
कोलकाता के ऋषि बंकिम शिपयार्ड में बुधवार को भारत के नए स्वदेशी महासागरीय अनुसंधान पोत ओआरवी सागर मंथन का जलावतरण हुआ। यह पोत राष्ट्रीय ध्रुवीय एवं महासागरीय अनुसंधान केंद्र (एनसीपीओआर) के लिए बनाया गया है।
केंद्रीय विज्ञान, प्रौद्योगिकी और पृथ्वी विज्ञान मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह और उनकी पत्नी मंजू सिंह ने वर्चुअल माध्यम से इस पोत का जलावतरण किया। परंपरा के मुताबिक मंत्री की पत्नी मंजू सिंह ने इसका नामकरण भी किया। कार्यक्रम में पृथ्वी विज्ञान सचिव डॉ. टी. श्रीनिवास कुमार, उनकी पत्नी कविता एलंती और गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स लिमिटेड (जीआरएसई) के सीएमडी कमोडोर पीआर हरि सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
यह पोत कोलकाता स्थित जीआरएसई ने डिजाइन और निर्मित किया है। दीप महासागर मिशन के तहत लगभग 840 करोड़ रुपये की लागत से यह तैयार हो रहा है। यह हर मौसम में काम कर सकेगा और दक्षिणी महासागर जैसी कठिन परिस्थितियों में भी चलने लायक है।
इसमें डायनामिक पोजिशनिंग सिस्टम, मल्टीबीम सर्वेक्षण, मल्टीचैनल भूकंपीय प्रणाली, सब-बाटम प्रोफाइलिंग, मौसम रडार और दूर से संचालित या स्वायत्त पानी के अंदर चलने वाले वाहन लगाने की व्यवस्था है। ये सुविधाएं समुद्र की गहराई में शोध करने में मदद करेंगी।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि यह जीआरएसई का पहला उन्नत महासागरीय अनुसंधान पोत है। समुद्र से मिले वैज्ञानिक आंकड़े आपदा प्रबंधन, जलवायु अध्ययन और पर्यावरण संरक्षण में काम आएंगे। उन्होंने बताया कि अनुबंध के सिर्फ दो साल और कील बिछाने के पांच महीने में ही जलावतरण हो गया, जो टीम की अच्छी काम करने की क्षमता दिखाता है।
ओआरवी सागर मंथन धीरे-धीरे 43 साल पुराने ओआरवी सागर कन्या की जगह लेगा। सागर कन्या को भारत ने 1983 में जर्मनी से खरीदा था। नए पोत से हिंद महासागर में बहुधात्विक हाइड्रोथर्मल सल्फाइड खनिजों की खोज, समुद्री पर्यावरण की बेसलाइन तैयार करना, वायुमंडलीय आंकड़े इकट्ठा करना और समुद्री जल की जांच करने में सहूलियत मिलेगी।
पृथ्वी विज्ञान सचिव डॉ. टी. श्रीनिवास कुमार ने कहा कि अब भारत ऐसे जटिल अनुसंधान पोत खुद बना सकता है। जुलाई 2024 में अनुबंध हुआ था। नवंबर 2024 में पहली स्टील कटिंग हुई और 8 अप्रैल 2026 को कील रखी गई। जलावतरण के बाद अब पोत पर सुपरस्ट्रक्चर बनाने और उपकरण लगाने का काम होगा। इसके बाद समुद्री परीक्षण होंगे। साल 2028 में इसे एनसीपीओआर को सौंपने का लक्ष्य है। जलावतरण का मतलब है पोत को पहली बार पानी में उतारना, जिससे निर्माण का अगला चरण शुरू होता है।