवार जानबूझकर झूठी या अधूरी जानकारी देता है, तो इसे भ्रष्ट आचरण माना जाता है। इसके परिणामस्वरूप उम्मीदवार को चुनाव लड़ने से अयोग्यता, जुर्माना और जेल की सजा हो सकती है। इसी आधार पर केरल हाईकोर्ट ने प्रियंका गांधी को नोटिस जारी किया है।
अदालती कार्यवाही और आगे की सुनवाई- यह मामला अब विशेष पीएमएलए अदालत में चल रहा है। अदालत 28 अगस्त 2025 को तय करेगी कि किन आरोपों पर मुकदमा चलेगा। इस मामले में कुल 11 आरोपी हैं, जिनमें प्रमुख रूप से रॉबर्ट वाड्रा, OPPL के प्रमोटर सत्यनंद यादव और केवल सिंह विरक शामिल हैं। ईडी का कहना है कि यह मामला सिर्फ एक ज़मीन सौदे तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें राजनीतिक प्रभाव, फर्जी भुगतान और बेनामी संपत्ति के कई पहलू जुड़े हैं। अगर अदालत ईडी के आरोपों को स्वीकार करती है, तो वाड्रा और अन्य आरोपियों के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग कानून (PMLA) के तहत सख्त कार्रवाई हो सकती है।

















