विश्लेषण

अशोक सिंहल के सपनों को साकार करने का संकल्प

अयोध्या में विश्व हिंदू परिषद अवध प्रांत द्वारा आयोजित अशोक सिंहल जन्म शताब्दी समारोह में कैबिनेट मंत्री सूर्य प्रताप शाही और विहिप उपाध्यक्ष चंपत राय ने अशोक सिंहल के जीवन, राम मंदिर आंदोलन और राष्ट्रीय भावना को याद किया।

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सुनील राय

अयोध्या। विश्व हिन्दू परिषद अवध प्रांत द्वारा आयोजित अशोक सिंहल जन्म शताब्दी समारोह में वक्ताओं ने श्रद्धेय अशोक सिंहल के जीवन को याद कर उनकी कल्पनाओं को साकर करने की प्रेरणा दी।

राष्ट्रीय भावना से प्रेरित विद्यार्थियों की राजनीति में हो सक्रियता-शाही

अशोक सिंहल जन्म शताब्दी समारोह के मुख्य अतिथि एवं प्रदेश के कैबिनेट मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने कहा कि छात्र जीवन से ही अशोक जी का मार्गदशन मिला। उनको संगठन की तरफ से जो भी दायित्व मिलता था, प्रचारक के रूप में पूर्ण करते। उस समय प्रदेश के सबसे अच्छे प्रचारकों में गिनती होती थी। मुझे उनके सानिध्य में लगभग 28 साल तक विद्यार्थी परिषद में मार्गदर्शन मिला। विद्यार्थी कैसे राष्ट्रीय राजनीति के भीतर राष्ट्रीय भावना से आगे बढ़ सकें, उनका सदैव चिंतन रहता था। राम मंदिर आंदोलन की बुनियाद में विद्यार्थी परिषद ने  सशक्त भूमिका निभाई। यह उनकी प्रेरणा से ही संभव हुआ।

हिंदू समाज को संगठित करके और अपने सनातन परंपरा को मजबूत करने के विषय में ही चिंतन किया करते थे। मैंने देखा है अशोक जी संतो का सम्मान जमीन पर लेट कर और शास्त्रीय विधि से साष्टांग दंडवत कर उनका सम्मान करते थे। आज अयोध्या में भगवान श्रीराम का भव्य मंदिर उनके संकल्प के कारण की संभव हुआ। इसी  तरह राष्ट्रीय विचारधारा की सरकार इस दिशा में आगे काम कर रही है। हमारी परंपरा रही कि हमने हथियारों से लोगों को नहीं जीता है। हमने अपने सिद्धांतों, अपने आचरण, अपने व्यवहार से सभी को जीता है। उसी व्यवहार को समाज में साकार करते हुए विकसित भारत के संकल्प को पूरा करें।

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अशोक जी किसी भी काम में डूब जाया करते थे-चंपत राय

अशोक सिंहल जन्म शताब्दी समारोह को संबोधित करते हुए विश्व हिन्दू परिषद के केंद्रीय उपाध्यक्ष चम्पत राय ने अशोक जी के जीवन को याद करते हुए कहा कि गुरु जी का घर में परिचय था, प्रयागराज आना हुआ। गुरुजी ने उन्हें काम सौंपा। वे किसी भी काम में डूब जाया करते थे। अनायास घर में पिताजी की तबीयत खराब हो गई। मां के कहने पर अशोक जी कहते हैं और भी तो भाई हैं उनको भेज दो, मैं गुरूजी के काम में व्यस्त हूं। सात भाइयों के परिवार में चौथे नंबर पर थे। बीमार पिता के स्थान पर उन्होंने राष्ट्र और संघ कार्य को महत्व दिया। यह सुन कर माता ने चाकू से अपना अंगूठा चीर कर तिलक किया और राष्ट्र कार्य के लिए समर्पित कर दिया।

बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से मेटलर्जी साइंस पढ़ने के दौरान सपना देखा कि हेलमेट पहन कर मेटलर्जी की भट्ठी में ईंधन के स्थान पर भारतीय धर्म ग्रंथो को झोंक रह हूं। ईश्वर ने उनको जिस काम के लिए भेजा था उसकी प्रेरणा विद्यार्थी काल से ही हो गई थी। मठ मंदिर और सामाजिक समरसता उनके प्रमुख विषय बने। कानपुर में संघ प्रचारक रहने के दौरान सूचना मिली कि रेलगाड़ी से गाय भर कर जा रही हैं। वे साथियों के साथ गए और डिब्बों के ताले तोड़ कर गउओं को बाहर निकाला। लगभग 32 साल राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के काम करने के बाद विश्व हिन्दू परिषद में भेजे गए।

हिन्दू समाज में प्रकट करनी होगी शक्ति

इस दौरान जानकारी मिली कि तमिलनाडु के किसी गांव में पूरा हिंदू समाज इस्लाम में चला गया। सब को चिंता हुई। अशोक जी ने कहा कि हिंदू समाज में शक्ति प्रकट करना होगा। इंदिरा जी देश की प्रधानमंत्री थीं। रॉ के इंचार्ज रामनाथ राव थे, उनसे मिलने गए इंडिया गेट पर सभा करने की अनुमति ली। विराट हिंदू समाज के नाम से शक्ति प्रदर्शन कर चुनौतियो को स्वीकारा और उसमें कश्मीर के महाराजा करण सिंह को बुलाया। अशोक जी ने इस संगठन को युवकों का संगठन बनाया। पुरुषार्थ जुझारू युवकों का संगठन। मुरादाबाद में कांग्रेस के एक नेता दाऊ दयाल खन्ना ने 1983 के एक हिंदू सम्मेलन में कहा अरे हिंदुओं अयोध्या, मथुरा, काशी मुक्त कराओं। यहां से अशोक जी ने राम जन्मभूमि आन्दोलन हाथ में लिया। पांच बार के कांग्रेस के विधायक रह चुके, चंद्रभान गुप्ता की कैबिनेट में स्वास्थ्य मंत्री रहे, ईमानदार लोगों ने गिने जाने वाले खन्ना जी ने कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया।

उनकी आध्यात्मिक ऊर्जा शक्ति कुछ इस तरह की थी। 1983 के आसपास विश्व हिन्दू परिषद की स्थापना स्वामी चिन्मयानंद ने किया था। उस समय संगठन का काम सीमित था। उन्होंने संतों की भागीदारी को हजारों गुना बढ़ा दिया। यह विचार आया कि 6 स्थान पर संतों को इकट्ठा किया जाए। नाम दिया गया धर्म संसद।  समाज को एक सूत्र में पिरोने के लिए संतों की सभा में डोमराजा को आमंत्रित किया। संत रविदास की वाणी एकत्र कराई, उसकी पुस्तिका ग्रंथ छपवाया। संत रविदास की वाणी का ग्रंथ लेकर मीराबाई के जन्म स्थान से बनारस तक संत रविदास की वाणी की यात्रा निकाली। बौद्ध व सनातम को एकत्र करने के लिए दलाई लामा और कांची कामकोटि शंकराचार्य को एक स्थान पर बैठाया। वे कहते थे सामाजिक जीवन में क्रोध मत करो, यदि करो तो पानी को चाकू से चीरने जैसा कि क्षण में ही विलुप्त हो जाए।

अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में रामवल्लभाकुंज के अधिकारी राजकुमार दास जी ने अशोक जी के साथ बिताए समय को याद करते हुए सभी को धन्यवाद दिया। क्षेत्रीय संगठन मंत्री गजेंद्र सिंह ने कार्यक्रम की प्रस्तावना रखते हुए कहा कि 2 सितंबर 2026 से सितंबर 2027 तक पूरे वर्ष अलग-अलग कार्यक्रम होंगे। हर प्रांत में संत सम्मेलन, गौ सेवा की दृष्टि से प्रत्येक जिले के एक ब्लॉक को गो कृषि आधारित ब्लॉक बनाना है। अवध प्रांत में चार लाख लोगों को विश्व हिंदू परिषद से जोड़ने का अभियान है। कार्यक्रम को महापौर गिरीशपित त्रिपाठी ने भी संबोधित कर अशोक जी के कार्यों को याद किया। इस अवसर पर उदासीन अखाड़े के पूज्य भरत दास जी, विहिप के पुरुषोत्तम नारायण सिंह, हरिशंकर, सुरेंन्द्र सिंह, धीरेश्वर वर्मा, अभिषेक, संघ चालक डा. विक्रमा प्रसाद पाण्डेय, देवेंद्र जी आदि उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन सह प्रांत मंत्री विवेक सिंह ने किया।

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