
नेपाल में अचानक आई बाढ़
नेपाल में एक बार फिर से आपदा की आहट दिखने लगी है। देश के सुदूरपश्चिम प्रदेश के दरचुला जिले में शुक्रवार को भारी बारिश के बीच भूस्खलन हुआ। अपि हिमाल ग्रामीण नगरपालिका के भट्टर (भट्टाड़) क्षेत्र में पहाड़ी से मलबा नीचे गिरा। यह मलबा चमेलिया नदी (जिसे स्थानीय रूप से चौलानी भी कहते हैं) में गिर गया। नदी का बहाव आंशिक रूप से रुक गया। कुछ समय के लिए नदी लगभग आधे घंटे तक पूरी तरह बंद भी रही।
यह जगह उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले की सीमा से लगी हुई है। चमेलिया नदी आगे जाकर महाकाली (काली) नदी में मिलती है, जो भारत-नेपाल सीमा बनाती है। इसलिए नीचे की तरफ बसे इलाकों में अचानक बाढ़ का खतरा बढ़ गया।
शुक्रवार सुबह से छोटे-छोटे भूस्खलन हो रहे थे। दोपहर करीब एक बजे बड़ा मलबा गिरा। भट्टाड़ गांव के वार्ड अध्यक्ष भगत सिंह ठेकरे बोहरा ने बताया कि पहाड़ी दरकने से यह हुआ। मलबे से नदी का रास्ता प्रभावित हो गया। जिला प्रशासन कार्यालय, दरचुला ने चेतावनी दी कि अगर और भूस्खलन हुए तो नदी पूरी तरह बंद हो सकती है। इससे पानी जमा होकर अचानक फट सकता है।
भट्टाड़ गांव के 15 परिवारों को तुरंत सुरक्षित जगह शिफ्ट कराया गया। क्षेत्र की तीन जलविद्युत परियोजनाओं के कर्मचारियों को भी सुरक्षित स्थानों पर जाने के निर्देश दिए गए। सुरक्षा कर्मी तैनात किए गए। वे लोगों को चेतावनी दे रहे हैं और आपात स्थिति के लिए तैयार हैं।
सुदूरपश्चिम प्रदेश के मुख्यमंत्री खगराज भट्ट ने स्थानीय प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों को हाई अलर्ट पर रहने के निर्देश दिए। प्रशासन ने बाढ़ और आपदा सहायता के लिए आपातकालीन संपर्क नंबर भी जारी किए। नदी किनारे रहने वाले लोगों से सतर्क रहने और सावधानी बरतने की अपील की गई।
भूस्खलन से स्थानीय खेती की जमीन प्रभावित हुई। भट्टर क्षेत्र में करीब 500 मीटर पैदल मार्ग और सीढ़ियां क्षतिग्रस्त हुईं। एक सामुदायिक भवन को भी आंशिक नुकसान पहुंचा। नदी ने धीरे-धीरे मलबा काटना शुरू किया और शाम तक बहाव कुछ हद तक सामान्य हो गया। फिर भी बारिश जारी रहने और और भूस्खलन की संभावना के कारण सतर्कता बरती जा रही है।
विशेषज्ञों के अनुसार जलवायु परिवर्तन से हिमालय का पर्यावरण अस्थिर हो रहा है। बढ़ते तापमान से ग्लेशियर पीछे हट रहे हैं और पर्माफ्रॉस्ट पिघल रहा है। इससे पहाड़ों की ढलानें कमजोर पड़ रही हैं। नेपाल के ऊंचे पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन और नदियों के अस्थायी रूप से बंद होने जैसी घटनाएं बढ़ रही हैं।