महाराष्ट्र सरकार नागपुर में होने वाले शीतकालीन विधानसभा सत्र में समान नागरिक संहिता (UCC) विधेयक पेश करने की तैयारी में है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सोमवार (14 सितंबर) को मीडियाकर्मियों से यह जानकारी साझा की। उन्होंने स्पष्ट किया है कि राज्य में समान नागरिक संहिता के क्रियान्वयन के लिए सरकार पूरी तरह गंभीर है और इसके लिए पहले ही एक विशेष समिति का गठन किया जा चुका है, जो अपने स्तर पर पूरी तटस्थता के साथ निरंतर कार्य कर रही है। समिति की रिपोर्ट आने के तुरंत बाद इसे लागू कर दिया जाएगा।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह बयान के एक दिन बाद सीएम फडणवीस ने यह जानकारी साझा की है। शाह ने कहा था कि 21 राज्यों में भाजपा के नेतृत्व वाली एनडीए सरकारें वर्ष 2029 से पहले यूसीसी कानून लागू करेंगी। फडणवीस ने पत्रकारों से कहा, ‘देखिए, समान नागरिक संहिता तैयार करने के लिए महाराष्ट्र सरकार ने पहले ही एक समिति का गठन कर लिया है। समिति उस पर काम कर रही है और मुझे विश्वास है कि समिति की रिपोर्ट आने के बाद हम इसे जल्द ही लागू कर देंगे।’
यूसीसी पर सात सदस्यीय समिति का गठन
इस वर्ष जुलाई में महाराष्ट्र सरकार ने यूसीसी पर सात सदस्यीय समिति का गठन किया था। समिति को अपनी सिफारिशें प्रस्तुत करने के लिए छह महीने का समय दिया गया था। सुप्रीम कोर्ट की सेवानिवृत्त न्यायाधीश न्यायमूर्ति रंजना देसाई की अध्यक्षता वाला सात सदस्यीय पैनल वर्तमान में कानून के ढांचे पर काम कर रहा है। समिति के सदस्यों में न्यायमूर्ति देसाई के अलावा बॉम्बे उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश आरसी चव्हाण और एसजी मेहरे, पूर्व मुख्य सचिव डीके जैन, पूर्व अधिवक्ता जनरल वीरेंद्र सराफ, संवैधानिक विशेषज्ञ रमेश पतंगे और शिक्षाविद सुवर्णा रावल शामिल हैं।
क्या काम करेगी समिति?
मुख्यमंत्री के अनुसार, सात सदस्यों की विशेष समिति समान नागरिक संहिता से जुड़े सभी कानूनी, सामाजिक और प्रशासनिक पहलुओं का गहराई से अध्ययन करेगी। फिर अगले छह महीनों के भीतर अपनी सिफारिशों सहित रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपेगी। रिपोर्ट के आधार पर सरकार समान नागरिक संहिता के ड्राफ्ट को अंतिम रूप देगी।
क्या है यूसीसी?
समान नागरिक संहिता यानी यूसीसी का उद्देश्य सभी नागरिकों को उनके धर्मों, समुदायों के लिए एक समान, एक बराबर कानून बनाना है। महाराष्ट्र में यूसीसी लागू होने के बाद राज्य में मजहब और धर्म के आधार पर मौजूदा अलग-अलग कानून एक तरह से निष्प्रभावी हो जाएंगे।

















