पश्चिम बंगाल

बंगाल में UCC की तैयारी तेज: शुभेंदु सरकार ने जस्टिस रंजना देसाई की अध्यक्षता में समिति गठित की

पश्चिम बंगाल भाजपा सरकार राज्य में समान नागरिक संहिता लागू करने जा रही है। जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय समिति गठित। जानें प्रस्तावित UCC के प्रमुख प्रावधान, 13 कानूनों की जगह एक समान कानून और जनजातियों को छूट।

Published by
अभय कुमार

पश्चिम बंगाल में भाजपा सरकार राज्य में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने जा रही है। पश्चिम बंगाल उत्तराखंड, गुजरात व असम के बाद चौथा राज्य होगा, जहां यूसीसी कानून लागू किया जा रहा है। ये सभी राज्य भाजपा शासित राज्य है। शुभेंदु अधिकारी की सरकार ने यूसीसी लागू करने के लिए सुप्रीम कोर्ट की पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय समिति गठित का गठन किया है।

पश्चिम बंगाल में यूसीसी के तहत मौजूदा 13 अलग-अलग मैरिज एक्ट की जगह एक समान कानून लागू किये जाने की तैयारी है। राज्य में प्रस्तावित यूसीसी के तहत विवाह, तलाक, भरण-पोषण, बच्चों की कस्टडी और उत्तराधिकार से जुड़े नियम सभी समुदायों पर एक समान ढंग से लागू किया जाएगा। पश्चिम बंगाल में अनुसूचित जनजातियों को यूसीसी के दायरे से बाहर रखने के साथ ही उनके पारंपरिक रीति-रिवाजों में किस भी प्रकार का हस्तक्षेप करने की योजना नहीं है।

प्रस्तावित यूसीसी के तहत विवाह

प्रस्तावित यूसीसी के तहत विवाह से उत्तराधिकार तक एक समान कानून बनाया जाएगा, जिसमें लैंगिक समानता के बाद धर्मनिरपेक्षता को प्राथमिकता दिया जाएगा। यह कानून वर्तमान में राज्य में धर्म आधारित मौजूदा व्यक्तिगत कानूनों की जगह लेगा। नए प्रस्तावित कानून के तहत तलाक, विवाह, उत्तराधिकार व भरण-पोषण जैसे मामलों में एक समान कानून होगा।

सेवानिवृत जज रंजना देसाई की अध्यक्षता में समिति

पश्चिम बंगाल राज्य सरकार द्वारा गठित समिति में की अध्यक्षता की जिम्मेदारी न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) रंजना प्रकाश देसाई को दिया गया है। वहीं इसमें मेघालय के पूर्व राज्यपाल तथागत रॉय, आईएएस अधिकारी दुष्यंत नरियाला, सेवानिवृत्त आईएएस शत्रुघ्न सिंह, पश्चिम बंगाल सरकार की मुख्य सचिव संघमित्रा घोष, शिक्षाविद डॉ रत्ना भट्टाचार्य, पूर्व कुलपति गोपालचंद्र मिश्रा, कलकत्ता हाईकोर्ट के अधिवक्ता उस्मान गनी मलिक व निर्मल्य भट्टाचार्य को सदस्य बनाया गया है।

इस प्रस्तावित कानून के तहत अदालत के बाहर दिये गये तलाक को कानूनी मान्यता नहीं दिया जाएगा। तलाक के लिए कानूनी तौर पति और पत्नी दोनों को बराबर का अधिकार दिया जाएगा। तलाक के बाद भरण-पोषण के मामले में भी दोनों को बराबर का अधिकार देने का प्रस्ताव है। बहुविवाह पर भी पूरी तरह पाबंदी रहेगी। निकाह हलाला प्रथाओं को समाप्त करने का प्रावधान होने की संभावना है।

राज्य सरकार के द्वारा प्रस्तावित यूसीसी के तहत 13 कानूनों की जगह एक कानून लाये जाने की संभावना है। भारतीय तलाक अधिनियम, भारतीय ईसाई विवाह अधिनियम, बंगाल मुहम्मदन विवाह और तलाक पंजीकरण अधिनियम, आनंद विवाह अधिनियम, पारसी विवाह और तलाक अधिनियम, आर्य विवाह वैधता अधिनियम, मुस्लिम व्यक्तिगत कानून (शरिया) आवेदन अधिनियम, मुस्लिम विवाह विघटन अधिनियम, विशेष विवाह अधिनियम), हिन्दू विवाह अधिनियम, विदेशी विवाह अधिनियम (मुस्लिम महिला (तलाक पर अधिकारों का संरक्षण) अधिनियम  और मुस्लिम महिला (विवाह पर अधिकारों का संरक्षण) अधिनियम  शामिल है।

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