पाञ्चजन्य के इस विशेषांक “विभाजन विभीषिका: पीड़ा और पाठ” में भारत विभाजन की त्रासदी, पाकिस्तान निर्माण की पृष्ठभूमि, विस्थापित परिवारों के अनुभव, सिंध और पूर्वोत्तर पर पड़े प्रभाव तथा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की भूमिका जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत चर्चा की गई है। संपादक हितेश शंकर की संपादकीय “स्मृतियां जो रुलाती हैं, स्मृतियां जो जगाती हैं” से लेकर बलबीर दत्त, वासुदेव देवनानी, पद्मश्री डॉ. हरमहेंद्र सिंह बेदी, नरेंद्र दत्त, दीपक द्विवेदी, संध्या जैन और अन्य लेखकों के विचारोत्तेजक लेख इस अंक को विशेष बनाते हैं। इसके साथ ही अग्नि-4 मिसाइल, भारत की बढ़ती सामरिक शक्ति, वीर सावरकर, सारनाथ और आज-कल स्तंभ की प्रमुख घटनाओं को भी इस अंक में स्थान दिया गया है। जानिए विभाजन की पीड़ा, इतिहास के अनकहे प्रसंग और नए भारत की सामरिक शक्ति की कहानी—पाञ्चजन्य इस सप्ताह में।















