
गोरखपुर (उत्तर प्रदेश)। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के शताब्दी वर्ष महोत्सव की श्रृंखला में महानगर उत्तरी द्वारा सरस्वती शिशु मंदिर वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, सुभाषचंद्र बोस नगर (सूर्यकुंड) के प्रांगण में एक भव्य युवा सम्मेलन का आयोजन किया गया. इस सम्मेलन में महानगर के विभिन्न विद्यालयों, महाविद्यालयों और बस्तियों से आए सैकड़ों युवा स्वयंसेवकों ने बड़े उत्साह के साथ भाग लिया. सम्मेलन के विभिन्न सत्रों में वक्ताओं ने युवाओं को राष्ट्र निर्माण, सामाजिक संगठन, अनुशासन और देशहित में समर्पित भाव से आगे आने का आह्वान किया.
कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ अतिथियों द्वारा मां भारती के चित्र पर पुष्पार्चन एवं दीप प्रज्वलन कर किया गया. सम्मेलन का समापन संघ की पारंपरिक प्रार्थना ‘नमस्ते सदा वत्सले मातृभूमे’ के साथ हुआ.
सम्मेलन के मुख्य वक्ता गोरक्ष प्रांत के प्रांत प्रचारक रमेश जी ने उपस्थित युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि संघ के शताब्दी वर्ष के अंतर्गत आयोजित यह युवा सम्मेलन एक ऐतिहासिक अवसर है, जो नई पीढ़ी को संघ के विचार और उसकी कार्यपद्धति के निकट लाने का माध्यम बन रहा है.
“जब व्यक्ति का अपने देश के साथ गहरा आत्मीय संबंध स्थापित होता है, तो वह देश की पीड़ा और समस्याओं को अपनी निजी समस्या मानने लगता है। नियमित शाखा गंगा की तरह पवित्र है और व्यक्ति निर्माण की जीवंत कार्यशाला है, जहाँ व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आता है। शाखा में फहराता परम पवित्र भगवा ध्वज हमारे भीतर राष्ट्रीयता और हिंदुत्व की भावना को निरंतर अभिसिंचित करता है।” – रमेश जी, प्रांत प्रचारक (गोरक्ष प्रांत, RSS)
उन्होंने बल देकर कहा कि केवल एक संगठित समाज के बल पर ही भारतीय संस्कृति, हिंदुत्व और राष्ट्रीय स्वाभिमान को सुरक्षित और संवर्धित किया जा सकता है. संगठन की शक्ति ही समाज में सकारात्मक और स्थायी परिवर्तन की आधारशिला है.
सम्मेलन के द्वितीय सत्र को संबोधित करते हुए विभाग प्रचारक अजय नारायण जी ने संघ के आनुशासनिक मूल्यों को रेखांकित किया. उन्होंने कहा कि अनुशासन ही संघ की मूल पहचान है और संघ का मुख्य उद्देश्य समाज में ऐसे राष्ट्रभक्त नागरिकों का निर्माण करना है जो अपने अधिकारों से पहले अपने राष्ट्रीय कर्तव्यों को समझें.
उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि देश और समाज के प्रति आवश्यकता पड़ने पर त्याग और समर्पण के लिए हर स्वयंसेवक को सदैव तत्पर रहना चाहिए. जब प्रत्येक नागरिक ‘देश सर्वोपरि’ (Nation First) के भाव से कार्य करेगा, तभी ‘भारत माता की जय’ का पावन संकल्प धरातल पर सार्थक सिद्ध होगा.
सम्मेलन के तृतीय सत्र में प्रतिभागी युवाओं को संघ की दैनिक शाखा लगाने की संपूर्ण प्रक्रिया और कार्यपद्धति से व्यावहारिक रूप से परिचित कराया गया:
कार्यक्रम की अध्यक्षता भाग संघचालक राधेरमण जी ने की. मंच पर अतिथियों का औपचारिक परिचय भाग कार्यवाह सुधीर राय ने कराया, जबकि कार्यक्रम की सारगर्भित प्रस्तावना राजेश जी ने रखी. संपूर्ण कार्यक्रम का कुशल मंच संचालन सह भाग कार्यवाह संतोष जी द्वारा किया गया.
इस ऐतिहासिक युवा सम्मेलन के अवसर पर भाग प्रचारक अरुणेश, सरस्वती शिशु मंदिर के प्रधानाचार्य राजीव कुमार श्रीवास्तव, भाग बौद्धिक प्रमुख अनूप, नगर कार्यवाह महेश, नगर विस्तारक सत्यम एवं श्याम नारायण सहित महानगर उत्तरी के विभिन्न विद्यालयों के शिक्षक और बड़ी संख्या में युवा स्वयंसेवक उपस्थित रहे.