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Aadhaar को लेकर बड़ा बदलाव! अब बैंकिंग ऐप में ही होगा फेस से वेरिफिकेशन, UIDAI ने लॉन्च किया नया टूल

UIDAI का नया SDK कंपनियों को अपने Android और iOS ऐप्स में आधार फेस ऑथेंटिकेशन जोड़ने की सुविधा देगा। इसका मतलब है कि ग्राहक को वेरिफिकेशन के लिए बार-बार दूसरे ऐप में जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

Published by
Mahak Singh

आज के समय में बैंक में अकाउंट खुलवाने, मोबाइल से बैंकिंग करने या किसी सरकारी सेवा का लाभ लेने के लिए पहचान की पुष्टि करना जरूरी होता है। इसके लिए आधार कार्ड का इस्तेमाल बड़े स्तर पर किया जाता है। कई बार वेरिफिकेशन की प्रक्रिया में अलग ऐप खोलने या कई स्टेप पूरे करने पड़ते हैं, जिससे लोगों को परेशानी भी होती है। अब इसी प्रक्रिया को आसान बनाने की दिशा में UIDAI ने एक नई पहल की है। यूनिक आइडेंटिफिकेशन अथॉरिटी ऑफ इंडिया यानी UIDAI ने आधार फेस ऑथेंटिकेशन सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट किट (SDK) और आधार फेस ऑथेंटिकेशन सैंडबॉक्स लॉन्च किया है। इन टूल्स को ग्लोबल फिनटेक फेस्ट 2026 में पेश किया गया। इनकी मदद से बैंक, फिनटेक कंपनियां और वित्तीय क्षेत्र की दूसरी कंपनियां अपने मोबाइल ऐप में आधार फेस ऑथेंटिकेशन को आसानी से जोड़ सकेंगी।

ऐप के अंदर ही हो सकेगा फेस वेरिफिकेशन

UIDAI का नया SDK कंपनियों को अपने Android और iOS ऐप्स में आधार फेस ऑथेंटिकेशन जोड़ने की सुविधा देगा। इसका मतलब है कि ग्राहक को वेरिफिकेशन के लिए बार-बार दूसरे ऐप में जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। जिस ऐप में वह बैंकिंग या दूसरी सेवा इस्तेमाल कर रहा है, उसी के अंदर फेस ऑथेंटिकेशन किया जा सकेगा। इस SDK में AI और मशीन लर्निंग आधारित लाइवनेस चेक और एंटी-स्पूफिंग फीचर भी दिए गए हैं। आसान भाषा में कहें तो यह तकनीक यह जांचने में मदद करेगी कि कैमरे के सामने असली व्यक्ति मौजूद है या किसी फोटो, वीडियो जैसी चीज का इस्तेमाल करके सिस्टम को धोखा देने की कोशिश की जा रही है। UIDAI के अनुसार, नए SDK में ऑथेंटिकेशन डेटा को सुरक्षित रखने और एन्क्रिप्शन का सपोर्ट भी दिया गया है। इसे अलग-अलग तरह के स्मार्टफोन पर काम करने के लिए डिजाइन किया गया है।

SDK के साथ UIDAI ने फेस ऑथेंटिकेशन सैंडबॉक्स भी पेश किया है। कंपनियां इसका इस्तेमाल अपनी सेवा को आम लोगों के लिए शुरू करने से पहले टेस्ट करने में कर सकेंगी। सैंडबॉक्स में फेस कैप्चर, लाइवनेस चेक, ऑथेंटिकेशन और एरर मैनेजमेंट जैसी प्रक्रियाओं को जांचा जा सकता है। नेटवर्क समस्या, टाइमआउट या स्पूफिंग जैसी स्थितियों का भी परीक्षण किया जा सकेगा।

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