भुवनेश्वर : ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने बुधवार को संबलपुर में देश के 51वें डॉप्लर मौसम रडार (DWR) का उद्घाटन किया। ‘मेक इन इंडिया’ पहल के तहत स्थापित यह अत्याधुनिक रडार पश्चिमी ओडिशा में मौसम पूर्वानुमान और आपदा प्रबंधन व्यवस्था को और मजबूत करेगा। गंगाधर मेहर विश्वविद्यालय में आयोजित समारोह के दौरान मुख्यमंत्री ने संबलपुर जिले में करीब 960 करोड़ रुपये की लागत वाली 50 प्रमुख विकास परियोजनाओं का भी उद्घाटन एवं शिलान्यास किया।
केंद्रीय पृथ्वी विज्ञान मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने वर्चुअल माध्यम से समारोह को संबोधित करते हुए संबलपुर में डॉप्लर मौसम रडार की स्थापना को भारत की मौसम पूर्वानुमान प्रणाली की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि और महत्वपूर्ण पड़ाव बताया। उन्होंने कहा कि देश समय पर और सटीक मौसम संबंधी जानकारी उपलब्ध कराने की अपनी क्षमता को लगातार मजबूत कर रहा है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में वर्ष 2014 से भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) और अंतरिक्ष विज्ञान को विशेष प्राथमिकता मिली है। भारत अब अपनी मौसम पूर्वानुमान क्षमता को मजबूत करने के साथ-साथ पड़ोसी देशों को भी मौसम संबंधी जानकारी और सहायता उपलब्ध करा रहा है।
केंद्रीय मंत्री ने घोषणा की कि आने वाले दिनों में देश के मौसम निगरानी नेटवर्क में 40 और डॉप्लर मौसम रडार जोड़े जाएंगे। इससे विभिन्न क्षेत्रों में मौसम की निगरानी और पूर्वानुमान क्षमता मजबूत होगी तथा अधिक सटीक मौसम संबंधी जानकारी उपलब्ध कराना संभव होगा।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने संबलपुर रडार को देश की मौसम पूर्वानुमान प्रणाली को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताते हुए कहा कि ओडिशा में मौसम निगरानी के बुनियादी ढांचे का विस्तार राज्य को जलवायु संबंधी चुनौतियों से निपटने में अधिक सक्षम बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
ओडिशा में तीसरा डॉप्लर मौसम रडार
संबलपुर में स्थापित रडार देश का 51वां और ओडिशा में पारादीप तथा गोपालपुर के बाद तीसरा डॉप्लर मौसम रडार है।‘मेक इन इंडिया’ के तहत निर्मित यह अत्याधुनिक रडार पश्चिमी ओडिशा में मौसम पूर्वानुमान और आपदा प्रबंधन को मजबूत करेगा। इससे संबलपुर, बरगढ़, झारसुगुड़ा, सुंदरगढ़, देवगढ़, सोनपुर, बलांगीर, बौध, नुआपड़ा, अंगुल, कालाहांडी, क्योंझर और ढेंकानाल सहित 13 जिलों के लिए विस्तृत मौसम संबंधी जानकारी उपलब्ध होगी।
रडार की निगरानी सीमा पड़ोसी छत्तीसगढ़ और झारखंड के कुछ क्षेत्रों तक भी होगी, जिससे ओडिशा के बाहर के सीमावर्ती क्षेत्रों में भी मौसम की निगरानी को मजबूती मिलेगी।
250 किलोमीटर के दायरे में सटीक मौसम संबंधी आंकड़े
यह रडार चौबीसों घंटे काम करेगा और करीब 250 किलोमीटर के दायरे में सटीक मौसम संबंधी आंकड़े उपलब्ध कराएगा, जबकि लगभग 450 किलोमीटर तक मौसम की गतिविधियों पर निगरानी रख सकेगा।
इसके माध्यम से आंधी-तूफान, बिजली गिरने, भारी बारिश और ओलावृष्टि जैसी मौसमी घटनाओं की निगरानी कर समय रहते चेतावनी जारी करने में मदद मिलेगी। इससे विशेष रूप से मानसून और मानसून-पूर्व मौसम में अत्यधिक मौसमी घटनाओं से निपटने की तैयारी और प्रतिक्रिया व्यवस्था बेहतर होगी।
रडार हर 10 मिनट में 150 मीटर के रिजॉल्यूशन पर वर्षा का अनुमान उपलब्ध कराएगा। उच्च आवृत्ति वाले ये आंकड़े कृषि, जल संसाधन प्रबंधन और आपदा प्रतिक्रिया के क्षेत्र में मौसम आधारित निर्णय लेने में मदद करेंगे।
कृषि और हीराकुद जलाशय प्रबंधन को मिलेगा लाभ
पश्चिमी ओडिशा के किसान, विशेषकर राज्य के प्रमुख कृषि क्षेत्रों में शामिल बरगढ़ के किसान, मानसून-पूर्व आंधी, बिजली गिरने और ओलावृष्टि जैसी घटनाओं की अग्रिम जानकारी से लाभान्वित होंगे।
यह प्रणाली महानदी बेसिन के बड़े हिस्से को भी कवर करेगी। इससे वर्षा के अनुमान और आंकड़ों के आधार पर हीराकुद जलाशय में पानी के प्रवाह की निगरानी मजबूत होगी तथा जल संसाधन और सिंचाई प्रबंधन को अधिक प्रभावी बनाने में मदद मिलेगी।
रडार से प्राप्त मौसम संबंधी जानकारी का उपयोग कृषि और आपदा प्रबंधन के अलावा बिजली, उद्योग, परिवहन तथा विद्युत ग्रिड के संचालन और तैयारियों में भी किया जा सकेगा।
ओडिशा में और डॉप्लर रडार स्थापित किए जाएंगे मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने कहा कि संबलपुर में स्थापित डॉप्लर मौसम रडार जीवन और संपत्ति की सुरक्षा के साथ-साथ कृषि और सिंचाई के लिए महत्वपूर्ण साबित होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि संबलपुर में स्थापित यह सुविधा क्षेत्रीय दृष्टि से विशेष महत्व रखती है और इसके माध्यम से ओडिशा के एक बड़े हिस्से को उन्नत मौसम पूर्वानुमान नेटवर्क से जोड़ा जा सकेगा।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार बालेश्वर, भुवनेश्वर और पुरी में भी अतिरिक्त डॉप्लर मौसम रडार स्थापित करने की दिशा में काम कर रही है। इससे पूरे ओडिशा में मौसम निगरानी का दायरा बढ़ेगा और प्रौद्योगिकी आधारित सक्रिय आपदा प्रबंधन प्रणाली को और मजबूत किया जा सकेगा।
शून्य जनहानि की नीति पर जोर
राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री सुरेश पुजारी ने कहा कि पश्चिमी ओडिशा में डॉप्लर मौसम रडार की स्थापना क्षेत्र के लोगों की लंबे समय से चली आ रही मांग को पूरा करती है। उन्होंने कहा कि ओडिशा सरकार ने आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में ‘शून्य जनहानि’ (Zero Casualty) की नीति अपनाई है, जिसमें पूर्व तैयारी, अग्रिम चेतावनी और समयबद्ध प्रतिक्रिया पर विशेष जोर दिया जा रहा है।
पुजारी ने कहा कि संबलपुर में स्थापित रडार से पश्चिमी ओडिशा और आसपास के 13 जिलों के किसानों, आम लोगों तथा आपदा प्रतिक्रिया एजेंसियों को बिजली गिरने, भारी बारिश और तूफान जैसी घटनाओं की काफी पहले सटीक जानकारी मिल सकेगी। उन्होंने कहा कि समय पर और सटीक मौसम संबंधी जानकारी मिलने से प्रशासन तथा स्थानीय समुदाय एहतियाती कदम उठा सकेंगे और आपदा से निपटने की तैयारी को और प्रभावी बनाया जा सकेगा।
संबलपुर में 960 करोड़ रुपये की विकास परियोजनाएं
डॉप्लर मौसम रडार के उद्घाटन के साथ मुख्यमंत्री के संबलपुर दौरे के दौरान व्यापक विकास कार्यक्रम भी आयोजित किया गया। मुख्यमंत्री ने करीब 960 करोड़ रुपये की लागत वाली 50 विकास परियोजनाओं का उद्घाटन एवं शिलान्यास किया। इनमें 133.47 करोड़ रुपये की 15 पूर्ण परियोजनाओं का उद्घाटन किया गया, जबकि 825.83 करोड़ रुपये की 35 नई परियोजनाओं का शिलान्यास किया गया।
इन परियोजनाओं में स्वास्थ्य, ग्रामीण विकास, खेल, सड़क एवं भवन तथा जल संसाधन से जुड़ी योजनाएं शामिल हैं। इनमें कुचिंडा के लिए 60.50 करोड़ रुपये की ग्रामीण विकास परियोजना, 74.72 करोड़ रुपये की खेल अवसंरचना तथा 585 करोड़ रुपये की सड़क एवं भवन परियोजनाएं शामिल हैं।
जल संसाधन क्षेत्र में 220.56 करोड़ रुपये की मेगा लिफ्ट सिंचाई परियोजना और 8.88 करोड़ रुपये की लघु सिंचाई परियोजनाएं शामिल हैं।
जनवरी से अब तक 1,910 करोड़ रुपये के विकास कार्य
मुख्यमंत्री ने कहा कि जनवरी से सितंबर 2026 के बीच संबलपुर में करीब 1,910 करोड़ रुपये की विकास परियोजनाएं शुरू की गई हैं। उन्होंने 1,521 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाले चार लेन बाईपास, 1,700 करोड़ रुपये की लागत से वीर सुरेंद्र साय आयुर्विज्ञान एवं अनुसंधान संस्थान (VIMSAR) के विस्तार, 100 करोड़ रुपये के एक्वा पार्क और 100 करोड़ रुपये की समलेश्वरी मंदिर विकास परियोजना के दूसरे चरण का उल्लेख किया।
उन्होंने कहा कि ऐंठापाली बस टर्मिनल के लिए 238.14 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जिसमें 10 वर्षों के रखरखाव की व्यवस्था भी शामिल है। अमृत 2.0 के तहत संबलपुर में 450 करोड़ रुपये की ‘ड्रिंक फ्रॉम टैप’ परियोजना लागू की जा रही है। इसके तहत 41 वार्डों में 10 करोड़ लीटर प्रतिदिन शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने की योजना है। मुख्यमंत्री ने बताया कि बुर्ला और हीराकुद रिंग रोड तथा रेमेड-हीराकुद चार लेन सड़क के विस्तार का कार्य भी जारी है।
पश्चिमी ओडिशा में बड़े औद्योगिक निवेश
मुख्यमंत्री ने पश्चिमी ओडिशा की औद्योगिक क्षमता का उल्लेख करते हुए कहा कि क्षेत्र में बड़े निवेश की परियोजनाएं लागू की जा रही हैं। उन्होंने बताया कि लापंगा में हिंडाल्को के विस्तार में करीब 40,000 करोड़ रुपये का निवेश प्रस्तावित है, जबकि रेंगाली में JSW-JFE की 32,000 करोड़ रुपये की इस्पात परियोजना पर काम किया जा रहा है।
उन्होंने कृषि भवन और छात्राओं के छात्रावासों के निर्माण, संबलपुर फुटबॉल अकादमी के आधुनिकीकरण तथा हीराकुद बांध मास्टर प्लान की तैयारी का भी उल्लेख किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने वर्ष 2036 तक ओडिशा को 500 अरब डॉलर और वर्ष 2047 तक 1.5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने का दीर्घकालिक लक्ष्य निर्धारित किया है।
महिला सशक्तीकरण और बुनियादी ढांचे पर जोर
मुख्यमंत्री ने सुभद्रा, मुख्यमंत्री कन्या विवाह और कन्या सुमंगल जैसी महिला केंद्रित योजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्य के बजट का 40 प्रतिशत हिस्सा महिलाओं के लिए खर्च किया जा रहा है।
ओडिशा में बड़े बुनियादी ढांचा निवेश का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि रेलवे क्षेत्र में 90,000 करोड़ रुपये, सड़कों में 40,000 करोड़ रुपये, बंदरगाहों में 25,000 करोड़ रुपये और जहाज निर्माण में 25,000 करोड़ रुपये की परियोजनाएं राज्य में आ रही हैं।
मुख्यमंत्री ने लोकप्रिय संबलपुरी गीत ‘रंगबती’ से जुड़े कलाकारों और रचनाकारों को मिले सम्मान का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि गीत से जुड़े तीन व्यक्तित्वों को पद्मश्री सम्मान मिलना ओडिशा की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को मिली राष्ट्रीय पहचान को दर्शाता है।
संबलपुर की सांस्कृतिक पहचान का उल्लेख
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन की शुरुआत मां समलेश्वरी, वीर सुरेंद्र साय, शहीद माधो सिंह, छबील साय, संतकवि भीम भोई और स्वभाव कवि गंगाधर मेहर को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए की। उन्होंने संबलपुर को पश्चिमी ओडिशा की कला, संस्कृति और परंपराओं का प्रतीक बताते हुए कहा कि संबलपुरी भाषा, संस्कृति, गीत और हथकरघा इस क्षेत्र की पहचान और गौरव हैं।
उन्होंने कहा कि ‘समृद्ध ओडिशा 2036’ के लक्ष्य की दिशा में राज्य की विकास यात्रा में संबलपुर महत्वपूर्ण केंद्र बना रहेगा। मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 76वें जन्मदिन और विश्वकर्मा पूजा के अवसर पर आयोजित महीने भर चलने वाले ‘सेवा संकल्प’, ‘आशीर्वादरा दीप’ तथा ‘एक पेड़ मां के नाम’ कार्यक्रमों में लोगों से भाग लेने की अपील भी की।
समारोह में वरिष्ठ अधिकारी मौजूद
कार्यक्रम में राज्यसभा सांसद मनमोहन सामल, विधायक जयनारायण मिश्रा, भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के महानिदेशक डॉ. मृत्युंजय महापात्र, विशेष राहत आयुक्त राजेश प्रभाकर पाटिल, उत्तरी रेंज के डीआईजी चरण सिंह मीणा, संबलपुर के जिलाधिकारी सिद्धेश्वर बलिराम बोंदार सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी और बड़ी संख्या में लोग उपस्थित रहे।

















