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ए. बालकृष्णन जी: उत्तर-पूर्व से कन्याकुमारी तक समर्पित रहा संपूर्ण जीवन

Written byPanchjanyaPanchjanya
Aug 27, 2026, 02:52 pm IST
inभारत, श्रद्धांजलि
ए बालाकृष्णन जी का निधन

ए बालाकृष्णन जी का निधन

विवेकानंद रॉक मेमोरियल और विवेकानंद केंद्र के अध्यक्ष श्री ए. बालकृष्णन जी का गुरुवार सुबह निधन हो गया है। उनका जन्म 3 मई 1938 को हुआ था। उन्होंने अपना सारा जीवन राष्ट्र को समर्पित कर दिया।

विवेकानंद केंद्र की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार ए. बालकृष्णन जी विवेकानंद केंद्र के शुरुआती ‘जीवनव्रतियों’ में से एक थे। उन्होंने केंद्र के संस्थापक श्रद्धेय एकनाथ जी रानाडे के प्रत्यक्ष और प्रेरणादायी मार्गदर्शन में प्रशिक्षण प्राप्त किया था। स्वामी विवेकानंद के आदर्शों को जीवन में उतारते हुए उन्होंने उत्तर-पूर्व (नॉर्थ-ईस्ट) से लेकर कन्याकुमारी तक निस्वार्थ सेवा, त्याग और राष्ट्र-समर्पण के साथ अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया।

विभिन्न दायित्व और मुख्य योगदान

पूर्वोत्तर में कार्य (1981 तक): उन्होंने उत्तर-पूर्व में जोनल ऑर्गनाइजर के रूप में कार्य किया। वर्ष 1981 तक वे अरुणाचल प्रदेश में ‘विवेकानंद केंद्र विद्यालयों’ (VKV) के सचिव सहित विभिन्न महत्वपूर्ण पदों पर रहे।

महासचिव / जनरल सेक्रेटरी (1981 – 2001): लगातार दो दशकों तक उन्होंने केंद्र के महासचिव का दायित्व निभाया।

उपाध्यक्ष (2001 – 2020): लगभग 19 वर्षों तक उपाध्यक्ष के रूप में केंद्र की गतिविधियों का विस्तार किया।

अध्यक्ष (2020 से अब तक): वर्ष 2020 से वे विवेकानंद केंद्र के अध्यक्ष पद पर आसीन थे।

शिक्षा और समाज सेवा में अमूल्य योगदान

बालकृष्णन जी ने देशभर में, विशेष रूप से ‘विवेकानंद केंद्र विद्यालयों’ के विस्तार और विभिन्न सामाजिक सेवा पहलों को गति देने में निर्णायक भूमिका निभाई। उनका सरल, अनुशासित और निस्वार्थ जीवन, केंद्र के मिशन के प्रति गहरी प्रतिबद्धता और भारत के प्रति अटूट निष्ठा आने वाली पीढ़ियों और कार्यकर्ताओं के लिए हमेशा प्रेरणापुंज बनी रहेगी।

प्रधानमंत्री मोदी ने जताया शोक

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शोक व्यक्त करते हुए कहा कि श्री ए. बालकृष्णन जी ने अपने जीवन के पांच दशक से अधिक का समय स्वामी विवेकानंद के आदर्शों और समाज की सेवा में समर्पित किया। विवेकानंद केंद्र के शुरुआती ‘जीवनव्रतियों’ में से एक के तौर पर, उन्होंने पूरे देश में अथक परिश्रम किया। पूर्वोत्तर भारत के साथ उनका विशेष और गहरा जुड़ाव था। उन्होंने शिक्षा, समाज-सेवा और राष्ट्र-निर्माण से जुड़े कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने जताया गहरा दुख

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की ओर सरसंघचालक श्री मोहन भागवत और सरकार्यवाह श्री दत्तात्रेय होसबाले ने शोक संवेदना में कहा कि श्री ए. बालकृष्णन जी कर्मयोग की साक्षात् प्रतिमूर्ति थे। उन्होंने अपना सम्पूर्ण जीवन स्वामी विवेकानन्द जी के विश्वबंधुत्व एवं सहिष्णुता के संदेश के प्रसार तथा राष्ट्र एवं समाज की सेवा में समर्पित कर दिया। उनका सरल जीवन, निःस्वार्थ सेवा, त्याग एवं हिन्दुत्व के प्रति उनकी अटूट निष्ठा भारतवासियों के लिए सदैव प्रेरणास्रोत बनी रहेगी। बालकृष्णन जी, स्वामी विवेकानन्द जी के कार्य को आगे बढ़ाने के लिए कन्याकुमारी स्थित विवेकानन्द केन्द्र के आजीवन समर्पित स्वयंसेवक-दल के प्रारम्भिक पीढ़ी के स्वयंसेवक थे। उनके निधन से हिन्दू समाज ने एक महान आत्मा को खो दिया है। उनके देवलोक गमन से उत्पन्न हुई रिक्तता की पूर्ति अत्यन्त कठिन है।

 

Topics: विवेकानंद रॉक मेमोरियलविवेकानंद केंद्रए बालाकृष्णनए बालाकृष्णन का निधनए बालाकृष्णन श्रद्धांजलिएकनाथ रानाडे
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