भारत लगातार अपनी रक्षा तैयारियों को मजबूत करता जा रहा है। इसके तहत आत्मनिर्भर भारत के तहत लगातार एक्शन लिया जा रहा है। इसी क्रम में रक्षा मंत्रालय ने भारतीय वायुसेना के लिए 60 बहुउद्देश्यीय परिवहन विमान (MTA) खरीदने का टेंडर जारी किया है। इस टेंडर की कीमत करीब एक लाख करोड़ रुपये है। यह कदम वायुसेना के पुराने परिवहन विमानों को बदलने और उनकी ताकत बढ़ाने के लिए उठाया गया है।
पुराने विमानों की जगह नए विमान
वायुसेना में लंबे समय से सोवियत काल के एंटोनोव एएन-32 जैसे पुराने कार्गो विमान चल रहे हैं। इनकी उम्र बढ़ चुकी है, इसलिए इन्हें बदलने की जरूरत महसूस की जा रही थी। नए एमटीए विमान 18 से 30 टन तक का सामान ले जा सकेंगे। इनसे सैनिकों, हथियारों और जरूरी सामान को तेजी से एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाया जा सकेगा। जरूरत पड़ने पर इनका इस्तेमाल हवा में दूसरे विमानों में ईंधन भरने के लिए भी किया जा सकता है।
किन कंपनियों को मिला टेंडर
रक्षा अधिकारियों के मुताबिक यह टेंडर हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल), टाटा और महिंद्रा समेत कई भारतीय कंपनियों को दिया गया है। इस पूरे कार्यक्रम में भारतीय कंपनियां मुख्य भूमिका निभाएंगी। महिंद्रा डिफेंस ने ब्राजील की कंपनी एम्ब्रेयर के साथ समझौता किया है। वे सी-390 परिवहन विमान बनाने की पेशकश कर रहे हैं। टाटा ने अमेरिका की लॉकहीड मार्टिन के साथ हाथ मिलाया है। वे सी-130 विमान बनाने वाले हैं। यह विमान पहले से ही वायुसेना के खास अभियानों में इस्तेमाल हो रहा है। वायुसेना के पास फिलहाल 12 सी-130जे सुपर हरक्यूलिस विमान हैं।
इसे भी पढ़ें: NEET Paper leak case: दिल्ली कोर्ट ने CBI के आरोपपत्र का संज्ञान लिया, 13 आरोपियों पर आज सुनवाई
भारत में बनेगा ज्यादातर हिस्सा
योजना के अनुसार करीब 20 प्रतिशत विमान पूरी तरह तैयार हालत में (फ्लाई-अवे) आएंगे। बाकी करीब 80 प्रतिशत विमान भारत में ही बनाए जाएंगे। इनमें 60 प्रतिशत से ज्यादा स्वदेशी कलपुर्जे इस्तेमाल होंगे। विमान भारतीय कंपनियों और विदेशी मूल उपकरण निर्माताओं के बीच संयुक्त उद्यम के जरिए तैयार होंगे।
मौजूदा अन्य परियोजनाएं
वायुसेना पहले से एयरबस के साथ सी-295 परिवहन विमानों पर काम कर रही है। करीब 70 ऐसे विमान शामिल किए जाने हैं और इनमें से ज्यादातर भारत में ही बनेंगे। इसके अलावा वायुसेना 114 राफेल लड़ाकू विमान खरीदने का टेंडर भी जारी कर चुकी है। हाक जेट ट्रेनर विमानों की जगह 100 से ज्यादा नए ट्रेनर विमान शामिल करने पर भी विचार चल रहा है।
यह टेंडर मेक इन इंडिया को बढ़ावा देने और देश में रक्षा उत्पादन बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। भारतीय कंपनियां विदेशी साझेदारों के साथ मिलकर न सिर्फ विमान बनाएंगी बल्कि तकनीक भी हासिल करेंगी।

















