
अजीत डोभाल
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की आने वाली मुलाकातों से पहले राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोवाल सोमवार को चीन पहुंच रहे हैं। वो सीमा से जुड़े मुद्दों पर खास बातचीत करने जा रहे हैं। इस दौरान वह मंगलवार को स्पेशल रिप्रेजेंटेटिव्स डायलॉग के 25वें दौर में हिस्सा लेंगे। ये बैठक सीमा विवादों को लेकर होगी।
रिपोर्ट्स के अनुसार, मंगलवार को डोवाल और उनके चीनी समकक्ष वांग यी इस बैठक की सह-अध्यक्षता करेंगे। ये बैठक बीजिंग में होनी है।
ये दौरा मोदी और शी की अगली कुछ हफ्तों की मुलाकातों से पहले हो रहा है। दोनों नेता 31 अगस्त से 1 सितंबर तक शंघाई कोऑपरेशन ऑर्गनाइजेशन (एससीओ) समिट के दौरान किनारे पर मिलेंगे। उसके बाद सितंबर में भारत ब्रिक्स समिट की मेजबानी करेगा। उसमें शी जिनपिंग भारत आने वाले हैं। उम्मीद है कि वो 12 सितंबर को भारत पहुंचेंगे और समिट से पहले मोदी से द्विपक्षीय मुलाकात भी करेंगे।
मंगलवार की इस बैठक में मुख्य रूप से तीन चीजों पर बात होने की उम्मीद है – डी-एस्केलेशन यानी तनाव कम करना, सीमा तय करने का काम (डिलिमिटेशन) और सीमा से जुड़े अन्य मामले। भारतीय पक्ष इस बात पर जोर दे रहा है कि सीमा क्षेत्रों में शांति और स्थिरता बनी रहे। उनका मानना है कि इससे भारत-चीन रिश्तों का समग्र विकास हो सकेगा। दोनों पक्ष सीमा क्षेत्रों में प्रभावी प्रबंधन के लिए एक वर्किंग ग्रुप बनाने पर भी विचार कर रहे हैं, ताकि वहां शांति बनी रहे।
डोवाल-वांग यी की बैठक से ठीक पहले विदेश मंत्री एस जयशंकर ने शनिवार को एक बात दोहराई थी। उन्होंने कहा कि सीमा क्षेत्रों में शांति और स्थिरता चीन के साथ अच्छे रिश्तों के लिए जरूरी शर्त है। साथ ही उन्होंने ये भी कहा कि भारत के आधुनिकीकरण के लिए बीजिंग के साथ जुड़ाव महत्वपूर्ण है। दोनों पक्षों का हित एक स्थिर रिश्ते में है।