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ईरान में सब्सिडी से बाहर वाले पेट्रोल के दाम दोगुना बढ़े, 8 सितंबर से 10,000 तोमन प्रति लीटर

ईरान सरकार ने सब्सिडी वाले कोटे के बाहर पेट्रोल का दाम 8 सितंबर से दोगुना कर 10,000 तोमन प्रति लीटर कर दिया है। सब्सिडी कोटा पहले जैसा रहेगा। महंगाई और ईंधन कमी के बीच यह फैसला।

Published by
कुलदीप सिंह

तेल का उत्पादन करने वाले ईरान पर भी खाड़ी संकट का बड़ा ही गहरा असर पड़ने लगा है। वहां भी तेल के दामों बढ़ोत्तरी हो गई है। इससे सरकार की हालत खराब हो गई है। ईरान सरकार को 2019 जैसे प्रदर्शन का डर सताने लगा है। हालांकि, ये दाम गैर सब्सिडी वाले पेट्रोल के बढ़े हैं। ये मंगलवार से दोगुना कर दिया जाएगा। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब आम लोगों पर महंगाई का बोझ पहले से काफी बढ़ चुका है और देश में ईंधन की कमी भी महसूस हो रही है।

सरकारी प्रवक्ता फातेमे मोहाजेरानी ने रविवार को बताया कि तीसरे स्तर का पेट्रोल अब 5,000 तोमन प्रति लीटर की जगह 10,000 तोमन प्रति लीटर हो जाएगा। सब्सिडी वाला कोटा पहले जैसा ही रहेगा। हर महीने 60 लीटर 1,500 तोमन प्रति लीटर और अतिरिक्त 50 लीटर 3,000 तोमन प्रति लीटर पर मिलता रहेगा।

मोहाजेरानी ने कहा कि बढ़ती खपत के पीछे मौजूदा हालात और पुरानी नीतियां जिम्मेदार हैं। इस बढ़ोतरी से सप्लाई और डिमांड का संतुलन बनाए रखने और देश की मजबूती बढ़ाने में मदद मिलेगी।

आम लोगों पर असर

ईरान में महंगाई पहले से ऊंची है, मुद्रा काफी कमजोर हो चुकी है और रोजमर्रा की चीजों के दाम बढ़ रहे हैं। राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने अगस्त के आखिर में इस बढ़ोतरी का इशारा किया था, लेकिन तारीख नहीं बताई थी। लोगों को डर है कि पेट्रोल महंगा होने से ट्रांसपोर्ट खर्च बढ़ेगा और दूसरी चीजों के दाम भी ऊपर चले जाएंगे।

ईंधन की कमी

ईरान में पेट्रोल की सप्लाई पर दबाव बढ़ रहा है। एनर्जी ऑप्टिमाइजेशन ऑर्गनाइजेशन के प्रमुख इस्माइल सकाब इस्फहानी ने पिछले महीने बताया था कि देश में रोजाना करीब 14 से 15 मिलियन लीटर पेट्रोल की कमी है। खपत और उत्पादन के बीच का अंतर पहले से था, लेकिन लड़ाई और अमेरिकी नाकेबंदी ने हालात और बिगाड़ दिए हैं। घरेलू उत्पादन डिमांड के मुताबिक नहीं चल पा रहा।

मोहाजेरानी ने कहा कि इस बढ़ोतरी से जो अतिरिक्त पैसा आएगा, वह घरों की आजीविका बढ़ाने में लगेगा। हालांकि, उन्होंने यह नहीं बताया कि पैसा कैसे बांटा जाएगा।

संसद की आर्थिक समिति के सदस्य हुसैन सामसामी ने पिछले महीने चेतावनी दी थी कि मौजूदा हालात में पेट्रोल के दाम बढ़ाना बारूद के ढेर पर चिंगारी डालने जैसा हो सकता है।

2019 की यादें

ईरान में पेट्रोल के दाम बहुत संवेदनशील मुद्दा हैं। नवंबर 2019 में अचानक बढ़ोतरी होने पर पूरे देश में प्रदर्शन शुरू हो गए थे, जो बाद में सरकार विरोधी आंदोलन में बदल गए। अधिकारियों ने इंटरनेट लगभग बंद कर दिया था और सुरक्षा बलों की कार्रवाई में रॉयटर्स की जांच के मुताबिक कम से कम 1,500 लोग मारे गए थे।

अभी भी अधिकारी चिंतित हैं कि आर्थिक परेशानियां फिर सड़कों पर न उतर आएं। संसद अध्यक्ष मोहम्मद बागेर गालिबाफ ने पिछले महीने कहा था कि दुश्मन पेट्रोल को लेकर लोगों की नाराजगी का फायदा उठा सकते हैं। सरकार कोशिश कर रही है कि खपत और घरेलू सप्लाई के बीच बढ़ते अंतर को कम करे, लेकिन लोगों की महंगाई वाली नाराजगी भी न बढ़े।

 

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