नेपाल में बाढ़ और भूस्खलन में हुई भारी तबाही में मृतकों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। भोटेकोशी नदी में अचानक से आई इस बाढ़ से तीन जिलों में भारी नुकसान पहुंचाया। अब तक कम से कम 160 लोगों की मौत हो चुकी है। सैकड़ों लोग लापता हैं, जिनमें सुरक्षाकर्मी और विदेशी पर्यटक भी शामिल हैं। प्रधानमंत्री कार्यालय के अनुसार 133 विदेशी और 44 सुरक्षाकर्मी लापता बताए गए हैं। यह नेपाल के हाल के सालों की सबसे बड़ी आपदाओं में से एक मानी जा रही है।
बाढ़ कैसे आई
बाढ़ चीन सीमा के पास ल्हेंदे नदी (भोटेकोशी की सहायक नदी) में आई हिमस्खलन से शुरू हुई। हिमस्खलन ने नदी का रास्ता रोक दिया। पानी अचानक रसुवागढ़ी के पास तिमुरे में पहुंचा। इलाके में बारिश नहीं हुई थी, इसलिए लोगों को कोई चेतावनी नहीं मिली। वे रोजमर्रा के काम कर रहे थे। तिमुरे का बड़ा हिस्सा बह गया। फिर बाढ़ स्याफ्रुबेसी और नीचे की तरफ बढ़ी। रास्ते में आने वाले लोग, जानवर, मकान और सड़कें सब बह गए।
रसुवा के मुख्य कस्टम अधिकारी राजेंद्र ढुंगाना ने बताया कि सुबह जमीन हिलने से उन्हें लगा भूकंप आ गया। बाहर निकलकर देखा तो करीब 100 मीटर ऊंची पानी की दीवार आ रही थी। उन्होंने कहा, “कुछ ही देर में बाजार गायब हो गया।” कस्टम चेकपॉइंट पर खड़े 300 से ज्यादा वाहन और ट्रक भी बह गए। ढुंगाना और कई लोग पास के जंगल में भागकर बच गए।
नुकसान का पैमाना
बाढ़ ने नौ जलविद्युत परियोजनाएं और नौ बैंक शाखाएं नष्ट हो गई हैं। शुरुआती रिपोर्ट के मुताबिक 19 मोटरेबल पुल और 40 किलोमीटर राजमार्ग बह गए। निजी और सरकारी संपत्ति का पूरा हिसाब अभी नहीं लगा है। नुवाकोट के बिदुर नगरपालिका वार्ड 7 के अध्यक्ष रविंद्र नेपाल ने बताया कि सोले से अक्कारे बाजार तक सैकड़ों घर बह गए। कुछ लोग बच निकले, लेकिन कई बुजुर्ग और बच्चे लापता हैं। दांडाथोक तुप्चे के गोकर्ण अधिकारी ने कहा कि उनके गांव में कुछ नहीं बचा। कर्मेटार में कुछ घर दूर से ठीक दिखते हैं, लेकिन अंदर कीचड़ और मलबे से भरे हैं।
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पिछले साल भी इसी नदी में बाढ़ आई थी। उसमें कम से कम 11 लोग मारे गए थे और मितेरी पुल बह गया था। उस नुकसान की मरम्मत अभी पूरी नहीं हुई थी।
चेतावनी व्यवस्था क्यों नहीं चली
रसुवा जिला प्रशासन को तिब्बत से शुरू हुई बाढ़ की कोई जानकारी पहले नहीं मिली। भोटेकोशी के ऊपरी हिस्से में लगे ऑटोमैटिक फ्लड मॉनिटरिंग स्टेशन भी बाढ़ में बह गए। वे अलर्ट नहीं भेज सके। फ्लड फोरकास्टिंग डिवीजन को सुबह 8:56 बजे जानकारी मिली। चार मिनट में नीचे के इलाकों को चेतावनी भेज दी गई। रसुवा में देर हो चुकी थी, लेकिन नुवाकोट और आगे के क्षेत्रों में कई लोग बच गए। चीन ने बाद में कहा कि पानी बढ़ने पर नेपाल को तुरंत बताएगा। दोनों देशों के बीच आपदा सहयोग का समझौता पहले से है, लेकिन इस बार जानकारी समय पर नहीं पहुंची।
सैटेलाइट तस्वीरों से पता चला कि रसुवागढ़ी सीमा से करीब 20 किलोमीटर उत्तर-पूर्व तिब्बत में हिमस्खलन हुआ। इससे मलबे वाली बाढ़ आई। उत्तरागया गाउंपालिका में भी नुकसान ज्यादा हुआ। स्कूल बस समेत कई चीजें लापता हैं। बेत्रावती और सोले बाजार पूरी तरह बह गए।











