भुवनेश्वर: ओडिशा के कंधमाल जिले में सुरक्षा बलों ने एक महत्वपूर्ण अभियान के दौरान माओवादी हथियारों, विस्फोटकों, गोला-बारूद और अन्य सामग्री से भरा एक छिपा हुआ डंप बरामद किया है। यह बरामदगी दरिंगबाड़ी थाना क्षेत्र के अंतर्गत मातराबाड़ी गांव के निकट जंगल में की गई। पुलिस के अनुसार, पिछले पांच दिनों में ओडिशा के विभिन्न वन क्षेत्रों से बरामद किया गया यह तीसरा माओवादी डंप है।
यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब कंधमाल को 31 मार्च 2026 को आधिकारिक रूप से माओवादी मुक्त घोषित किया जा चुका है। हालांकि, सुरक्षा एजेंसियां जिले के संवेदनशील और वन क्षेत्रों में लगातार तलाशी एवं क्षेत्र प्रभुत्व अभियान चलाकर माओवादी गतिविधियों के पुराने अवशेषों और छिपे हथियारों का पता लगा रही हैं।
खुफिया सूचना पर शुरू हुआ संयुक्त अभियान
पुलिस के अनुसार, माओवादी हथियारों और अन्य सामग्री के जंगल में छिपे होने की विश्वसनीय खुफिया सूचना मिलने के बाद जिले के विभिन्न वन क्षेत्रों में संयुक्त तलाशी अभियान शुरू किया गया। अभियान में स्पेशल ऑपरेशंस ग्रुप (एसओजी), सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) और जिला स्वैच्छिक बल (डीवीएफ) के जवान शामिल थे। सुरक्षा बलों ने रायिकिया, बालिगुड़ा, दरिंगबाड़ी और कोटगढ़ थाना क्षेत्रों के अंतर्गत आने वाले कई वन इलाकों में तलाशी अभियान चलाया।
तलाशी के दौरान बाबुती, जिमाबाड़ी, करहापंगा, गरारमहा, जिमराहा, तेलसी, सिदुपदर, पदलमाला, माताबारी, तेरानिपंगा, झाझीबाड़ी, टुकुबाड़ी, सतारी, सालाकिंगिया, परिगड़ा और पेनामल सहित कई क्षेत्रों को कवर किया गया। इसी अभियान के दौरान डीवीएफ की टीम ने दरिंगबाड़ी थाना क्षेत्र के अंतर्गत मातराबाड़ी गांव के पास जंगल में एक संदिग्ध स्थान का पता लगाया, जहां माओवादी सामग्री छिपाकर रखी गई थी।
हथियार, आईईडी और विस्फोटक बरामद
पुलिस के मुताबिक, बरामद डंप से एक 12-बोर राइफल, एक सिंगल-शॉट राइफल और एक एसबीएल ग्रेनेड मिला है। इसके अलावा सुरक्षा बलों ने 19 इलेक्ट्रिक डेटोनेटर, दो टिफिन-बॉक्स आईईडी, एक बंडल कॉर्डेक्स और दो जिलेटिन स्टिक बरामद किए। डंप से .303 के 13 राउंड और सिंगल-शॉट हथियार के 10 राउंड भी जब्त किए गए।
माओवादी शिविरों में इस्तेमाल होने वाली अन्य सामग्री भी मौके से मिली है। इनमें इलेक्ट्रिक वायर सहित विभिन्न सामान शामिल हैं, जिन्हें पुलिस ने माओवादी गतिविधियों से संबंधित बताया है। विस्फोटक सामग्री की मौजूदगी को देखते हुए अभियान के दौरान बम डिस्पोजल स्क्वाड की मदद ली गई।सुरक्षा मानकों का पालन करते हुए संदिग्ध विस्फोटक सामग्री की जांच और सुरक्षित तरीके से बरामदगी की गई।
नौ सुरक्षा टीमों ने संभाला अभियान
कंधमाल के पुलिस अधीक्षक रामेंद्र प्रसाद के अनुसार, अभियान में विभिन्न सुरक्षा बलों की कई टीमें शामिल थीं। पुलिस के मुताबिक, एसओजी की पांच टीमें, बीएसएफ की 108वीं बटालियन की तीन इकाइयां और डीवीएफ की एक टीम ने संयुक्त रूप से तलाशी अभियान चलाया। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, अभियान पूरी तरह खुफिया सूचनाओं पर आधारित था। जंगल में छिपे माओवादी डंप का पता लगाने के बाद सुरक्षा बलों ने व्यवस्थित तरीके से इलाके की तलाशी ली। SP रामेंद्र प्रसाद ने कहा कि जिले के संवेदनशील और माओवादी प्रभावित क्षेत्रों में इस तरह के अभियान आगे भी जारी रहेंगे।
कंधमाल के माओवादी मुक्त घोषित होने के बाद भी जारी तलाशी
कंधमाल को 31 मार्च 2026 को माओवादी मुक्त घोषित किए जाने के बावजूद सुरक्षा एजेंसियों ने जंगलों में निगरानी और तलाशी अभियान जारी रखा है। अधिकारियों का मानना है कि पूर्व में सक्रिय माओवादी समूहों द्वारा हथियार, विस्फोटक और अन्य सामग्री कई स्थानों पर छिपाई गई हो सकती है। नियमित कॉम्बिंग और क्षेत्र प्रभुत्व अभियानों का उद्देश्य ऐसे पुराने डंप का पता लगाना तथा किसी भी संभावित माओवादी नेटवर्क के दोबारा सक्रिय होने की संभावना को रोकना है।
जून में भी कंधमाल से बरामद हुए थे दो डंप
कंधमाल में यह इस वर्ष माओवादी डंप की पहली बरामदगी नहीं है। इससे पहले 16 जून को सुरक्षा बलों ने जिले के सितागुड़ा, गंजुगुड़ा, कुटिबरही, गुडरिकिया और लंजाम गांवों को कवर करने वाले वन क्षेत्रों में तलाशी अभियान चलाकर माओवादी हथियार, गोला-बारूद और विस्फोटक सामग्री बरामद की थी। ये क्षेत्र कोटगढ़, बालिगुड़ा और तुमुडिबंधा थाना क्षेत्रों के अंतर्गत आते हैं। इससे पहले 11 जून को भी बालिगुड़ा क्षेत्र में सुरक्षा कर्मियों ने एक अन्य माओवादी डंप का पता लगाया था। वहां से हथियार, गोला-बारूद और माओवादी गतिविधियों में इस्तेमाल होने वाली अन्य सामग्री बरामद की गई थी। लगातार हो रही इन बरामदगियों से स्पष्ट है कि सुरक्षा एजेंसियां माओवादी गतिविधियों के पुराने ढांचे और छिपे हुए संसाधनों को पूरी तरह समाप्त करने पर जोर दे रही हैं।
पांच दिनों में ओडिशा में तीन माओवादी डंप बरामद
कंधमाल की बरामदगी से पहले 26 अगस्त को मलकानगिरी जिले में भी सुरक्षा बलों ने एक छिपा हुआ माओवादी हथियार और गोला-बारूद डंप बरामद किया था। यह डंप ओडिशा-छत्तीसगढ़ सीमा से लगे वन क्षेत्र में मिला था। अभियान की शुरुआत आत्मसमर्पण कर चुके माओवादियों से मिली सूचना के आधार पर की गई थी। डीवीएफ के जवानों ने मठिली थाना क्षेत्र के अंतर्गत चेरकोटला, किरमिति, कोटवापदर और कड़ाभाटा के आसपास के जंगलों में व्यापक तलाशी अभियान चलाया था। यह क्षेत्र छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले के दरभा और सुकमा जिले के पुसपाल थाना क्षेत्रों से सटा हुआ है और सुरक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है।
24 अगस्त को सुंदरगढ़ में भी मिला था डंप
इससे पहले 24 अगस्त को सुंदरगढ़ जिले में भी सुरक्षा बलों ने एक छिपा हुआ माओवादी डंप बरामद किया था। यह कार्रवाई के. बालंग थाना क्षेत्र के अंतर्गत सिलकुटा रिजर्व फॉरेस्ट में संयुक्त तलाशी एवं क्षेत्र प्रभुत्व अभियान के दौरान की गई थी। इस अभियान में डीवीएफ और बम डिटेक्शन एंड डिस्पोजल स्क्वाड (BDDS) के जवान शामिल थे। पुलिस के अनुसार, यह डंप लगभग चार वर्ष पुराना था और इसमें हथियार, गोला-बारूद, विस्फोटक सामग्री, संचार उपकरण तथा माओवादी गतिविधियों से जुड़े अन्य सामान मौजूद थे।
अवशेष माओवादी ढांचे को खत्म करने पर जोर
कंधमाल, मलकानगिरी और सुंदरगढ़ में पांच दिनों के भीतर तीन माओवादी डंप की बरामदगी से संकेत मिलता है कि सुरक्षा एजेंसियां ओडिशा के पूर्व माओवादी प्रभावित इलाकों में छिपे पुराने हथियारों और अन्य संसाधनों का पता लगाने पर लगातार ध्यान केंद्रित कर रही हैं। खुफिया सूचनाओं, नियमित कॉम्बिंग अभियान, क्षेत्र प्रभुत्व कार्रवाई और आत्मसमर्पण कर चुके माओवादियों से प्राप्त जानकारी के आधार पर सुरक्षा बल संवेदनशील वन क्षेत्रों में तलाशी अभियान चला रहे हैं।
अधिकारियों का कहना है कि ऐसे अभियान भविष्य में भी जारी रहेंगे, ताकि छिपे हुए हथियार और विस्फोटक बरामद किए जा सकें, अवशेष माओवादी बुनियादी ढांचे को समाप्त किया जा सके और पूर्व माओवादी प्रभावित क्षेत्रों में किसी भी संभावित पुनर्सक्रियता को रोका जा सके।

















