छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित सुकमा जिले में सुरक्षा बलों को माओवादी विरोधी अभियान के दौरान बड़ी सफलता मिली है। जंगल और पहाड़ी इलाके में चलाए गए तलाशी अभियान के दौरान सुरक्षा बलों ने माओवादियों केगुप्त ठिकाने का पता लगाकर वहां से हथियार, विस्फोटक, संचार उपकरण और रोजमर्रा के इस्तेमाल की कई सामग्री बरामद की है। सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक, यह बरामदगी माओवादी नेटवर्क के रसद तंत्र को कमजोर करने की दिशा में अहम मानी जा रही है।
सुकमा में माओवादी ठिकाने से हथियार, विस्फोटक और संचार उपकरण बरामद
अधिकारियों के अनुसार, चिन्तलनार थाना क्षेत्र के चिन्नबोडकेल के घने जंगलों में माओवादी ठिकाने की सूचना मिलने के बाद सीआरपीएफ की 223वीं बटालियन और जिला पुलिस की संयुक्त टीम ने तलाशी अभियान शुरू किया। रायगुडेम कैंप से सहायक कमांडेंट विकास कुमार की निगरानी में जवानों ने इलाके की घेराबंदी कर सघन तलाशी ली। इसी दौरान जंगल में छिपाकर रखे गए सामान का पता चला। तलाशी के दौरान एक देसी भरमार राइफल, डेटोनेटर से जुड़े तीन आईईडी कंटेनर, पांच शॉक-ट्यूब असेंबली, एक इलेक्ट्रिक और तीन नॉन-इलेक्ट्रिक डेटोनेटर बरामद किए गए। इसके अलावा करीब एक किलोग्राम बारूद, लगभग तीन किलोग्राम यूरिया और बीजीएल बनाने में इस्तेमाल होने वाले 57 पाइप भी मिले। सुरक्षा बलों ने पटाखे, लकड़ी के टुकड़े और लोहे की कीलें भी बरामद की हैं।
ठिकाने से संचार और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण भी मिले। इनमें वायरलेस और रेडियो सेट, विभिन्न प्रकार की बैटरियां, चार्जर, पावर बैंक, इन्वर्टर, मोबाइल फोन और बिजली के तार शामिल हैं। इसके अलावा माओवादी झंडा, साहित्य की 25 प्रतियां, काली वर्दी, बेल्ट, मच्छरदानी, धनुष-तीर और अन्य सामान भी बरामद हुआ। अधिकारियों का कहना है कि बरामद सामग्री से जंगल में सक्रिय माओवादी कैडरों के लिए बनाए गए संभावित लॉजिस्टिक्स नेटवर्क का संकेत मिलता है। सुरक्षा बलों ने इलाके में निगरानी और तलाशी अभियान और तेज कर दिया है। बस्तर संभाग में हाल के दिनों में ऐसी कई बरामदगी सामने आई हैं। 5 सितंबर को बीजापुर में 14 अलग-अलग ठिकानों से माओवादी सामग्री बरामद की गई थी, जबकि 6 सितंबर को कोंडागांव में भी विस्फोटक, पिस्तौल और अन्य सामान मिला था। लगातार हो रही इन कार्रवाइयों से सुरक्षा एजेंसियां माओवादी संगठनों के हथियार और रसद नेटवर्क पर दबाव बढ़ाने में जुटी हैं।

















