
कनाडा के टोरंटो में आयोजित ‘हिंदू विश्व बंधु-मित्रता के साथ विश्व को अपनाएं’ कार्यक्रम में कनाडा के पूर्व रक्षा मंत्री और अल्बर्टा के पूर्व मुख्यमंत्री जेसन केनी ने भारत-कनाडा संबंधों, भारतीय संस्कृति और कनाडा में विभिन्न समुदायों के बीच संवाद को लेकर महत्वपूर्ण बातें कहीं। उन्होंने कनाडा में बहुसांस्कृतिक समाज की चर्चा करते हुए कहा कि केवल विविधता को समाज की सबसे बड़ी ताकत मानना पर्याप्त नहीं है। यदि अलग-अलग समुदाय केवल अपने-अपने समूहों के भीतर ही संवाद करते रहें तो समाज अलग-अलग ‘सांस्कृतिक द्वीपों’ में बंट सकता है।
उन्होंने कहा कि आवश्यकता ‘विविधता में एकता’ की है और यही वह दृष्टि है, जिसकी ओर श्री मोहनराव भागवत भी ध्यान दिला रहे हैं। केनी ने कनाडा में विभिन्न धार्मिक, जातीय और सांस्कृतिक समुदायों के बीच मौजूद तनावों का उल्लेख करते हुए कहा कि लोगों को एक-दूसरे को जानने, समझने और सम्मान देने के लिए सार्थक संवाद को जानबूझकर आगे बढ़ाना होगा। उन्होंने कहा कि समुदायों के बीच दूरियां कम करने और आपसी सम्मान बढ़ाने के लिए ऐसे प्रयास महत्वपूर्ण हैं।
केनी ने भारत की आध्यात्मिक परंपरा और उसकी एकता तथा विविधता के दृष्टिकोण की भी प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि भारत की आध्यात्मिक विरासत में ऐसी मान्यताएं हैं, जो आज की दुनिया के लिए महत्वपूर्ण हैं।
उन्होंने मानव जीवन को केवल उपभोग और भौतिक आवश्यकताओं तक सीमित न मानने की बात कही और अपने ईसाई विश्वास का संदर्भ देते हुए कहा कि मनुष्य केवल रोटी से नहीं जीता। उनके अनुसार, मनुष्य के जीवन में आध्यात्मिक और नैतिक मूल्यों का भी महत्व है। उन्होंने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ अपने पुराने संबंधों को भी याद किया।
उन्होंने बताया कि वर्ष 2006 में, जब वह कनाडा सरकार में थे, उन्होंने तत्कालीन प्रधानमंत्री स्टीफन हार्पर से गुजरात के साथ संबंध मजबूत करने की वकालत की थी। केनी के अनुसार, उस समय उन्होंने हार्पर से कहा था कि गुजरात भारत और कनाडा में भारतीय प्रवासी समुदाय के लिहाज से तेजी से आगे बढ़ रहा है और तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी भविष्य में भारत के प्रधानमंत्री बन सकते हैं। उन्होंने गुजरात के साथ उस समय मौजूद ‘राजनयिक और वाणिज्यिक अवरोध’ को समाप्त करने की जरूरत पर भी जोर दिया था।
अपने संबोधन के अंत में केनी ने भारत-कनाडा संबंधों में फिर से सकारात्मक गति आने की बात कही। उन्होंने कहा कि भारत और कनाडा के संबंधों में नई ऊर्जा और गति दिखाई दे रही है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इस वर्ष कनाडा की प्रस्तावित दूसरी यात्रा इसे और आगे बढ़ाने का अवसर होगी। उनके इस बयान के बाद कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने ‘मोदी-मोदी’ के नारे भी लगाए। अंत में उन्होंने श्री भागवत को धन्यवाद देते हुए कहा कि उन्होंने भारत की प्राचीन हिंदू सभ्यता के सौंदर्य और आध्यात्मिक सत्य को याद दिलाने के साथ दुनिया के सामने एकता और विविधता का महत्वपूर्ण संदेश रखा है।