18 जुलाई 2026 को ग्रीस में एथेंस के किपसेली इलाके में एक अकेली इमारत या कहें उसकी पार्किंग में एक आदमी को कपड़े में लिपटा हुआ सूटकेस मिला। उसने एक आस के साथ उस सूटकेस को खोला। उसकी हैरत का ठिकाना नहीं रहा जब उसने देखा कि उसमें एक सड़ा गला शव है। वह शव एलिजाबेथ का था, और उसकी मौत शव मिलने से लगभग 5-7 दिन पहले ही हो चुकी थी।
कौन थीं एलिजाबेथ?
अब प्रश्न उठता है कि एलिजाबेथ कौन थीं और क्यों उनकी हत्या पर इस तरह से हंगामा है? दरअसल वे एक स्कॉटिश सहायता कर्मी थीं और वे ग्रीस में शरणार्थियों के लिए काम करती थीं। वे एडिनबर्ग के एक प्रमुख वकील की बेटी थीं।
एलिजाबेथ एक समर्पित समाज सेविका थी और एक ठीक ठाक परिवार के होने के बाद भी उन्होंने अपना सारा जीवन शरणार्थियों के लिए समर्पित कर दिया था। और इसी काम के लिए वह 26 जून 2026 को एथेंस आई थी। मगर उसे नहीं पता था कि वह जिस समुदाय के लिए काम करने के लिए आ रही है, उन्हीं में से एक आदमी उसकी हत्या कर देगा।
एथेंस के शरणार्थी बहुल इलाकों में एलिजाबेथ ने सेवा शुरू कर दी। एलिजाबेथ के दिल में यूरोप में आने वाले शरणार्थियों के प्रति बहुत प्रेम था। और एलिजाबेथ यूरोप में शरणार्थियों को कोई समस्या न हो, इसके लिए हर संभव कोशिश करती थीं। एलिजाबेथ का प्रयास रहता था कि वह उन्हीं शरणार्थियों के बीच जाकर ही रहें। इसी प्रक्रिया में एलिजाबेथ 10 जुलाई 2026 को इसी व्यवस्था से जुड़े हुए इलाके के एक अपार्टमेंट में वे रहने चली गईं।
बस यही एलिजाबेथ के जीवन का सबसे अलग क्षण था। या कहें सबसे दुखद क्षण था। उसके बाद उनका शव 18 जुलाई 2026 को मिलता है। और यह पता चलता है कि उनकी हत्या तो 5-7 दिन पहले ही हो चुकी होती है। अर्थात 10 जुलाई 2026 को वह रहने गईं और 18 जुलाई को उनका शव मिला।
किसने किया?
फिर यह सवाल उठा कि आखिर यह किसने किया है? एथेंस की पुलिस ने 26 साल के अफ़गान नागरिक शरीफ अहमदजई को गिरफ्तार किया। और सबसे मजे की बात यही है कि वह खुद लगभग 10 साल पहले शरणार्थी बनकर ग्रीस में आया था। और वह उसी शरणार्थी सहायता नेटवर्क अर्थात Love Every Nation के साथ जुड़ा था, जिसके साथ जुड़कर एलिजाबेथ काम कर रही थी।
उसके पास एलिजाबेथ के अपार्टमेंट की चाबी थी। उसने एलिजाबेथ की हत्या की और फिर गुमराह करने के लिए एलिजाबेथ के फोन से परिजनों को गुमराह करने के लिए संदेश भेजता रहा और यहाँ तक कि उसने एलिजाबेथ के अकाउंट से पैसे भी निकाले।
सोशल मीडिया पर इसे Suicidal sympathy कहा जा रहा है
यह घटना सोशल मीडिया पर इसीलिए वायरल है क्योंकि एलिजाबेथ जैसी लड़कियां यह नहीं समझ पाती हैं कि उन्हें अपनी सहानुभूति आखिर कहाँ और किसे दिखानी है? लोगों का कहना है कि एलिजाबेथ जैसी लड़कियां जो खुद ईसाई होती हैं, मगर उन लोगों के लिए ईसाई देश में बसने को लेकर काम करती हैं, जो ईसाइयों की धार्मिक पहचान मिटाना चाहते हैं और ईसाइयों की जान के दुश्मन होते हैं। मगर फिर भी वे इस पर ध्यान नहीं देती हैं। और अंतत: उनकी हिंसा का शिकार हो जाती हैं।
अर्थात एलिजाबेथ ने जीवन भर मुसलमानों को ईसाई देशों में बसाने का काम किया, और अंत में अफगानी मुसलमान ने ही उनकी इतनी निर्ममता से हत्या कर दी और शायद ऐसा करने का उसके पास कोई खास कारण भी नहीं रहा होगा?
स्पेन की पाउला सोलनास डे मिगुएल की भी यही कहानी
जहां 18 जुलाई 2026 को स्कॉटलैंड की एलिजाबेथ की लाश मिली तो वहीं स्पेन की Paula Solanas de Miguel की भी कहानी कुछ खास अलग नहीं थी, जिसकी हत्या उसके पार्टनर ने कर दी थी। वैसे तो उसके पार्टनर का नाम मीडिया में गोपनीय रखने की बात काही जा रही है, मगर सोशल मीडिया के अनुसार वह 39 वर्षीय नबील खलिसी है, जो कि एक मोरक्को मूल का मुसलमान है।
पॉला भी रेड क्रॉस की वॉलन्टियर थी, जो जेन्डर वाएलेन्स अवेर्नेस कार्यशालाएं चलाती थी। वह भी लिबरल विचारों की महिला थी, जिसके लिए इंसानियत ही सबसे बढ़कर थी।
दरअसल पॉला अपने चार साल के रिश्ते को खत्म करना चाहती थी, मगर उसके पार्टनर को यह सहन नहीं हुआ और उसने उसकी चाकू मारकर हत्या कर दी। अधिकारियों के अनुसार उसके पार्टनर को गिरफ्तार कर लिया गया और उसके बाद उसने अपने अपराध को कुबूल कर लिया है।
यह केवल दो ही महिलाओं की कहानी नहीं?
मगर यह केवल इन्हीं दो महिलाओं की कहानी नहीं है कि जिन्हें उन लोगों के हाथों मौत मिली, जिनके प्रति इनके दिल में संवेदना थी, और वे ऐसे लोग थे जो उनकी धार्मिक पहचान के खिलाफ थे। और जिन्हें उनके देश से भी कोई संवेदना नहीं थी।
वर्ष 2016 में जर्मनी में मारिया नामक लड़की की हत्या भी एक अफ़गान शरणार्थी ने कर दी थी। 19 वर्षीय मारिया मेडिकल की छात्रा थी और वह खाली समय में शरणार्थियों के लिए काम करती थी। ऐसे ही वर्ष 2019 में स्विट्ज़रलैंड में 26 वर्षीय जूलिया की भी हत्या एक ऐसे शरणार्थी ने कर दी थी, जिसकी फ़ाइल पर वह खुद काम कर रही थी।
ऐसे तमाम मामले हुए हैं, जिनमें लिबरल लड़कियों का शिकार उन लोगों ने किया, जिनके लिए वे काम करने के लिए आई थीं। मगर फिर भी फेमिनिस्ट महिलाओं के एजेंडे में यह हत्याएं या कातिल या इन्हें सजा दिलाने की बात नहीं होती है।











