मणिपुर की महिला खिलाड़ी जापान में चल रहे एशियाई खेलों में तिरंगा लहरा रही हैं। मीराबाई चानू ने जहां पहली बार एशियाई खेलों में रजत पदक जीतकर देश का सपना पूरा किया, वहीं गुरुवार को मणिपुर की ही रोशीबिना देवी ने एशियाड 2026 की वुशू स्पर्धा में रजत पदक जीत कर इतिहास रच दिया। रोशीबिना देश की पहली वुशू खिलाड़ी है जिन्होंने लगातार तीसरी बार एशियाई खेलों में पदक जीता है। भारत का करीब 500 सदस्यीय दल एशियाई खेलों में भाग लेने गया है।
एशियाड टीम में नहीं मिली थी जगह
देश में हजारों ऐसे खिलाड़ी हैं जिनके नसीब में एशियाड का एक पदक भी नहीं आ पाया। लेकिन, रोशीबिना मात्र 25 वर्ष की उम्र में वुशू के 60 किलोग्राम वर्ग की सांदा स्पर्धा में पदकों की हैट्रिक बनाकर स्टार खिलाड़ी का दर्जा हासिल कर लिया। मणिपुर के बिष्णुपुर जिले में किसान परिवार में जन्मी रोशीबिना का जीवन भी काफी कठिन रहा। एक युवा खिलाड़ी रोशीबिना जब भी अपने घर जाती थीं, उन्हें अपने राज्य में चल रहे जातीय संघर्षों के भय के बीच जीना पड़ता था। लेकिन प्रतिभा की धनी रोशीबिना ने मात्र 17 साल की उम्र में जकार्ता एशियाई खेलों में कांस्य पदक जीत आगाह कर दिया था कि वह भविष्य की एक उभरती हुई खिलाड़ी है। फिर 2023 में ग्वांगझू एशियाई खेलों में रजत पदक जीत तहलका मचा दिया। लेकिन एक छोटी सी उम्र में ही शिखर की ओर अग्रसर खिलाड़ी की टांग खींचने वालों की देश में कमी नहीं है।
उन्हें जून माह में श्रीनगर में आयोजित चयन ट्रायल में हार का सामना करना पड़ा और हताश होकर वह अपने गृहराज्य लौट गयीं। घोर निराशा के बीच रोशीबिना ने वुशू का अभ्यास तक करना छोड़ दिया। फिर, वुशू फेडरेशन में चल रहे तमाम विवादों और उठापटक के बीच रोशीबिना को एशियाड शुरू होने से कोई एक सप्ताह बताया गया कि उन्हें भारतीय टीम में शामिल कर लिया गया है। आनन-फानन में वह मणिपुर से सीधे जापान पहुंच गयीं। किसी प्रशिक्षण शिविर में शामिल हुए बगैर उन्हें एशियाई खेलों के मंच पर उतरना पड़ा, लेकिन जीत की अदम्य इच्छाशक्ति के बल पर वह ऐतिहासिक प्रदर्शन कर पदक जीतने में सफल रहीं।
अब और मजबूत बन गयी हूं – रोशीबिना
जापान में गुरुवार को पदक जीतते ही रोशीबिना की सबसे पहली प्रतिक्रिया थी – “मैं बेहद खुश हूं। लेकिन थोड़ा अफसोस भी है कि देशवासियों और अपने भरोसे पर खरा नहीं उतर पायी। मैं वास्तव में स्वर्ण पदक जीतने के इरादे से जापान आयी थी। लेकिन संशय के बीच अंतिम समय में भारतीय टीम में जुड़ना और अभ्यास के अभाव के कारण मैं अपने लक्ष्य को हासिल नहीं कर पायी। हालांकि ग्वांगझू में जीते रजत पदक का रंग नहीं बदल पायी, लेकिन मैं यहां (जापान) में भी पदक जीतकर ज्यादा खुश हूं। मैं अब और मजबूत खिलाड़ी बन गयी हूं। भविष्य में पदक जीतने के लिए सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने की हरसंभव कोशिश करूंगी।” रोशीबिना की यह त्वरित प्रतिक्रिया इशारा करती है कि भारतीय वुशू जगत में सबकुछ सही नहीं चल रहा है। हमें अपने युवा प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को उभारने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए, न कि छोटी उम्र में ही उनके करिअर के साथ खेलना चाहिए।











