अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को सोशल मीडिया पर एक पोस्ट के जरिए बताया कि अमेरिका और वेनेजुएला के बीच तेल को लेकर एक बड़ा समझौता हुआ है। उन्होंने इसे दुनिया के इतिहास का सबसे बड़ा तेल डील बताया। इस समझौते के मुताबिक अमेरिका को वेनेजुएला के साबित तेल भंडार में से 65 अरब बैरल से ज्यादा पर बहुमत नियंत्रण मिलेगा। ट्रंप के अनुसार यह अमेरिकी करदाताओं के लिए बिना किसी खर्च के हुआ है।
समझौते के मुख्य बिंदु
ट्रंप ने लिखा कि यह समझौता उनके निर्देश पर हुआ। इसमें अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रूबियो, रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ और वेनेजुएला के अंतरिम राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज शामिल थे। निजी कंपनियों की साझेदारी भी इसमें है। ट्रंप का कहना है कि इससे अमेरिका के तेल भंडार दोगुने से ज्यादा हो जाएंगे, तेल की आपूर्ति बढ़ेगी और लंबे समय तक पेट्रोल के दाम कम रहेंगे। साथ ही वेनेजुएला की अर्थव्यवस्था को भी फायदा पहुंचेगा।
विदेश मंत्री रूबियो ने भी इस डील को दोनों देशों के लिए फायदेमंद बताया। उनके मुताबिक इससे वेनेजुएला में करीब 100 अरब डॉलर का निजी निवेश आएगा, हजारों अच्छी तनख्वाह वाली नौकरियां पैदा होंगी और देश की अर्थव्यवस्था फिर से खड़ी हो सकेगी।
पिछले घटनाक्रम
यह घोषणा लगभग नौ महीने बाद आई है जब जनवरी में अमेरिकी सेना ने ट्रंप के आदेश पर वेनेजुएला के पूर्व राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को गिरफ्तार किया था। मादुरो को अमेरिका लाया गया जहां उन पर नार्कोटेररिज्म और ड्रग तस्करी के आरोप लगे हैं। मादुरो हटने के बाद से ट्रंप अमेरिकी तेल कंपनियों को वेनेजुएला वापस लाने की बात करते रहे हैं। उन्होंने पहले यह भी आरोप लगाया था कि पूर्व राष्ट्रपति ह्यूगो चावेज के समय विदेशी कंपनियों की संपत्तियों का राष्ट्रीयकरण करके अमेरिका का तेल लिया गया था।
वेनेजुएला का तेल भंडार
वेनेजुएला में अनुमानित 303 अरब बैरल कच्चा तेल का भंडार है। यह दुनिया के कुल तेल भंडार का करीब 17 प्रतिशत है। अमेरिकी ऊर्जा सूचना प्रशासन के अनुसार ज्यादातर भंडार पहले से ही मैप किए हुए हैं, यानी नई खोज की जरूरत कम पड़ती है। फिर भी देश की तेल उत्पादन व्यवस्था बहुत खराब हालत में है। इसलिए दुनिया के इतने बड़े भंडार के बावजूद वेनेजुएला फिलहाल दुनिया के कुल तेल उत्पादन का सिर्फ करीब एक प्रतिशत ही निकाल पाता है।
अमेरिका में ऊर्जा की स्थिति
अमेरिका में इस समय पेट्रोल के दाम ऊंचे चल रहे हैं। ईरान के साथ युद्ध छह महीने से चल रहा है और इसका कोई स्पष्ट अंत नजर नहीं आ रहा। इससे ऊर्जा आपूर्ति पर दबाव बढ़ा है। अमेरिका अपने स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व का इस्तेमाल कर रहा है। अगस्त की शुरुआत में यह भंडार 300 मिलियन बैरल से नीचे आ गया था। साल 2026 की शुरुआत से अब तक इसमें 100 मिलियन बैरल से ज्यादा की कमी आई है।











