गत 30 जुलाई पर्वतारोहण के इतिहास में एक दुखद दिन बन गया। पाकिस्तान के काराकोरम पर्वत श्रृंखला में ब्राॅड पीक पर हिमस्खलन के बाद दस पर्वतारोही लापता हो गए। इसके अगले दिन 31 जुलाई को पुष्टि हुई कि विश्व के प्रसिद्ध पर्वतारोही निर्मल पुर्जा सहित सभी पर्वतारोहियों की मृत्यु हो गई। इस दल में नेपाल के छह, पाकिस्तान, ओमान, अमेरिका और चीन के एक-एक सदस्य थे। पर्वतारोहण अभियानों का संचालन करने वाली कंपनी एलीट एक्सपेड के अनुसार इस दुर्घटना में उनके भरोसेमंद क्लाइंबिंग पार्टनर गाइड पुर बहादुर गुरुंग तथा नीमा शेरपा का भी निधन हो गया।
निर्मल पुर्जा का जन्म नेपाल के मयागडी जिले के एक छोटे से गांव दाना में हुआ था। उनके पिता गोरखा सैनिक थे। एक साक्षात्कार के दौरान अपने घर की स्थिति के बारे में निर्मल ने बताया था कि वे बहुत सामान्य परिवार से हैं। बचपन में हमारे पास चप्पल भी नहीं होती थी। उनके तीनों बड़े भाई गोरखा सैनिक थे और उन्होंने ही निर्मल पुर्जा को अंग्रेजी माध्यम के बोर्डिंग स्कूल में दाखिला करवाया था। उन्होंने स्कूल में ही किक-बाॅक्सिंग का प्रशिक्षण प्राप्त किया था। फिर लाॅफबोरो विश्वविद्यालय से सुरक्षा प्रबंधन में स्नातकोत्तर डिप्लोमा प्राप्त किया।
पर्वतारोही निर्मल पुर्जा को लोग निम्सदाई के नाम से जानते थे। पुर्जा ने अपने करियर की शुरुआत ब्रिटिश सेना के गोरखा दस्ते में बतौर सैनिक 2003 में की थी। फिर, 2009 में राॅयल नेवी की विशेष नाविक सेवा-एसबीएस से जुड़े। वह विशिष्ट ब्रिटिश इकाई में शामिल होने वाले पहले गोरखा थे। 43 वर्षीय निर्मल पुर्जा ब्रिटिश सैन्य सेवा के आरंभिक दिनों को याद करते हुए, बताते थे कि जब ब्रिटेन में मेरे कई साथियों ने मुझसे पूछा कि आप नेपाल के निवासी हैं, आपने तो हिमालय पर्वत देखा होगा? क्या आपने एवरेस्ट पर्वत पर चढ़ाई की है? तब मैं लोगों को ‘नहीं’ में उत्तर देता। लेकिन, मुझे अपने मन में दुख होता था कि मैं पर्वतीय प्रदेश का होकर भी अब तक इस सुख से वंचित हूं। सो मैंने नेपाल वापस लौटने का मन बना लिया। और इस तरह 2012 में क्रिसमस की छुट्टियों में नेपाल आया। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2012 में उन्होंने हिमालय की अपनी पहली चढ़ाई-लोबुचे ईस्ट के शिखर पर पूरी की। इस स्मृति को साझा करते हुए, पुर्जा ने कहा था कि पर्वतारोहण के दौरान मेरे मन में बस एक ही ख्याल आता था कि पर्वत के शिखर पर चढ़कर मैं क्या देखूंगा? लेकिन, जब लोबुचे ईस्ट के शिखर पर पहुंचा तो मैं आश्चर्यचकित था, यह अनुभव करके कि ये पर्वत निर्जीव नहीं हैं, बल्कि बहुत जीवंत और प्राणवान हैं। उन्हें महसूस करने के लिए संजीदगी चाहिए। इसके बाद तो हमेशा मुझे ऐसा लगता कि मुझे पर्वत अपने पास बुला रहे हैं।
निर्मल पुर्जा ने पहली बार सर्दी के मौसम में काराकोरम के के-टू के 28000 फुट ऊंचे पर्वत को अपने कदमों से लांघ दिया था। इसे उन्होंने 37 साल की उम्र में केवल 21 दिनों में पूरा किया। हालांकि वह नेपाल के चर्चित शेरपा समुदाय के नहीं थे। ऐसा देखा गया है कि माउंट एवरेस्ट के के-टू पर चढ़ने की कोशिश करने वालों में से लगभग हर छह में से एक की मौत हो जाती है, जबकि माउंट एवरेस्ट में मौत का औसत लगभग 34 में एक है। इससे अनुमान लगाया जा सकता है कि यह कितनी कठिन और चुनौतीपूर्ण चढ़ाई है।
अपनी इस यात्रा के बारे में उनका कहना था कि इसका संबंध पालन-पोषण से है। के-2 का मौसम बहुत ही अनिश्चित रहता है। के-2 पर सिर्फ पेशेवर पर्वतारोही जाते हैं। अगर सभी शेरपाओं को हटा दो और एवरेस्ट पर अकेले चढ़ना हो तो यह कठिन है। एवरेस्ट तो नेपालियों ने आसान बना दिया है क्योंकि हम यहां काम करते हैं। के-2 गिलगित-बल्तिस्तान में है। दोनों अलग-अलग पर्वत हैं। एवरेस्ट 9000 मीटर ऊंचा है। इस पर एक मौसम में दो हजार चढ़ते हैं, जबकि के-2 पर पचास लोग मुश्किल से पहुंच पाते हैं। माउंट एवरेस्ट कोई चैक नहीं है, वो बहुत विशाल है, इसलिए हर साल 2000 पर्वतारोहियों का आना कोई बहुत बड़ी संख्या नहीं है।
उन्होंने केवल छह महीने और छह दिन में विश्व के 8000 ऊंचाई वाले 14 पर्वत शिखरों पर चढ़ने का कीर्तिमान बनाया। इतना ही नहीं, वह पहले व्यक्ति थे, जिन्होंने माउंट एवरेस्ट, ल्होत्से और मकालु पर्वतों का मात्र 48 घंटे में चढ़ाई पूरी की थी। वह 2012 से 2022 यानी इन दस वर्ष में छह बार माउंट एवरेस्ट पर चढ़ाई करने वाले शिखर पुरुष बन गए। इसी दौरान वर्ष 2018 में उन्हें ब्रिटेन की महारानी एलिजाबेथ द्वितीय द्वारा सम्मानित किया गया। उन्हें उच्च ऊंचाई वाले पर्वतारोहण में उत्कृष्ट कार्य करने के लिए ‘ऑडर ऑफ द ब्रिटिश एंपायर’ का सदस्य नियुक्त किया गया।
पर्वतारोहण के शौक और सपने के कारण उन्होंने 2018 में सेना से सेवानिवृत्ति ले ली। पेंशन से अपना जीवन-यापन करते थे। दिलचस्प है कि सेना से मिलने वाली इस पेंशन को वे ‘जीवन बदलने वाली राशि’ कहते थे।वे मानते थे कि कोई भी व्यक्ति अपने सपने को पूरा कर सकता है और अपनी जिंदगी को बेहतर बना सकता है।

















