
फ्रांस में एक सप्ताह पहले जो स्टूडेंट प्रोटेस्ट शुरू हुआ था, वह थमने का नाम नहीं ले रहा है। अब यह दंगों का रूप ले चुका है और यह दंगे भयानक होते जा रहे हैं। वहाँ पर अभी तक स्कूलों को ही निशाना बनाया गया था, मगर अब वहाँ पर फायर फाइटर्स से लेकर आम लोगों तक को निशाना बनाया जा रहा है। सरकार का कहना है कि अब स्टूडेंट्स के मामलों पर विपक्ष राजनीति और हिंसा कर रहा है।
मीडिया के अनुसार, 29 सितंबर को दक्षिण पश्चिमी फ्रांस के बोर्डों शहर में रु सैंट कैथेरीन में जब ये कथित विद्यार्थी विरोध प्रदर्शन कर रहे थे तो उन्होनें वहाँ पर एक स्थानीय स्कूल को ब्लॉक करके गली में कचरे में आग लगा थी। वहाँ पर मौजूद अग्निशमक अधिकारी और अन्य कर्मी जब वहाँ पर आग बुझाने के लिए गए तो एक कर्मी सुरक्षासूट पहनकर उस आग को बुझाने के लिए आगे बढ़ा। मगर जैसे ही वह उस छोटी आग के पास पहुंचा तो उस आग में पहले से मौजूद एयरोस्प्रे कैन की बोतल गर्मी के कारण फट गई और वह इतनी भयानक रूप से फटी को छोटी सी आग से आग का एक बड़ा गोला उठा और उसने उस कर्मी को घेर लिया।
हालांकि, इस घटना का वीडियो 3 अक्टूबर को सामने आया। इस वीडियो के सामने आने के बाद लोगों के दिलों में गुस्सा है। वह कर्मी अपनी सुरक्षा पोशाक के कारण बच गया और उसे अस्पताल से मेडिकल लीव पर भेज दिया है। मार्सिले में भी एक फायरब्रिगेड के ट्रक को पूरी तरह से जला दिया गया। वहाँ पर जब एक स्कूल के बाहर फायर ब्रिगेड की गाड़ी आग बुझाने के लिए पहुंची तो वहाँ पर पहले से मौजूद सैकड़ों हिंसक प्रदर्शनकारियों ने उस गाड़ी को घेर लिया।
उन्होंने कर्मियों पर हमला किया और उन्हें अपनी जान बचाकर भागना पड़ा। उसके बाद उन्होनें उस ट्रक को भी आग के हवाले कर दिया। अब धीरे-धीरे इन घटनाओं के वीडियोज़ सामने आ रहे हैं।
एक और घटना का वीडियो बहुत तेजी से वायरल हो रहा है। और वह है एक महिला का चेहरा जलाने का। इसमें लिखा है कि एक महिला चेहरा और सिर ढके प्रदर्शनकारियों से बहस कर रही है और अचानक से ही उनमें से एक आदमी आकर उसके चेहरे के सामने एक एयरोसोल का स्प्रे करता है और लाइटर आगे कर देता है। ऐसा करते ही आग की लपटें उस महिला के चेहरे को झुलसा देती हैं।
metro.uk के अनुसार, उस महिला ने मार्सिले में पुलिस रिपोर्ट दर्ज करा दी है। इस कृत्य को करने वाले 15 वर्षीय लड़के को गिरफ्तार कर लिया गया है।
कथित विद्यार्थियों ने मदर मैरी की प्रतिमा के साथ भी अश्लील हरकत की। इन प्रदर्शनों के दौरान एक वीडियो सामने आया, जिसमें दो कथित विद्यार्थी कॉर्सिका द्वीप के पोर्टो वेकीयो शहर में स्थित मदर मैरी की प्रतिमा पर चढ़ गए और उस प्रतिमा के साथ अश्लील हरकत करनी शुरू कर दी। और उसके बाद उसे तोड़ दिया।
इस वीडियो के सामने आने के बाद लोगों का गुस्सा और बढ़ गया। लोगों का कहना है कि यह प्रोटेस्ट किसी भी तरह से कोई भी स्टूडेंट प्रोटेस्ट नहीं हैं। मीडिया के अनुसार इस घटना के बाद वहाँ के कैथोलिक समुदाय के लोगों का गुस्सा बढ़ गया, और लगभग 200 लोगों ने पुलिस स्टेशन के बाहर विरोध प्रदर्शन किया। इसके बाद 21 और 25 वर्ष के दी आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया।
ये वह घटनाएं हैं जिनके वीडियो सामने आए हैं। मगर मीडिया में जो रिपोर्ट्स हैं, उनके अनुसार आपात सुविधाओं की स्थिति भी बिगड़ी हैं। बुजुर्गों के साथ मारपीट की भी घटनाएं सामने आई हैं।
स्कूल के विद्यार्थियों के नाम पर आरंभ हुए इस आंदोलन और विरोध प्रदर्शन में से अब विद्यार्थी लगभग बाहर हो चुके हैं, क्योंकि फ्रांस में सैकड़ों स्कूलों को ही जलाया जा चुका है। लोगों का कहना है कि विद्यार्थी आखिर स्कूल क्यों जलाएंगे?
मीडिया और सोशल मीडिया की मानें तो इन प्रदर्शनकारियों में काफी अधिक संख्या में मुस्लिम समुदाय और आप्रवासी पृष्ठभूमि के लोग सम्मिलित हैं। जो प्रदर्शन कर रहे हैं, उनमें से अधिकांश का यह कहना है कि उनके साथ नस्लवादी व्यवहार होता है और reuters.com के अनुसार 15 वर्षीय अमेलिया ने स्कूल के गेट के बाहर यह बोर्ड पकड़ रखा था कि “हमारा पता हमारे भविष्य का निर्धारण करने वाला नहीं हो सकता है!”
उसका कहना था कि शिक्षा अधिकारी उपशहरों की तरफ ध्यान नहीं दे रहे हैं। वे नस्लवादी हैं। इन दंगों को लेकर जहां सरकार विपक्षी दलों पर निशाना साध रही है, तो वहीं विपक्षी दलों का कहना है कि सरकार ही इसके लिए दोषी है। फ्रांस के प्रधानमंत्री सेबेस्टियन लेकोर्नू ने पहले ही प्रदर्शनकारियों को चेताया था कि वह विद्यार्थियों की उचित मांगों को मानने के लिए तैयार है, मगर वह किसी भी कीमत पर हिंसा को और पुलिस कर्मियों एवं अन्य अधिकारियों पर हिंसक कदमों को बर्दाश्त नहीं करेंगे। उन्होनें एक्स पर 28 सितंबर को ही इस आंदोलन को लेकर पोस्ट लिखा था कि हाई स्कूल्स में आ रही समस्याओं को सुन जाएगा, मगर हिंसा बर्दाश्त नहीं की जाएगी और हिंसा करने वालों को उनकी हरकतों का जबाव देना होगा।
lemonde.fr के अनुसार फ्रांस के शिक्षा मंत्री Edouard Geffray ने इस आंदोलन के लिए पूरी तरह लेफ्ट पार्टियों को जिम्मेदार ठहराया है। उनका कहना है कि इस आंदोलन को पूरी तरह से लेफ्ट ने कब्जा लिया है। मगर फॉक्स न्यूज के अनुसार एलएफआई के नेता Jean-Luc Mélenchon ने इस हिंसा से पल्ला झाड लिया है।
फाउंडेशन फॉर डिफेंस ऑफ डेमोक्रेसीज की वरिष्ठ दूत सिमोन रोडन-बेंजाक्वेन ने फ्रांस मे चल रही इस हिंसा को लेकर कहा है कि यह हिंसा आगामी चुनावों को लेकर हो रही है। फॉक्स न्यूज के अनुसार उन्होनें कहा कि Jean-Luc Mélenchon इस आंदोलन को युवा मतदाताओं को एकजुट करने और उदारवादी वामपंथ को नकारने के एक नए तरीके के रूप में देखते हैं। गहरे राजनीतिक, जियो पोलिटिकल और आर्थिक चुनौतियों के इस दौर में यह फ्रांस के लिए बहुत ही खतरनाक स्थिति है।
फॉक्स न्यूज के अनुसार विरोध प्रदर्शनों की यह आंच अब फ्रांस से निकलकर बेल्जियम तक पहुँच गई है।